- बिहार में इस बार बीजेपी का सीएम होगा, पार्टी ने इस पद के लिए माथापच्ची शुरू कर दी है
- बीजेपी सीएम चुनने में कई बातों का ध्यान रखने वाली है
- बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कुछ दिन पहले राज्यसभा में जाने का किया है फैसला
बिहार में जब नए मुख्यमंत्री के चयन की नौबत आएगी, तो यह फैसला सिर्फ किसी एक नेता का नाम तय करने भर का मामला नहीं होगा. इसके पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक फैक्टर काम करेंगे. मुख्यमंत्री का चेहरा तय करते समय सबसे पहले जातीय समीकरण को देखा जाएगा, क्योंकि बिहार की राजनीति में सामाजिक संतुलन हमेशा से सबसे बड़ा फैक्टर रहा है. यह देखा जाएगा कि नया चेहरा किस सामाजिक वर्ग से आता है और उसका राज्य के अलग-अलग समुदायों पर कितना प्रभाव है. पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा, दलित और सवर्ण समुदाय के बीच संतुलन बनाना हमेशा से सत्ता की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है.
बीजेपी के लिए जेडीयू का साथ जरूरी
दूसरा बड़ा फैक्टर जेडीयू की सहमति होगा. भले ही बीजेपी अब बिहार में ज्यादा मजबूत स्थिति में दिख रही हो, लेकिन एनडीए की सरकार चलाने के लिए जेडीयू को साथ रखना जरूरी है. अगर मुख्यमंत्री बीजेपी का होता है, तो भी यह देखा जाएगा कि जेडीयू उस नाम पर कितना सहज है। बिना जेडीयू की सहमति के कोई फैसला लेने से गठबंधन के भीतर असंतोष बढ़ सकता है, इसलिए इस पहलू को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा. जेडीयू के तरफ से इसपर फैसला खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लेंगे.
कौन बनेगा बिहार का नया सीएम?
तीसरा अहम पहलू संगठन में स्वीकार्यता का होगा. मुख्यमंत्री बनने वाला चेहरा ऐसा होना चाहिए जिसे पार्टी के विधायक, नेता और कार्यकर्ता आसानी से स्वीकार कर सकें. अगर किसी नेता को केवल शीर्ष नेतृत्व का समर्थन हो लेकिन संगठन में व्यापक समर्थन न हो, तो सरकार चलाना मुश्किल हो सकता है. इसलिए अक्सर ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जाती है जिनकी संगठन में पकड़ मजबूत हो और जो विभिन्न धड़ों के बीच संतुलन बना सकें.
शीर्ष नेतृत्व की हरी झंडी से ही अंतिम फैसला
चौथा फैक्टर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व का फैसला होगा. बिहार की राजनीति में अब बीजेपी की भूमिका पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है. ऐसे में मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व की रणनीति और चुनावी गणित को देखते हुए ही लिया जाएगा. राज्य के नेताओं की दावेदारी जरूर होगी, लेकिन अंतिम मुहर केंद्रीय नेतृत्व ही लगाएगा.
बीजेपी की क्या होगी रणनीति?
इसके अलावा राजनीतिक संदेश का पहलू भी अहम रहेगा. बीजेपी अगर मुख्यमंत्री का चेहरा आगे करती है तो वह ऐसा नेता चुनना चाहेगी जो सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर मजबूत संदेश दे सके. आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए भी फैसला किया जा सकता है, ताकि पार्टी को राजनीतिक फायदा मिले.
गठबंधन को साधने की कवायद
गठबंधन की आंतरिक राजनीति भी इस फैसले को प्रभावित करेगी. एनडीए में जेडीयू के अलावा अन्य सहयोगी दल भी हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री का चेहरा तय करते समय यह भी ध्यान रखा जाएगा कि गठबंधन के भीतर संतुलन बना रहे और किसी दल को यह महसूस न हो कि उसे नजरअंदाज किया गया है.
कुल मिलाकर बिहार के नए मुख्यमंत्री का चयन कई स्तरों पर होने वाला राजनीतिक फैसला होगा. जातीय समीकरण, जेडीयू की सहमति, संगठन में स्वीकार्यता, केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति और गठबंधन की मजबूरी, इन सभी फैक्टरों का संतुलन ही तय करेगा कि बिहार की सत्ता की कमान आखिर किसके हाथ में जाएगी.
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