बिहार के भोजपुर में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में उत्तर प्रदेश के दीपक दीक्षित पर प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी है. शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के बाद सोशल मीडिया पर धमकी भरे वीडियो जारी करने के मामले में पुलिस ने कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है. फिलहाल, पुलिस यह पता लगा रही है कि वायरल पोस्ट का सोर्स क्या है? उन्हें किस प्रकार वायरल किया गया. उनमें किसी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ तो नहीं की गई.
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ धमकी भरे संदेश
पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रायबरेली के निवासी दीपक दीक्षित उर्फ पंडित के खिलाफ उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. पुलिस के अनुसार, एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कई वीडियो और बयान वायरल हुए, जिनमें भोजपुर पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां और धमकी भरे संदेश प्रसारित किए गए.
वायरल वीडियो की जांच में जुटी टीम
प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इन सामग्रियों की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना एवं तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस यह पता लगा रही है कि वायरल वीडियो और पोस्ट का मूल सोर्स क्या है, उन्हें किस प्रकार प्रसारित किया गया. उनमें किसी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ तो नहीं की गई.

Photo Credit: bhojpur police
वीडियो सही पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
भोजपुर पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी. यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों को जान से मारने की धमकी दी, हिंसा के लिए उकसाया या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी.
वीडियो में पुलिस मुठभेड़ को लेकर कई गंभीर आरोप
प्रेस रिलीज में यह भी बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस मुठभेड़ को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की भी अलग से जांच की जा रही है और प्रत्येक जानकारी का तथ्य का सत्यापन किया जाएगा. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई केवल उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी.
पुलिस ने खोली दीपक दीक्षित की क्राइम कुंडली
भोजपुर पुलिस ने दीपक दीक्षित उर्फ पंडित के कथित आपराधिक इतिहास का भी उल्लेख किया है. पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ मध्य प्रदेश के विभिन्न थानों में महिला से छेड़छाड़, दुष्कर्म और फोटो एवं वीडियो वायरल करने जैसे गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने का रिकॉर्ड उपलब्ध है. हालांकि पुलिस ने इन मामलों के अंतिम न्यायिक परिणाम की जानकारी नहीं दी है. इसलिए इन मामलों को फिलहाल पुलिस के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए और अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग किसी सरकारी अधिकारी को धमकी देने, हिंसा भड़काने या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता. सोशल मीडिया पर वायरल प्रत्येक संदिग्ध सामग्री पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद कई वीडियो वायरल
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर कई प्रकार के दावे और वीडियो सामने आए हैं. इन्हीं में से कुछ वीडियो और बयानों को आधार बनाकर पुलिस ने जांच शुरू की है. अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी को पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति है तो उसके लिए न्यायालय और अन्य वैधानिक मंच उपलब्ध हैं, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से धमकी देना या हिंसा के लिए उकसाना कानूनन स्वीकार्य नहीं है.
अफवाह फैलाने वालों पर होगा एक्शन
भोजपुर पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी अपुष्ट वीडियो, पोस्ट या भड़काऊ संदेश को बिना सत्यापन के साझा न करें. यदि सोशल मीडिया पर किसी प्रकार की धमकी, अफवाह या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली सामग्री दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने और झूठी जानकारी प्रसारित करने वालों के विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल इस पूरे मामले में तकनीकी जांच जारी है. जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर से जुड़े इस नए घटनाक्रम पर प्रशासन और आम लोगों की नजर बनी हुई है. अब पूरे मामले की दिशा जांच रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी.
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