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बिलबोर्ड नहीं, ट्रैफिक जाम बना ब्रांडिंग का नया ठिकाना! IIT बॉम्बे के दो युवाओं की अनोखी मार्केटिंग ने मचा दिया शोर

बड़ी कंपनियां अक्सर लोकेशन सहित कई फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए मार्केटिंग पर करोड़ों रुपए खर्च करती हैं, लेकिन IIT बॉम्बे के दो युवाओं ने अपनी अनोखी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी से इस सोच को चुनौती दी है.

बिलबोर्ड नहीं, ट्रैफिक जाम बना ब्रांडिंग का नया ठिकाना! IIT बॉम्बे के दो युवाओं की अनोखी मार्केटिंग ने मचा दिया शोर
आईआईटी बॉम्बे के छात्रों की अनोखी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी

मार्केटिंग की दुनिया में अलग दिखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. जहां ज्यादातर कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े होर्डिंग और डिजिटल एडवर्टाइजमेंट का सहारा लेती हैं, वहीं मुंबई में एक फैशन स्टार्टअप ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना. IIT बॉम्बे के दो फाउंडर्स ने शहर के सबसे बड़े ट्रैफिक जाम को ही अपना विज्ञापन मंच बना दिया. उनका यह अनोखा एक्सपेरिमेंट अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

चलती-फिरती कांच की अलमारी 

स्टार्टअप ने एक ट्रक पर कांच की अलमारी (Glass Closet) तैयार कर उसे मुंबई की व्यस्त सड़कों पर चलाया. इस अलमारी में फैशनेबल कपड़ों को इस तरह सजाया गया कि राह चलते और ट्रैफिक में फंसे लोग उसकी ओर देखने लगे. जैसे-जैसे यह अनोखी गाड़ी ट्रैफिक के बीच आगे बढ़ती गई, लोगों ने इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया. देखते ही देखते यह वायरल हो गया और एडवर्टाइजमेंट पर भारी खर्च किए बिना ब्रांड लाखों लोगों तक पहुंच गया.

ट्रैफिक में छिपा था सबसे बड़ा मौका

इस अनोखे तरीके की सबसे खास बात यह थी कि ब्रांड ने उन लोगों तक पहुंचने का तरीका चुना, जो रोजाना घंटों ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. जहां आमतौर पर ट्रैफिक को समय की बर्बादी माना जाता है, वहीं स्टार्टअप ने इसे ग्राहकों का ध्यान खींचने का सबसे प्रभावी माध्यम बना दिया. इस बात में तो कोई शक नहीं है कि किसी भी अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह सही समय और सही जगह पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर सके. इस स्ट्रैटेजी ने यही काम किया.

60 मिनट में फैशन डिलीवरी 

यह अभियान एक ऐसे फैशन स्टार्टअप के लिए तैयार किया गया था, जो ग्राहकों को केवल 60 मिनट में क्यूरेटेड आउटफिट्स की डिलीवरी का दावा करता है. चलती-फिरती ग्लास क्लोसेट ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि ब्रांड के तेज और मॉडर्न सर्विस मॉडल को भी बेहतर तरीके से पेश किया. ट्रैफिक में दिखाई देने वाली इस अनोखी गाड़ी के वीडियो और तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. लोगों ने इसे क्रिएटिव मार्केटिंग का शानदार उदाहरण बताया. बिना बड़े एडवर्टाइजमेंट बजट के इस अभियान ने ऑर्गेनिक चर्चा पैदा की, जिससे ब्रांड की पहचान तेजी से बढ़ी.

मार्केटिंग का नया सबक

यह अभियान बताता है कि सफल मार्केटिंग केवल बड़े बजट पर निर्भर नहीं करती, बल्कि क्रिएटिव सोच और सही स्ट्रैटेजी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. जब कोई ब्रांड वहां पहुंचता है, जहां लोग पहले से मौजूद हों, तो प्रचार खुद-ब-खुद शुरू हो जाता है. यही वजह है कि मुंबई के ट्रैफिक से निकली यह अनोखी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी फिलहाल स्टार्टअप जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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