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TCS के बाद लेंसकार्ट का नंबर! ड्रेस कोड पॉलिसी पर मचा बवाल, पीयूष बंसल को मांगनी पड़ी माफी

पहले TCS नासिक में धर्म परिवर्तन के आरोपों ने खलबली मचाई और अब चश्मा बनाने वाली दिग्गज कंपनी 'लेंसकार्ट' के ड्रेस कोड ने सोशल मीडिया का पारा गर्म कर दिया है. एक लीक हुए दस्तावेज ने ऐसा रायता फैलाया कि लोग पूछने लगे, 'भाई, तिलक से क्या दिक्कत है?' चलिए जानते हैं क्या है इस वायरल 'ग्रूमिंग गाइड' का पूरा सच.

TCS के बाद लेंसकार्ट का नंबर! ड्रेस कोड पॉलिसी पर मचा बवाल, पीयूष बंसल को मांगनी पड़ी माफी
ऑफिस है या स्कूल? लेंसकार्ट के 'ड्रेस कोड' ने छुड़ाए कर्मचारियों के पसीने, सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
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Lenskart dress code policy: बाजार में चश्मा बेचकर लोगों की नजर साफ करने वाले लेंसकार्ट की अपनी 'पॉलिसी' पर अब लोगों की नजरें टेढ़ी हो गई हैं. दरअसल, इंटरनेट पर कंपनी का एक ड्रेस कोड वाला कागज क्या लीक हुआ, मानों भूचाल आ गया. इस कागज में लिखा था कि ऑफिस में हिजाब तो चलेगा, लेकिन माथे पर बिंदी, तिलक या कलाई पर कलावा बांधकर आने की सख्त मनाही है. अब भाई, जैसे ही यह खबर उड़ी, सोशल मीडिया की जनता ने पीयूष बंसल को टैग करना शुरू कर दिया कि 'ये भेदभाव वाला चश्मा कब से पहन लिया?'

कलावा उतरावाया और हिजाब को बताया ओके? (Controversial Leaked Document Details)

वायरल हो रहे इस तथाकथित 'फरमान' में साफ लिखा था कि अगर हिजाब पहनना है तो उसका रंग काला होना चाहिए, पर माथे पर सजी बिंदी या क्लचर को नो-एंट्री दी गई थी. कलावा यानी धार्मिक धागा बांधकर आने वालों को भी उसे उतारने की हिदायत दी गई थी. जैसे ही ये बातें बाहर आईं, लोगों ने इसे मजहबी चश्मे से देखना शुरू कर दिया और कंपनी की जमकर खिंचाई होने लगी.

पीयूष बंसल ने पेश की सफाई, बताया 'पुराना राग' (CEO Peyush Bansal Clarifies Stand)

जब विवाद ने तूल पकड़ा, तो खुद लेंसकार्ट के कर्ता-धर्ता पीयूष बंसल को मैदान में उतरना पड़ा. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि जो कागज आप देख रहे हैं, वह पुराना है और अब की नीति से उसका कोई लेना-देना नहीं है. बंसल 'साहब' का कहना है कि उनकी कंपनी में तिलक, बिंदी और हर तरह की धार्मिक पहचान का पूरा सम्मान है. उन्होंने यह भी माना कि पुराने नियमों से जो गलतफहमी पैदा हुई है, उसके लिए उन्हें खेद है.

अतिथि और संस्कृति का संगम है लेंसकार्ट? (Company Claims Inclusion and Diversity)

कंपनी का कहना है कि उनके हजारों कर्मचारी रोजाना गर्व से अपनी संस्कृति और धर्म को फॉलो करते हुए स्टोर्स पर काम करते हैं. वे ही असली लेंसकार्ट हैं. बहरहाल, टीसीएस नासिक के विवाद के बीच लेंसकार्ट का यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है. अब देखना यह है कि इस सफाई के बाद सोशल मीडिया की फौज शांत होती है या नहीं. कॉर्पोरेट की दुनिया में ड्रेस कोड अक्सर विवाद की वजह बनते हैं, लेकिन जब बात धर्म से जुड़ जाए तो मामला पेचीदा हो जाता है. लेंसकार्ट ने फिलहाल अपनी स्थिति साफ कर दी है, पर यह सबक है कि डिजिटल दौर में 'आउटडेटेड' डॉक्यूमेंट भी भारी पड़ सकते हैं.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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