आजकल सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए सिर्फ डांस, कॉमेडी या ड्रामा ही काफी नहीं है, अब सीधे जेब पर चोट करने वाला कंटेंट भी ट्रेंड करने लगा है. रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीजें, जिन पर हम बिना सोचे भरोसा कर लेते हैं, अब उन्हीं पर सवाल उठ रहे हैं. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से घूम रहा है, जिसमें 250 रुपये के ब्रांडेड कॉफी जार और 2 रूपये के छोटे कॉफी पैकेट को आमने-सामने रखकर एक सिंपल सा एक्सपेरिमेंट किया गया. देखने में मामूली लगने वाला ये वीडियो जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे लोगों की सोच को झकझोर देता है. यही वजह है कि ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है.
जब कॉफी जार का ढक्कन खुला
इस वायरल वीडियो में सबसे पहले एक चमकदार ब्रांडेड कॉफी जार दिखाया जाता है, जिसे देखकर आमतौर पर लोग क्वालिटी का अंदाजा लगा लेते हैं. इसके बाद जार को पूरी तरह खाली किया जाता है. अब असली खेल शुरू होता है. एक-एक करके 2 रु वाले कॉफी पैकेट जार में डाले जाते हैं. गिनती बढ़ती जाती है और कुछ ही देर में जार पूरा भर जाता है. जब आखिरी पैकेट डाला जाता है, तो सामने आता है चौंकाने वाला आंकड़ा, कुल 80 पैकेट. यानी सिर्फ 160 रु में उतनी ही कॉफी, जितनी बाजार में 250 रु में मिलने वाले जार में मिलती है.
90 रु. का फर्क, लेकिन क्यों
अब यहां सवाल उठता है कि अगर कॉफी की मात्रा लगभग बराबर है, तो फिर बाकी के 90 रु. गए कहां? यही वो सवाल है, जिसने इस वीडियो को वायरल बना दिया. दरअसल ये एक्स्ट्रा पैसे सिर्फ कॉफी के नहीं होते. इनमें शामिल होती है ब्रांड की पहचान, आकर्षक पैकेजिंग, कांच की बोतल, बड़े-बड़े विज्ञापन, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज का खर्च, साथ ही कंपनी का मुनाफा. यानि जब हम महंगा जार खरीदते हैं, तो असल में हम सिर्फ कॉफी नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़ी पूरी ब्रांड स्टोरी भी खरीद रहे होते हैं.
छोटे पैकेट, बड़ा हिसाब
2 रु. वाले कॉफी पैकेट में न तो कोई स्टाइलिश बोतल होती है और न ही महंगे ऐड्स का बोझ. पैकेजिंग सिंपल होती है और सीधा फोकस कॉफी पर रहता है. इसी वजह से मात्रा के हिसाब से ये पैकेट ज्यादा किफायती साबित होते हैं. वीडियो देखने के बाद कई यूजर्स ने कमेंट किया कि रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए छोटे पैकेट ज्यादा समझदारी वाला ऑप्शन लगते हैं.
ये वीडियो हमें क्या सीख देता है?
इस वायरल वीडियो में कॉफी के जार और पैकेट की तुलना से एक बड़ी सीख मिलती है कि हमेशा कीमत देखकर क्वालिटी का अंदाजा ना लगाएं. ब्रांडेड चीजों में कई बार हम ज्यादा पैसे सिर्फ नाम और पैकेजिंग के लिए देते हैं. अगर बजट टाइट है तो छोटे पैकेट ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं की हर महंगा प्रोडक्ट गलत है. कई बार ब्रांड क्वालिटी, टेस्ट और भरोसे के मामले में वो बेहतर भी होते हैं, इसलिए एक समझदार ग्राहक वही होता है जो पैसे और वैल्यू दोनों का सही बैलेंस करें.
Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.
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