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Anil Agarwal Kissa: जब एक 'बिहारी लड़के' ने मुंबई के होटल में सुनाया किस्सा, सपनों के उड़ान की वो पहली सीढ़ी

होटल में अनिल अग्रवाल चुपचाप एक कोने में बैठ गए. जब चर्चा के बीच थोड़ा सन्नाटा हुआ, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित बेबाकी के साथ पूछा- 'एक बिहारी जोक सुनाएं आप लोगों को?'. कमरे में बैठे दिग्गज चौंक गए. पूरी कहानी अंदर पढ़ें.

Anil Agarwal Kissa: जब एक 'बिहारी लड़के' ने मुंबई के होटल में सुनाया किस्सा, सपनों के उड़ान की वो पहली सीढ़ी

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल आज भले ही 35,000 करोड़ से ज्‍यादा की संपत्ति के मालिक हैं और दुनिया के दिग्‍गज कारोबारियों में उनकी गिनती होती है, लेकिन उनके दिल के किसी कोने में आज भी एक बच्‍चा रहता है. अपने कई इंटरव्‍यूज में, अपनी बातों में वो कई बार ये जाहिर कर चुके हैं. कभी वो 19-20 साल के लड़के हुआ करते थे, तब बिहार से मुट्ठी भर सपने लेकर मुंबई पहुंच गए थे. अनिल अग्रवाल अक्सर अपनी सफलता का श्रेय उन अनुभवों को देते हैं, जो उन्होंने मुंबई की सड़कों और बड़े लोगों की संगत से सीखे. ऐसा ही एक यादगार किस्सा एक बार सुनाया था उन्‍होंने, रिलायंस इंडस्ट्रीज के फाउंडर धीरूभाई अंबानी से पहली मुलाकात का.

जब हिंदी-गुजराती में धीरूभाई का भाषण सुना 

सपनों का पीछा और आजाद मैदान का वो मंजर अनिल अग्रवाल बताते हैं कि जब वे महज 14-15 साल के थे, तब अखबारों में जेआरडी टाटा और जीडी बिड़ला जैसे बड़े नामों को पढ़कर सोचा करते थे कि एक दिन वे भी ऐसे ही बड़े आदमी बनेंगे. 19-20 की उम्र में जब वो मुंबई पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि हर तरफ धीरूभाई अंबानी का नाम छाया हुआ है. उन्होंने आजाद मैदान में धीरूभाई की एक सभा देखी, जहां वे हजारों की भीड़ के सामने बिना अंग्रेजी के, हिंदी और गुजराती में दहाड़ रहे थे. अग्रवाल उस आत्मविश्वास को देखकर दंग रह गए और उन्होंने ठान लिया कि इस शख्स से मिलना ही है.

हेल्थ क्लब में 'बिहारी' की एंट्री 

धीरूभाई से मिलना आसान नहीं था. अनिल अग्रवाल को पता चला कि वे ओबेरॉय होटल के हेल्थ क्लब में आते हैं. अपनी 'बिहारी खुराफात' और जुगाड़ का इस्तेमाल कर, किसी तरह मैनेजर और अटेंडेंट को मनाकर उन्होंने क्लब में एंट्री पाई. वहां उन्होंने देखा कि देश के सबसे बड़े उद्योगपति एक कमरे में बैठकर राजनीति और बिजनेस पर चर्चा कर रहे हैं.

अनिल अग्रवाल चुपचाप एक कोने में बैठ गए. जब चर्चा के बीच थोड़ा सन्नाटा हुआ, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित बेबाकी के साथ पूछा- 'एक बिहारी जोक सुनाएं आप लोगों को?'. कमरे में बैठे दिग्गज चौंक गए, लेकिन उन्होंने मुस्कुराकर कहा- 'हां-हां सुनाओ'. अग्रवाल ने जोक सुनाया तो सब ठहाके मारकर हंस पड़े. जाते समय दिग्गजों ने उनसे कहा- 'अरे कल फिर आना'.

सीख जो जिंदगी बदल गई 

यही वह पल था जिसने एक साधारण लड़के का रास्ता बड़े व्यापारिक घरानों के बीच खोल दिया. अनिल अग्रवाल कहते हैं कि सफलता के लिए सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि आपके मन की आग और कुछ कर गुजरने की हिम्मत जरूरी है. दूसरों को हिम्‍मत देने वाले अनिल अग्रवाल आज टूट गए हैं. बेटे के निधन से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. उन्‍होंने बुधवार 7 जनवरी 2026 को इपने जीवन का सबसे काला दिन बताया. 

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