Degree Should Not Dictate Career: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट चर्चा में है, जिसमें IIT से ग्रेजुएट एक शख्स ने अपनी कॉलेज लाइफ और करियर के सफर को बयां किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि, कॉलेज के दिनों में उन्हें इंजीनियरिंग (जो अब न्यूयॉर्क में काम करते हैं) में बहुत कम दिलचस्पी थी, लेकिन बाद में उन्होंने बिल्कुल अलग क्षेत्र में अपना करियर बनाया. उन्होंने खुद को 'लास्ट बेंचर' और 'समय बर्बाद करने वाला' बताया.
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आईआईटी का सफर (engineering college life viral post)
हाल ही में आईआईटी बीएचयू (BHU) के पूर्व छात्र आकाश संपूर्णानंद पांडे (Akash Sampurnanand Pandey) ने अपनी कॉलेज लाइफ को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग में उनका कोई मन नहीं था और चार साल की डिग्री किसी सजा जैसी थी. वे क्लास में सिर्फ इसलिए जाते थे क्योंकि इंस्टीट्यूट में 75% अटेंडेंस जरूरी थी. उनका यह बयान अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है.
Back in 2012 during my IIT days, I was a Last Bencher. A waster. There's a word for it. Lukkha
— Akash Sampurnanand Pandey (@late_bloomer_7) July 17, 2026
I would go to classes only because @IITBHU_Varanasi had mandatory 75% attendance rule. My degree was like prison time of 4 years for my brain, academically. That was the price I paid… pic.twitter.com/gHRgYBAWe3
उन्होंने यह भी बताया कि जब प्रोफेसर क्लास में मेटलर्जी (metallurgy) पढ़ाते थे, तो वो चुपचाप इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान की किताबें पढ़ते थे. उन्होंने बताया कि वह हर सेमेस्टर में सात से दस किताबें पढ़ते थे, जिनमें से ज्यादातर उनके रूममेट की होती थीं, जो UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहा था. आकाश ने बताते हैं कि उन्होंने मेटलर्जी की टेक्स्टबुक को परीक्षा से सिर्फ 24 घंटे पहले ही छूते थे, ताकि किसी तरह पासिंग मार्क्स आ सकें.
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चार साल की डिग्री पर दिया बड़ा बयान (Four Year Degree Should Not Dictate Career)
आकाश ने बताया कि, उन्होंने किसी तरह 7.5 GPA हासिल किया, ताकि कैंपस प्लेसमेंट में बैठ सकें और नौकरी पा सकें. वहीं ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने कंसल्टिंग की नौकरी पकड़ी और जितनी जल्दी हो सके अपने कोर इंजीनियरिंग से दूर चले गए. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ये कहा कि, चार साल की डिग्री को अपने 40 साल के करियर पर हावी नहीं होने देना चाहिए.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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