Earth-facing coronal hole: बीती 17 फरवरी 2026 से अंतरिक्ष की दुनिया में हलचल जारी है. 16 फरवरी को सूर्य की सतह पर 8 लाख किलोमीटर से ज्यादा चौड़ा coronal hole देखा गया. यह विशाल खुला चुंबकीय गलियारा सीधे पृथ्वी की ओर मुंह किए है. NASA Solar Dynamics Observatory ने इसकी तस्वीरें जारी कीं, जिनमें यह दक्षिण से उत्तर तक फैला दिखा.
क्या है कोरोनल होल (What Is a Coronal Hole)
coronal hole कोई आग का गोला नहीं, बल्कि सूर्य का वह इलाका है, जहां से solar wind बेहद तेजी से बाहर निकलती है. इस बार सौर हवा की गति 700 किलोमीटर प्रति सेकंड तक पहुंच गई. जब यह तेज प्लाज्मा पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराता है, तो geomagnetic storm बनता है.

Photo Credit: Nasa
G2 तूफान और रंगीन आसमान (G2 geomagnetic storm)
NOAA ने 16 फरवरी की शाम G2 geomagnetic storm घोषित किया. L1 प्वाइंट पर रफ्तार 650 km per second से ऊपर दर्ज हुई, जहां Aditya L1 satellite तैनात है. नतीजा, स्कॉटलैंड समेत कई इलाकों में चार रातों से हरे, लाल और बैंगनी aurora lights चमक रही हैं. फोटोग्राफरों ने इसे असाधारण बताया.
आगे क्या होगा (solar storm February 2026)
विशेषज्ञों के अनुसार 18 फरवरी के आसपास C1 flare से जुड़ा coronal mass ejection यानी CME पृथ्वी तक पहुंच सकता है. इससे G1 G2 स्तर का एक और solar storm आ सकता है. हालांकि यह मध्यम स्तर का है, इसलिए बिजली ग्रिड और सैटेलाइट पर हल्का असर संभव है, लेकिन बड़े खतरे की आशंका नहीं.

फिलहाल solar cycle 25 अपने पीक पर है, जो 2025-26 में सबसे ज्यादा सक्रिय माना जा रहा है. यह घटना वैज्ञानिकों के लिए रोमांचक और आम लोगों के लिए आसमान का खूबसूरत लाइट शो है, लेकिन अंतरिक्ष के इन इशारों को समझना जरूरी है, क्योंकि सूरज जब करवट लेता है, तो पूरी धरती उसकी गूंज महसूस करती है.
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