9 planets and family relationships: ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी पर जन्म लेने के बाद व्यक्ति का जुड़ाव 9 ग्रहों से हो जाता है और ये सभी ग्रह आजीवन उस पर अपना शुभ-अशुभ प्रभाव डालते हैं. नवग्रहों के दोष से से बचने के लिए सनातन परंपरा में देवी-देवताओं और पेड़ों की पूजा से लेकर रत्नों और जड़ी-बूटियों आदि से जुड़े कई उपाय बताए गये हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा किये गये ये उपाय तब तक पूरी तरह से कारगर नहीं साबित होते, जब तक आप नवग्रहों से जुड़े रिश्तों की कद्र नहीं करते हैं। आइए जानते हैं कि किस ग्रह से कौन सा रिश्ता जुड़ा होता है।
सूर्य
ज्योतिष शास्त्र में जिस ग्रह को नवग्रहों का राजा माना गया है, उसका संबंध पिता से होता है। ऐसे में यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर होकर आपकी परेशानियों का कारण बन रहा है तो आपको ज्योतिष के तमाम उपायों को करने के साथ पिता का आदर करना चाहिए। यदि पिता न हों तो पिता समान व्यक्ति के साथ अपने संबंध सही रखें।
चंद्रमा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा का संबंध मन, माता और मौसी से माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा शुभ फल देता है वे मन से शांत रहते हैं, जबकि चंद्र दोष होने पर व्यक्ति को मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा का शुभ फल पाने के लिए व्यक्ति को तमाम तरह के ज्योतिष उपायों को करने के साथ अपनी माता और मौसी को प्रसन्न रखने का प्रयास करना चाहिए।
मंगल
ज्योतिष में मंगल ग्रह का संबंध भाई और मित्रों से होता है। ऐसे में यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होने के कारण आपके पराक्रम या आत्मविश्वास में कमी आ रही हो तो आपको सबसे पहले अपने भाई और मित्रों के साथ रिश्ते मधुर बनाने का प्रयास करना चाहिए। अगर आप चाहते हैं कि आपको कुंडली में मंगल का शुभ फल प्राप्त हो तो भूलकर भी अपने भाई के साथ धोखा न करें और न ही उसके साथ कोई विवाद करें।
बुध
ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में बुध कमजोर होकर दोष उत्पन्न करना करता है, उनके रिश्ते अपनी बहन, बुआ और बेटी के साथ अच्छे नहीं रहते हैं। ऐसे में बुध ग्रह से जुड़े अशुभता को दूर करने के लिए व्यक्ति को हमेशा अपने बहन और बुआ को पूरा सम्मान देते हुए उन्हें हर समय प्रसन्न करने का प्रयास करना चाहिए।

बृहस्पति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति का संबंध गुरु, साधु-संतो, अध्यापकों से जुड़ा होता है। ऐसे में यदि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह से जुड़े दोष सौभाग्य की प्राप्ति में बाधक बन रहे हों तो आपको आज से ही अपने गुरुओं और साधु-संतों को आदर-सम्मान देते हुए उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करना प्रारंभ कर देना चाहिए।
शुक्र
ज्योतिष में शुक्र ग्रह तमाम तरह के सुखों, भोग-विलास और ऐश्वर्य आदि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में शुक्र मजबूत होता है, उसे जीवन से जुड़े तमाम सुख आसानी से प्राप्त होते हैं जबकि इससे जुड़ा दोष होने पर इसे पान के लिए संघर्ष करना पड़ता है। जिस शुक्र से संबंधित दोष होने पर व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती है, उसे दूर करने के लिए व्यक्ति को शुक्र के तमाम उपायों को करने के साथ अपने जीवनसाथी और विवाहित स्त्रियों की भावनाओं की कद्र करते हुए उन्हें प्रसन्न रखने का प्रयास करना चाहिए।
शनि
ज्योतिष में शनि ग्रह का संबंध सेवक, नौकर, कामगार मजदूर और अधीनस्थ कर्मचारियों से जोड़कर देखा जाता है। जिन लोगों की कुंडली में शनि कमजोर होकर कष्टों का कारण बन रहा हो, उन्हें अपने नीचे काम करने वाले या फिर कमजोर वर्ग को कभी भी नहीं सताना चाहिए। ऐसे लोगों की आप जितनी मदद करके उन्हें प्रसन्न रखने का प्रयास करें, आप पर उतनी ही शनि कृपा बरसेगी।
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राहु
ज्योतिष के अनुसार कुंडली में स्थित राहु का कनेक्शन आपके ससुराल पक्ष से होता है। ऐसे में यदि आपकी कुंडली मे राहु कष्टों का कारण बन रहा हो तो आपको भूलकर भी अपने साले और ससुर का अपमान नहीं करना चाहिए, बल्कि उनका सम्मान करते हुए हमेशा प्रसन्न रखने का प्रयास करना चाहिए।
केतु
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुंडली में स्थित केतु का कनेक्शन उसके नाना से होता है। ऐसे में यदि आपकी कुंडली में केतु आपकी परेशानी का बड़ा कारण बन रहा हो तो उससे मुक्ति पाने के लिए अपने नाना का आदर और सम्मान करना चाहिए।
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