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Sankashti Chaturthi Vrat 2026: इस कथा के बिना अधूरा माना जाता है संकष्टी चतुर्थी का व्रत, पूजा में जरूर पढ़ें

संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करना अत्यंत लाभदायक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति की पूजा करने से जीवन के कष्ट-संकट दूर होते हैं और सुख-शांति बनी रहती है.

Sankashti Chaturthi Vrat 2026: इस कथा के बिना अधूरा माना जाता है संकष्टी चतुर्थी का व्रत, पूजा में जरूर पढ़ें
संकष्टी चतुर्थी 2026
Photo Credit: NDTV

Sankashti Chaturthi 2026: आज यानी 2 अगस्त को सावन महीने के संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति जी की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ना बेहद शुभ होता है. माना जाता है कि इस व्रत कथा को पढ़े बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. अगर आप भी आज व्रत रख रहे हैं, तो संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा जरूर पढ़ें.

संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार यह उस समय की बात है जब भगवान विष्णु का विवाह हो रहा था. इस विवाह में सभी देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था. बारातियों में सभी थे लेकिन भगवान गणेश नहीं पहुंचे थे. इसका कारण पूछा गया तो पता चला कि भगवान शिव को न्योता भेजा गया था लेकिन भगवान गणेश के पास न्योता नहीं गया जिसपर सभी ने कहा कि अगर भगवान गणेश नहीं भी आए तो ठीक है. गणेश भगवान वहां आ पहुंचे लेकिन उन्हें घर की रखवाली करने के लिए बैठा दिया गया. 

नारदजी वहां आ पहुंचे और उन्होंने गणपति बप्पा को दरवाजे पर बैठा देखा तो वहां अकेले रुकने का कारण पूछा. गणेशजी ने बताया कि भगवान विष्णु ने मेरा अपमान किया है. यह सुनकर नारदजी ने सलाह दी कि आप अपनी मूषक सेना को बारात के आगे का रास्ता खोदने के लिए भेज दीजिए. जब सभी जमीन में धंस जाएंगे तो उन्हें आपको सम्मान के साथ बुलाना पड़ेगा. गणेशजी ने बिल्कुल ऐसा ही किया. 

इसके बाद हुआ वही जो सोचा था. सभी बाराती मूषकों की खोदी हुई जमीन में धंस गए. इसके बाद सबने लाख कोशिश की लेकिन निकल नहीं पाए. सभी ने बहुत उपाय सोचे लेकिन काम कोई नहीं आया. आखिर में नारदजी वहां आए और भगवान गणेश का अपमान याद दिलाया. भगवान शंकर से गणेशजी को लाने की विनती की गई जिसके बाद गणपति बप्पा आए. 

बप्पा का आदर-सम्मान के साथ पूजन किया गया, गणपति बप्पा के मंत्रों का उच्चारण किया गया और टूटे रथ फिर से ठीक हो गए, खुदी हुई जमीन भर गई. इसपर किसी ने कहा कि आपने जरूर गणपति बप्पा का सर्वप्रथम पूजन नहीं किया होगा इसीलिए आपके सब काम बिगड़ गए. गणपति बप्पा का जयकारा लगाया गया और तभी से संकटों से मुक्ति पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने की शुरूआत हुई.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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