नई दिल्ली:
कई बॉलीवुड फिल्मों में अपने विशिष्ट नृत्य और रोमांटिक अदाओं से अभिनेत्रियों का दिल जीतने वाले दिग्गज कलाकार शम्मी कपूर अपने पीछे ऐसी शैली छोड़ गए हैं जिसे उनके प्रशंसक हमेशा याद रखेंगे। पृथ्वीराज कपूर के बेटे और शोमैन राज कपूर के भाई होने के नाते शम्मी के सामने अपनी अलग पहचान बनाने की चुनौती थी क्योंकि अदाकारी में कदम रखते ही उन पर उम्मीदों का बोझ पड़ गया था। शम्मी जानते थे कि उनके भाई पहले से ही सुपरस्टार और चर्चित फिल्म निर्माता हैं, इसलिए उनकी अपने भाई के साथ तुलना जरूर की जाएगी। उन्हें पता था कि अगर वह खुद को साबित करना चाहते हैं तो उन्हें अपने भाई से कुछ अलग करके दिखाना होगा। वर्ष 1953 में बालीवुड में पदार्पण करने वाले शम्मी की पहली फिल्म में हालांकि उन्हें अपने भाई राजकपूर की छाया मात्र ही दिखाया गया। रेल का डिब्बा, चोर बाजार, शमा परवाना, हम सब चोर हैं, मेमसाहब और मिस कोका कोला जैसी फिल्मों में शम्मी को बिल्कुल नए अवतार में दिखाया गया, खासकर उनकी बालों, मूंछों और पर्दे पर अदाओं की शैली एकदम अलग थी। शम्मी ने 1957 में नासिर हुसैन की फिल्म तुमसा नहीं देखा के जरिये पहली बार सफलता का स्वाद चखा। यह अभिनेता तत्कालीन दिग्गज हालीवुड कलाकारों एल्विस प्रेस्ले और जेम्स डीन की तरह नई वेशभूषा में दिखाई दिये। इसके बाद शम्मी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफलता का सीढ़ियां चढते चले गये। शम्मी अपने दोस्तों से अक्सर इस बात पर चर्चा किया करते थे कि वह फिल्म में अपने सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए क्या क्या नई कोशिशें कर सकते हैं। तुमसा नहीं देखा की अपार सफलता के बाद नासिर और शम्मी की जोड़ी ने कई अन्य सफल फिल्मों में काम किया। शम्मी ने लोकप्रिय होने से पहले ही प्रसिद्ध अभिनेत्री गीता बाली से शादी रचा ली थी और शादी का उनकी लोकप्रियता पर बिल्कुल असर नहीं पड़ा। दुर्भाग्य से गीता का बीमारी की वजह से जल्द ही निधन हो गया। वर्ष 1959 में नासिर-शम्मी की हिट जोड़ी ने दिल देके देखो के रूप में एक और सुपरहिट फिल्म दी और इस फिल्म के जरिये आशा पारेख ने भी लोकप्रियता हासिल की। वर्ष 1961 में शम्मी की एक ऐसी फिल्म आई जिसने लोकप्रियता के सभी पैमाने तोड़ दिये। सुबोध मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म जंगली में शम्मी के अभिनय की बहुत सराहना हुई।
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