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शाम 5 बजते ही बंद हो जाता है लैपटॉप! नीदरलैंड्स से आए इस वीडियो ने भारतीय प्रोफेशनल्स की नींद उड़ा दी

नौकरी की किच-किच और खाली जेब के डर से दूर, सात समंदर पार एक हिंदुस्तानी ने सुकून का नया पता ढूंढ लिया है. नीदरलैंड्स की गलियों में घुली शांति और बैंक बैलेंस की चमक ने इस प्रोफेशनल की जिंदगी को एक ऐसी 'लग्जरी' बना दिया है, जिसका ख्वाब हर नौकरीपेशा देखता है.

शाम 5 बजते ही बंद हो जाता है लैपटॉप! नीदरलैंड्स से आए इस वीडियो ने भारतीय प्रोफेशनल्स की नींद उड़ा दी
परदेस में 'राज' कर रहा है ये देसी छोरा, नीदरलैंड्स की सैलरी और सुकून देख लोग बोले- 'हमें भी ले चलो'

Indian Professional Abroad Story: क्या आप भी सुबह ऑफिस जाने के नाम से कतराते हैं? नीदरलैंड्स में रह रहे अनुज शर्मा का वायरल वीडियो आपकी आंखें खोल देगा. किराया, राशन और घूमना-फिरना करने के बाद भी जेब में मोटी रकम बच रही है और शाम को बॉस का फोन आने का डर भी नहीं. आखिर क्या है वहां की लाइफ का वो 'सीक्रेट' जो इंडिया में मिसिंग है? आइए जानते हैं.

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सुकून का दूसरा नाम: डच लाइफस्टाइल (indian in netherlands experience)

अनुज शर्मा ने जब इंस्टाग्राम पर अपनी आपबीती सुनाई, तो इंटरनेट पर जैसे हलचल मच गई. उन्होंने बताया कि भारत से नीदरलैंड्स जाने के बाद उनकी 'जिंदगी' देखने का नजरिया ही बदल गया. सबसे बड़ी राहत मिली वर्क-लाइफ बैलेंस से. वहां लोग घड़ी देखकर काम खत्म करते हैं और शाम का वक्त सिर्फ खुद के लिए और अपनों के लिए होता है. इसे कहते हैं असली 'सुकून-ए-कल्ब' (दिल का चैन), जहां काम के बोझ तले आपकी अपनी ख्वाहिशें दम नहीं तोड़तीं.

काम और निजी जिंदगी का बेहतरीन तालमेल (Perfect Work-Life Balance in Netherlands)

अक्सर कहा जाता है कि विदेश में खर्चे बहुत हैं, लेकिन अनुज का तजुर्बा कुछ और ही कहता है. उन्होंने खुलासा किया कि भारी खर्चों के बावजूद हर महीने एक शानदार सेविंग्स हो जाती है. यह बचत न सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ाती है, बल्कि आने वाले कल के लिए एक गजब का 'कॉन्फिडेंस' भी देती है. साथ ही, वहां का करियर पाथ इतना साफ-सुथरा है कि आपको अपनी तरक्की के लिए किसी की चापलूसी करने की जरूरत नहीं पड़ती.

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मोटी बचत और करियर की साफ राह (High Savings and Clear Career Growth)

एक परदेसी होने के बावजूद अनुज को वहां के दफ्तरों में वो इज्जत मिली, जिसकी तलाश हर कर्मचारी को होती है. उनके आईडियाज को तवज्जो दी गई और काम को सराहा गया. जिंदगी अब एक 'लग्जरी' लगने लगी है, क्योंकि भागदौड़ कम और ठहराव ज्यादा है. सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को देखकर कह रहे हैं कि काश! भारत में भी ऐसा वर्क कल्चर आ जाए.

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विदेशी धरती पर सम्मान और सुकून (Respect and Peace of Mind Abroad)

अनुज की यह कहानी हमें सिखाती है कि पैसा कमाना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि उस पैसे के साथ जीने का 'सलीका' और 'वक्त' होना भी जरूरी है. नीदरलैंड्स की व्यवस्थित जिंदगी शायद इसीलिए आज हर प्रोफेशनल का ख्वाब बन रही है.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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