
घाटों की नगरी काशी के गंगा तट पर आस्था की भी गंगा बहती है, जिसमे देश-विदेश के भक्त न सिर्फ डुबकी लगाने आते हैं, बल्कि अपनी आस्था को सहेज कर भी रखते हैं। भक्तों की इस आस्था को सहेज कर रखने का काम राम रमापति बैंक करता है। देश के इकलौते आस्था के इस बैंक में अब तक दुनिया भर के भक्तों के लिखे 25 अरब राम नाम जमा है और इसके खाताधारकों की संख्या लाखों में है।
वाराणसी के विश्वनाथ गली के एक मकान में स्थित इस बैंक में लोगों के अध्यात्मिक कर्म को सहेज कर रखा जाता है। राम नवमी के दिन इस बैंक का विशेष होता है, क्योंकि इस दिन सैकड़ों भक्त यहां साल भर की लिखी राम नाम की पूंजी जमा करने आते हैं।
इनमें से ही एक मीरा भी अपने हांथों में लाल कपड़ों में लिपटी अपनी उसी पूंजी को यहां जमा कराने आई हैं, जिसे उन्होंने यहां खाता खुलवाने के बाद क़र्ज़ के रूप में लिया था। मीरा कहती हैं कि मैंने इसी बैंक में अपना खाता खुलवाया था और यहां से राम नाम लिखने का क़र्ज़ लिया था आज वह पूरा हो गया है तो उसी को यहां जामा करने आई हूं।
मीरा की तरह ही इस राम रमापति बैंक में लाखों खाताधारक हैं, जिन्होंने अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए यहां खाता खुलवा रखे हैं और राम नाम लिखने का क़र्ज़ लेते हैं। तकरीबन 85 साल से चल रहे इस बैंक में देश ही नहीं, बल्कि विदेश के लाखों भक्तों ने अब तक लगभग 25 अरब से ज्यादा राम नाम जमा करा चुके हैं, जिसे यह बैंक सहेज कर रखे हुए है। इस बैंक के खाताधारकों का मानना है कि इससे इनका यह जन्म तो सुधरता ही है, साथ ही राम नाम की इस पूंजी के ब्याज से इनका परलोक भी सुधरता है।
लगभग 85 साल पहले शुरू हुए इस बैंक में हर किसी के लिखे राम नाम को नहीं रखा जाता, बल्कि इसके लिए बाकायदा खाता खुलवाया जाता है। इसके लिए राम रामा पति बैंक का फ़ार्म भरना होता है। इस फ़ार्म में उनके नाम पते के साथ उनके मनोरथ को भी लिखा जाता है, जिसे पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।
यहां खाता खुलवाना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए अचार विचार और इनके अपने नियम की परिधि है। जिसे पूरा करने का वचन देने वाले को ही यहां से राम नाम लिखने का कागज़ मिलता है और उसी पर इन्हें लिखना होता है।
राम रमापति बैंक के कर्मचारी विकास बताते हैं, 'राम नाम का क़र्ज़ लेने वालों के लिए कुछ नियम हैं, जिसमें मदिरा, मांस, मछली,प्याज, लहसुन इत्यादि चीजों को नहीं खाना है।'
इस बैंक से जुड़े लोगों के अंदर आस्था ही नहीं, बल्कि विश्वाश भी है कि जिस राम नाम की पूंजी को वो यहां जमा करते हैं, उससे इनका यह लोक तो सुधरेगा ही साथ उसके ब्याज से इनका परलोक भी बेहतर होगा।
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