Science News: क्या हमारी धरती पर मौजूद पानी और यहां पनपा जीवन हमेशा से यहीं था? या फिर यह अंतरिक्ष के किसी सुदूर कोने से यहां पहुंचा था? इस सदियों पुराने सवाल का जीता-जागता सबूत अब वैज्ञानिकों के हाथ लग गया है. सेटी (SETI) इंस्टीट्यूट की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के न्यू जर्सी में एक घर की छत फाड़कर गिरे एक उल्कापिंड (Meteorite) ने ब्रह्मांड का वह सीक्रेट खोल दिया है, जिसे जानने के लिए नासा (NASA) जैसी बड़ी स्पेस एजेंसियां अरबों रुपये खर्च कर रही हैं. आइए जानते हैं आसमान से आफत बनकर गिरे इस पत्थर के अंदर छिपे उस खजाने की कहानी, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है.
कब की घटना, कहां गिरा ये उल्कापिंड?
यह दिलचस्प कहानी शुरू होती है 16 जुलाई 2024 को. आसमान में एक भारी एयरलाइन बैग के आकार की एक विशाल अंतरिक्ष की चट्टान (Asteroid) लगभग 32,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुई. जब यह न्यू यॉर्क की मशहूर स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के ऊपर से गुजरी, तो इतनी तेज सोनिक बूम हुई कि पूरा न्यू यॉर्क शहर हिल गया था. आसमान में टूटते इस मलबे को 5 राज्यों के करीब 60 लोगों ने अपनी आंखों से देखा. इस घटना के तुरंत बाद, इस उल्कापिंड का तकरीबन 1 किलो भारी एक टुकड़ा न्यू जर्सी के हिल्सबोरो (Hillsborough) इलाके में रहने वाले एक शख्स के घर की छत को चीरते हुए सीधे उसके मास्टर बेडरूम में जा गिरा. वैज्ञानिकों ने इस उल्कापिंड का नाम हिल्सबोरो (Hillsborough) रखा है.

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उस वक्त मकान मालिक ने दिखाई समझदारी
घर के मालिक ने उस खौफनाक पल को याद करते हुए बताया, 'मैं घर पर ही था, तभी अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और मेरे बेडरूम की छत पर बड़ा सा छेद हो गया. पूरे कमरे में सल्फर जैसी तेज बदबू फैल गई और मेरे बेड, कालीन और हर तरफ काला पाउडर और पत्थर के टुकड़े बिखर गए.' मगर मकान मालिक ने बिना डरे गजब की समझदारी दिखाई. उसने बिना समय गंवाए डिस्पोजेबल ग्लव्स पहने, एल्युमिनियम फॉयल की मदद से उन टुकड़ों को समेटा और कांच के जार में सुरक्षित रख लिया. उनकी इसी एक फुर्ती के कारण यह पत्थर इंसानी पसीने या धरती के बैक्टीरिया से गंदा होने से बच गया और दुनिया का सबसे शुद्ध सैंपल बन गया.
इस पत्थर के अंदर वैज्ञानिकों को क्या मिला?
हाल ही में साइंस एडवांसेज जर्नल में इस पर एक नई स्टडी पब्लिश हुई है. जब वैज्ञानिकों ने इस पत्थर की फॉरेंसिक जांच की, तो उन्हें इसके अंदर प्राचीन खारा पानी (Ancient Brines) और भारी मात्रा में नमक से भरपूर हिस्से (Salt-rich CM1 fragments) मिले. इसके अलावा इसमें कार्बन से बने कंपाउंड्स, अमीनो एसिड (Amino Acids) और कई प्रीबायोटिक मॉलिक्यूल्स मौजूद हैं.
यह खोज इतनी खास क्यों है?
यह खोज सीधे तौर पर साबित करती है कि करोड़ों-अरबों साल पहले जब हमारी पृथ्वी बिल्कुल सूखी और बंजर थी, तब अंतरिक्ष से ऐसे ही अनगिनत पानी और नमक से भरपूर उल्कापिंडों की बारिश धरती पर हुई थी. इसी कारण हमारी धरती को उसका पहला पानी मिला और उसी खारे पानी के केमिकल रिएक्शन से धीरे-धीरे जीवन पनपा, जिससे आज हम और आप यहां मौजूद हैं.
यहां गौर करने वाली बात यह है कि ठीक ऐसा ही प्राचीन खारा पानी खोजने के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने बेंनू (Bennu) और जापानी स्पेस एजेंसी (JAXA) ने रयुगु (Ryugu) एस्टेरॉयड पर अपने अरबों रुपये के स्पेस मिशन भेजे थे. लेकिन कुदरत ने वही बेशकीमती खजाना मुफ्त में सीधे इस शख्स के बेडरूम में लाकर डिलीवर कर दिया. अब इस अनमोल उल्कापिंड के कुछ टुकड़ों को न्यू यॉर्क के मशहूर 'अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री' में दुनिया के सामने प्रदर्शन और आगे की रिसर्च के लिए सुरक्षित रख दिया गया है.
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