NH-107 पूर्णिया-सहरसा मार्ग पर मंगलवार रात भीषण सड़क हादसा हुआ. जानकीनगर थाना क्षेत्र के चैनपुरा गांव के समीप खड़े ट्रक में बाइक घुस गई, जिसमें बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई. मृतक की पहचान मधेपुरा जिला के मुरलीगंज नगर पंचायत वार्ड नंबर 10 निवासी सुधीर राम और मधेपुरा के नारायणपट्टी मुरहो निवासी विक्की राम (21) के रूप में हुई है, जो एक दूसरे के रिश्तेदार हैं.
घर में बज रही थी शहनाई
मंगलवार को मृतक सुधीर की बहन की शादी थी. घर में बरात के स्वागत की तैयारी चल रही थी. बहन पलक दुल्हन बनी बैठी थी. इसी बीच सुधीर को कुछ जरूरी काम से 10 किलोमीटर दूर अपने ससुराल जानकी नगर थाना क्षेत्र के मधुबन जाना पड़ा. पिता से बरात पहुंचने तक वापस लौटने की बात कहकर वह अपने रिश्तेदार के साथ बाइक से रवाना हुआ, लेकिन महज 2 किलोमीटर दूर जाने के बाद ही हादसा हो गया, और घटनास्थल पर ही सुधीर ने दम तोड़ दिया.
हादसे की बात छुपाकर, कराई शादी
बरात दरवाजे पर आ चुकी थी, और वरमाला की रस्म भी पूरी हो गई. इसके बाद पिता मनोज राम को हादसे की सूचना मिली. खुशियां मातम में ना तब्दील हो जाए, इसलिए मनोज राम ने कलेजे पर पत्थर रखकर बात को छुपाए रखा. शादी की रस्म पूरी कराई. इस बीच गुपचुाप तरीके से परिवार के कुछ लोग घटनास्थल पर रवाना हो गए.
दूसरे भाई से रस्म पूरी कराई
वह पल बड़ा ही अजीबो-गरीब रहा, जब एक रस्म में सुधीर को बहन के साथ मौजूद रहना था. दरअसल कोसी-सीमांचल के इलाके में 'लावा छीटाई 'की एक रस्म होती है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन के साथ भाई इस रस्म को मूर्त रूप देता है. उस वक्त जब सुधीर की खोज हुई तो उसे दूसरे काम में व्यस्त होने की बात कहकर दूसरे भाई से रस्म की औपचारिकता पूरी की गई. इस प्रकार बहन पलक भाई के नहीं होने की बात से अनजान रही, और शादी संपन्न हो गई.
सारी खुशियां मातम में बदली
शादी की रस्म जब पूरी हो गई तो बरात को आनन-फानन में अहले सुबह विदा कर दिया गया, लेकिन दूल्हा-दुल्हन की विदाई को स्थगित कर दिया गया. इसके बाद घटना की बात पूरे मोहल्ले में कानोकान फैल गई. थोड़ी देर पहले जहां महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं, वही चीख में बदल गई. सुधीर की विधवा रह-रह कर बेहोश हो जा रही थी. वह अपने पीछे एक 5 वर्ष का बेटा और 21 दिन की दुधमुंही बिटिया छोड़ गया. पिता मनोज राम असहाय खड़े थे, मानो उन्हें काठ मार गया हो. सुधीर ही कमाने वाला था, जो पूरा परिवार चलाता था.
पहले उठी भाई की अर्थी फिर बहन हुई विदा
पूर्णिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सुधीर और विक्की का पोस्टमार्टम पूरा हुआ, और दोपहर बाद सुधीर का शव मुरलीगंज स्थित आवास पर पहुंचा. उस वक्त जो वहां हृदय विदारक दृश्य था, वह पत्थर दिल इंसान पर भी भारी साबित हो रहा था. लाल जोड़े में सजी बहन शव से लिपटकर विलाप करते हुए कह रही थी हो भैया आब के हमरा विदागरी कराबे जयते हो 'भैया (अब मुझे कौन ससुराल से विदा कराकर मायका वापस लाएगा). बमुशिकल लोगों ने पलक को सुधीर के शव से जुदा किया और सुधीर की अंतिम यात्रा आरम्भ हुई.
(इनपुट- पंकज भारतीय)
यह भी पढ़ें: 'ऑपरेशन ब्लैक टिकट' पर बेनकाब हुए हैकर्स, जिस टिकट को आप बुक नहीं कर पाए, उसे दलाल महंगे में ऐसे बेचता है
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं