वर्षों से चूहों और चमगादड़ों जैसे जानवरों को मनुष्यों में बीमारियां. फैलाने के लिए दोषी ठहराया जाता रहा है हालांकि, एक स्टडी से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है. वास्तव में इंसान इन जानवरों से बड़ा ख़तरा है, जो इन जानवरों आने वाले वायरस से लगभग दोगुना वायरस अन्य जानवरों तक पहुंचाता है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने वायरल जीनोम का विश्लेषण किया और पाया कि ज्यादातर मामलों (64%) में, वायरस मनुष्यों से दूसरे जानवरों (एंथ्रोपोनोसिस) में पहुंच गए. विशाल आबादी और वैश्विक पहुंच को देखते हुए यह बात समझ में आती है.
इस तरह बढ़ता मनुष्यों के लिए खतरा
हमारी गतिविधियां भी प्रसार में योगदान करती हैं. पर्यावास का विनाश और प्रदूषण जानवरों पर दबाव डालता है, जिससे वे हमारे द्वारा लाए जाने वाले विषाणुओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. इससे दोहरा खतरा पैदा होता है: वायरस इन नए मेजबानों में विकसित हो सकते हैं और संभावित रूप से मनुष्यों में वापस आ सकते हैं या लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए खतरा बने रह सकते हैं.
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भविष्य के लिए बेहतर
सह-लेखक प्रोफेसर फ्रेंकोइस बलौक्स (यूसीएल जेनेटिक्स इंस्टीट्यूट) ने कहा: "हमें मनुष्यों को ज़ूनोटिक बग के लिए एक सिंक के बजाय, मेजबानों के विशाल नेटवर्क में रोगजनकों का आदान-प्रदान करने वाले एक नोड के रूप में मानना चाहिए. किसी भी दिशा में जानवरों और मनुष्यों के बीच वायरस के संचरण का सर्वेक्षण और निगरानी करके, हम वायरल विकास को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और उम्मीद है कि हम भविष्य में नई बीमारियों के प्रकोप और महामारी के लिए अधिक तैयार रहेंगे, साथ ही संरक्षण प्रयासों में भी सहायता करेंगे."
अच्छी बात ये है कि जिन वायरस की प्रजातियों में फैलने की अधिक संभावना होती है वे तेजी से म्यूटेट करते हैं. इन म्यूटेशन की निगरानी करके, वैज्ञानिक उच्च जूनोटिक क्षमता यानी मनुष्यों को संक्रमित करने की क्षमता वाले वायरस की पहचान कर सकते हैं.
प्रमुख लेखक और पीएचडी छात्र सेड्रिक टैन (यूसीएल जेनेटिक्स इंस्टीट्यूट और फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट) ने कहा, जब जानवर मनुष्यों से वायरस पाते हैं, तो यह न केवल जानवरों को नुकसान पहुंचा सकता है और संभावित रूप से प्रजातियों के लिए संरक्षण खतरा पैदा कर सकता है, बल्कि यह नई समस्याएं भी पैदा कर सकता है. अगर किसी महामारी को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पशुधन को मारने की जरूरत होती है, तो खाद्य आपूर्ति भी प्रभावित होती है, जैसा कि हाल के वर्षों में H5N1 बर्ड फ्लू स्ट्रेन के साथ हो रहा है.'
साथ ही उन्होंने कहा, "इसके अतिरिक्त, अगर मनुष्यों द्वारा लाया गया कोई वायरस किसी नई पशु प्रजाति को संक्रमित करता है, तो मनुष्यों के बीच ख़त्म होने के बाद भी वायरस पनपना जारी रख सकता है या मनुष्यों को फिर से संक्रमित करने से पहले नए अनुकूलन भी विकसित कर सकता है. यह समझने से कि कैसे और क्यों वायरस जीवन के विभिन्न मेजबानों में फैलने के लिए विकसित होते हैं, हमें यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मनुष्यों और जानवरों में नई वायरल बीमारियां कैसे उभरती हैं."
नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित यह शोध मानव-से-पशु वायरल संचरण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है. मानव और पशु दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इन गतिशीलता को समझना महत्वपूर्ण है.
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