भारत में जल्द ही ऐसी कार लॉन्च हो सकती है जो 100 प्रतिशत एथेनॉल (E100) पर चल सकेगी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 5 जून को यानी विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, भारत की पहली E100-कम्पैटिबल फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार पेश करेंगे. यह भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

क्या है E100 फ्लेक्स-फ्यूल कार?
फ्लेक्स-फ्यूल कार ऐसी गाड़ी होती है जो एथेनॉल और पेट्रोल जैसे अलग-अलग ईंधनों पर चल सकती है. लेकिन E100 का मतलब है कि यह कार 100 प्रतिशत शुद्ध एथेनॉल पर चलने में सक्षम होगी, जिसमें पेट्रोल की कोई मिलावट नहीं होगी. यह तकनीक भारत में पहली बार बड़े स्तर पर पैसेंजर कार सेगमेंट में आ सकती है.
नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने बताया कि यह नई कार भारत की फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पेट्रोल, डीजल और गैस के रूप में आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा खर्च होती है और प्रदूषण भी बढ़ता है.
WagonR या Fronx हो सकती है पहली E100 कार
हालांकि Maruti Suzuki ने अभी तक ऑफिशियल तौर पर कार के मॉडल का नाम नहीं बताया है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार WagonR Flex-Fuel और Fronx Flex-Fuel इस लॉन्च के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं.
Maruti Suzuki पहले भी इन दोनों मॉडलों के फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप अलग-अलग ऑटो शो में दिखा चुकी है. WagonR फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल को Bharat Mobility Global Expo में पेश किया गया था, जबकि Fronx का एथेनॉल-कम्पैटिबल वर्जन विदेशों में दिखाया गया था.
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E100 कार में क्या होगा अलग?
सामान्य पेट्रोल कारों की तुलना में E100 फ्लेक्स-फ्यूल कार में कई तकनीकी बदलाव किए जाते हैं. एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में ज्यादा संक्षारक (corrosive) होता है और नमी जल्दी सोखता है. इसलिए ऐसी कारों में स्पेशल फ्यूल लाइन, इंजेक्टर, सील और इंजन के अंदरूनी पार्ट्स लगाए जाते हैं ताकि हाई एथेनॉल फ्यूल को सुरक्षित तरीके से संभाला जा सके.
इसके अलावा इंजन की कैलिब्रेशन भी अलग होती है, जिससे कार बेहतर परफॉर्मेंस और सुरक्षित ऑपरेशन दे सके.
एथेनॉल फ्यूल क्यों है फायदेमंद?
सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित मोबिलिटी भारत के लिए किफायती और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकती है. नितिन गडकरी के अनुसार, एथेनॉल की कीमत लगभग 65 रुपये प्रति लीटर हो सकती है, जो पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ती पड़ सकती है.
इससे वाहन चलाने की लागत कम हो सकती है और आम लोगों को ईंधन खर्च में राहत मिल सकती है. साथ ही एथेनॉल उत्पादन गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से होता है, जिससे किसानों को भी फायदा मिलेगा और घरेलू कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी.
अन्य कंपनियां भी कर रही हैं तैयारी
सिर्फ Maruti Suzuki ही नहीं, बल्कि Toyota, Tata Motors, Mahindra & Mahindra और Suzuki जैसी कई कंपनियां भी भारतीय बाजार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं.
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