Lenskart dress code policy: बाजार में चश्मा बेचकर लोगों की नजर साफ करने वाले लेंसकार्ट की अपनी 'पॉलिसी' पर अब लोगों की नजरें टेढ़ी हो गई हैं. दरअसल, इंटरनेट पर कंपनी का एक ड्रेस कोड वाला कागज क्या लीक हुआ, मानों भूचाल आ गया. इस कागज में लिखा था कि ऑफिस में हिजाब तो चलेगा, लेकिन माथे पर बिंदी, तिलक या कलाई पर कलावा बांधकर आने की सख्त मनाही है. अब भाई, जैसे ही यह खबर उड़ी, सोशल मीडिया की जनता ने पीयूष बंसल को टैग करना शुरू कर दिया कि 'ये भेदभाव वाला चश्मा कब से पहन लिया?'
कलावा उतरावाया और हिजाब को बताया ओके? (Controversial Leaked Document Details)
वायरल हो रहे इस तथाकथित 'फरमान' में साफ लिखा था कि अगर हिजाब पहनना है तो उसका रंग काला होना चाहिए, पर माथे पर सजी बिंदी या क्लचर को नो-एंट्री दी गई थी. कलावा यानी धार्मिक धागा बांधकर आने वालों को भी उसे उतारने की हिदायत दी गई थी. जैसे ही ये बातें बाहर आईं, लोगों ने इसे मजहबी चश्मे से देखना शुरू कर दिया और कंपनी की जमकर खिंचाई होने लगी.
Hi @peyushbansal can you please clarify why hijab is okay but bindi/kalawa is not at @Lenskart_com https://t.co/X35F6hoSHa
— Shefali Vaidya. 🇮🇳 (@ShefVaidya) April 15, 2026
पीयूष बंसल ने पेश की सफाई, बताया 'पुराना राग' (CEO Peyush Bansal Clarifies Stand)
जब विवाद ने तूल पकड़ा, तो खुद लेंसकार्ट के कर्ता-धर्ता पीयूष बंसल को मैदान में उतरना पड़ा. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि जो कागज आप देख रहे हैं, वह पुराना है और अब की नीति से उसका कोई लेना-देना नहीं है. बंसल 'साहब' का कहना है कि उनकी कंपनी में तिलक, बिंदी और हर तरह की धार्मिक पहचान का पूरा सम्मान है. उन्होंने यह भी माना कि पुराने नियमों से जो गलतफहमी पैदा हुई है, उसके लिए उन्हें खेद है.
Hi, all. I've been seeing an inaccurate policy document going viral about Lenskart.
— Peyush Bansal (@peyushbansal) April 15, 2026
I want to speak directly that this document does not reflect our present guidelines.
Our policy has no restrictions on any form of religious expression, including bindi and tilak, and we…
अतिथि और संस्कृति का संगम है लेंसकार्ट? (Company Claims Inclusion and Diversity)
कंपनी का कहना है कि उनके हजारों कर्मचारी रोजाना गर्व से अपनी संस्कृति और धर्म को फॉलो करते हुए स्टोर्स पर काम करते हैं. वे ही असली लेंसकार्ट हैं. बहरहाल, टीसीएस नासिक के विवाद के बीच लेंसकार्ट का यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है. अब देखना यह है कि इस सफाई के बाद सोशल मीडिया की फौज शांत होती है या नहीं. कॉर्पोरेट की दुनिया में ड्रेस कोड अक्सर विवाद की वजह बनते हैं, लेकिन जब बात धर्म से जुड़ जाए तो मामला पेचीदा हो जाता है. लेंसकार्ट ने फिलहाल अपनी स्थिति साफ कर दी है, पर यह सबक है कि डिजिटल दौर में 'आउटडेटेड' डॉक्यूमेंट भी भारी पड़ सकते हैं.
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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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