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न कोई काम का प्रेशर, न किसी को इंप्रेस करना... महिला ने बताया कैसा होता है न्यूजीलैंड का वर्क कल्चर, वीडियो इंटरनेट पर वायरल

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह न्यूजीलैंड के वर्क कल्चर की तारीफ करते हुए नजर आ रही है. उन्होंने बताया है कि उन्हें न किसी काम का प्रेशर रहता है और न किसी को इंप्रेस करने की होड़.

न कोई काम का प्रेशर, न किसी को इंप्रेस करना... महिला ने बताया कैसा होता है न्यूजीलैंड का वर्क कल्चर, वीडियो इंटरनेट पर वायरल
न्यूजीलैंड का वर्क कल्चर कैसा होता है?
इंस्टाग्राम/ @daninewzealand

New Zealand Work Culture: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग अपने कॉर्पोरेट लाइफ और टॉक्सिक वर्क कल्चर से परेशान रहते हैं. कई लोग इतना ज्यादा स्ट्रेस हो जाते हैं कि उनकी पर्सनल लाइफ भी बिगड़ना शुरू हो जाती है. इसी बीच सोशल मीडिया पर न्यूजीलैंड में रहने वाली एक कोलंबियाई महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो न्यूजीलैंड के वर्क कल्चर की तारीफ करते हुए नजर आ रही है. वहां पर काम करने का तरीका देखकर महिला का वर्क-लाइफ बैलेंस को देखने का नजरिया ही बदल गया. 

महिला ने बताया कैसा होता है कोलंबिया का वर्क कल्चर?

डैनी कास्टिलो नाम की महिला ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने न्यूजीलैंड और कोलंबिया की प्रोफेशनल लाइफ के बीच अंतर के बारे में बताया. महिला बताती है कि वह पिछले तीन साल से न्यूजीलैंड में रह रही है और वहां की जिंदगी का एक हिस्सा आज भी उन्हें हैरान करता है. उन्होंने बताया कि कोलंबिया में लोग आमतौर पर हफ्ते में 48 घंटे काम करते हैं. अगर कोई इससे ज्यादा समय काम करता है, तो उसे मेहनती और डेडिकेटेड एम्पलॉय माना जाता है. उन्होंने कहा कि वहां काम को ही जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा समझा जाता है. लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे खुद पर ज्यादा दबाव डालें और अपनी काबिलियत साबित करने के लिए लगातार मेहनत करें.

न काम का प्रेशर, न किसी को इंप्रेस करना

डैनी कास्टिलो ने बताया कि जब वह न्यूजीलैंड आकर वहां काम करने लगीं, तभी उन्हें असली अंतर समझ में आया. उन्होंने कहा कि वहां का वर्क कल्चर उनके लिए थोड़ा चौंकाने वाला था, क्योंकि लोग आमतौर पर काम का समय खत्म होते ही काम बंद कर देते हैं. काम के बाद वे अपने परिवार, दोस्तों या अपने शौक के साथ समय बिताते हैं. कास्टिलो बताती हैं कि वहां काम का प्रेशर नहीं होता है. लोगों से लंबे समय तक काम करके दूसरों को इंप्रेस करने की उम्मीद नहीं की जाती. 

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न ज्यादा देर तक काम करने की होड़

उन्होंने बताया कि जब उनका 40 घंटे का काम पूरा हो जाता है, तो वे लैपटॉप बंद कर देती हैं और सुकून से वीकेंड का मजा लेती हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि उस दौरान कोई काम का प्रेशर नहीं होगा. कास्टिलो ने कहा कि न्यूजीलैंड में ऐसा लगता है कि काम जिंदगी के अनुसार चलता है, न कि जिंदगी काम के अनुसार. वहां लोग काम के बाहर की जिंदगी को भी उतनी ही अहमियत देते हैं और दिन खत्म होते ही बिना किसी प्रेशर के काम बंद कर देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वहां इस बात की होड़ नहीं होती कि कौन ज्यादा या लंबे समय तक काम करता है. कुल मिलाकर उन्होंने न्यूजीलैंड के वर्क-लाइफ बैलेंस को बहुत बेहतर बताया और कहा कि यह वहां रहने की सबसे अच्छी बातों में से एक है.

Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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