
लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)
पटना:
लालू प्रसाद यादव ने आरक्षण को लेकर एक बार फिर से संघ और बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया है। एनडीटीवी संवाददाता बरखा दत्त से बात करते हुए लालू यादव ने भाजपा कार्यकर्ताओं को RSS के दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर की किताब 'Bunch Of Thoughts' को जलाने की चुनौती दी। लालू ने गोलवलकर की किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि इसमें साफ लिखा है कि आरएसएस और बीजेपी पिछड़ी जातियों के साथ नहीं है।
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गोलवलकर की किताब को हाथ में लेते हुए लालू ने कहा 'अमित शाह के गुरु, नरेंद्र मोदी के गुरु और बीजेपी में सबके गुरु गोलवलकर की इस किताब में लिखा है कि दलितों को और ट्रायबल को जाति के आधार पर आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। इससे ऊंची जाति के लोगों के मन में रोष पैदा होता है।'
विचारों की गठरी को जलाओ...
हालांकि भाजपा ने साफ किया है कि आरक्षण नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा लेकिन लालू यादव का कहना है कि 'अगर आपका मन इतना ही साफ है तो मोहन भागवत को निकालो और विचारों की इस गठरी को जलाओ जिसमें मन की बात है।'
इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले महीने यह बयान देकर नए विवाद को जन्म दे दिया था कि आरक्षण व्यवस्था का जमकर दुरुपयोग हो रहा है इसलिए इस पर विचार करने का समय आ गया है। भागवत यहीं नहीं रुके थे, उन्होंने यह भी कहा था कि आरक्षण की जरूरत और समयसीमा को लेकर एक समिति बनाई जानी चाहिए। बिहार चुनाव के ठीक पहले आए इस बयान ने भाजपा को काफी परेशानी में डाल दिया था और स्वयं पीएम को इसे लेकर सफाई देनी पड़ी थी।
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गोलवलकर की किताब को हाथ में लेते हुए लालू ने कहा 'अमित शाह के गुरु, नरेंद्र मोदी के गुरु और बीजेपी में सबके गुरु गोलवलकर की इस किताब में लिखा है कि दलितों को और ट्रायबल को जाति के आधार पर आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। इससे ऊंची जाति के लोगों के मन में रोष पैदा होता है।'
विचारों की गठरी को जलाओ...
हालांकि भाजपा ने साफ किया है कि आरक्षण नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा लेकिन लालू यादव का कहना है कि 'अगर आपका मन इतना ही साफ है तो मोहन भागवत को निकालो और विचारों की इस गठरी को जलाओ जिसमें मन की बात है।'
इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले महीने यह बयान देकर नए विवाद को जन्म दे दिया था कि आरक्षण व्यवस्था का जमकर दुरुपयोग हो रहा है इसलिए इस पर विचार करने का समय आ गया है। भागवत यहीं नहीं रुके थे, उन्होंने यह भी कहा था कि आरक्षण की जरूरत और समयसीमा को लेकर एक समिति बनाई जानी चाहिए। बिहार चुनाव के ठीक पहले आए इस बयान ने भाजपा को काफी परेशानी में डाल दिया था और स्वयं पीएम को इसे लेकर सफाई देनी पड़ी थी।
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