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पेपर देख छात्रों की उड़ी हवाइयां! CBSE 10 मैथ्स पेपर को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, क्या सच में टफ था एग्जाम

एग्जाम खत्म हुआ, घंटी बजी और बाहर निकलते ही कई चेहरों पर मायूसी साफ दिखी. कुछ बच्चे खामोश थे, कुछ की आंखें नम. आखिर CBSE 10वीं मैथ्स पेपर में ऐसा क्या था, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी?

पेपर देख छात्रों की उड़ी हवाइयां! CBSE 10 मैथ्स पेपर को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, क्या सच में टफ था एग्जाम
10वीं का मैथ्स पेपर बना सिरदर्द, क्या सच में मुश्किल था 10वीं मैथ्स एग्जाम? सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

CBSE 10th Maths Exam 2026: देशभर में Central Board of Secondary Education, CBSE की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा के तहत आयोजित मैथ्स स्टैंडर्ड पेपर (Maths Standard) के बाद छात्रों और अभिभावकों की इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. परीक्षा के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कई पोस्ट वायरल हुईं, जिनमें पेपर को कठिन और लंबा बताया गया.

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छात्रों की नाराजगी और क्षेत्रीय सवाल (CBSE maths paper student reaction)

कई छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र उम्मीद से ज्यादा मुश्किल था और समय कम पड़ गया. खासकर तमिलनाडु क्षेत्र के छात्रों ने दावा किया कि उनका पेपर अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा कठिन था. कुछ यूजर्स ने Narendra Modi, Dharmendra Pradhan और M K Stalin को टैग कर परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए. कुछ अभिभावकों ने कहा कि, सैंपल पेपर और असली परीक्षा के स्तर में काफी फर्क था. उनका तर्क है कि यदि बोर्ड उच्च स्तर के सवाल पूछना चाहता है, तो उसी स्तर की तैयारी सामग्री भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

समर्थन में भी उठी आवाज (CBSE board exam controversy)

वहीं कई लोगों ने पेपर के स्तर का समर्थन भी किया. कुछ यूजर्स का मानना है कि, अगर छात्र आगे चलकर JEE या NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी करेंगे, तो मजबूत बेस जरूरी है. कुछ ने कहा कि समस्या पेपर की नहीं, बल्कि अभ्यास और समय प्रबंधन की हो सकती है.

इस बीच परीक्षा की पारदर्शिता और समान कठिनाई स्तर को लेकर बहस तेज हो गई है. हालांकि, CBSE की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

छात्रों ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल (Maths exam tough reaction)

CBSE Class 10 Maths exam को लेकर उठे सवाल सिर्फ एक पेपर तक सीमित नहीं हैं. यह चर्चा छात्रों के मानसिक दबाव, परीक्षा प्रणाली और तैयारी के स्तर से जुड़ी है. आखिरकार यह बहस बताती है कि बोर्ड परीक्षा सिर्फ अंक नहीं, बल्कि सिस्टम पर भरोसे का भी मामला है. उम्मीद है कि संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर स्पष्टता देंगे, ताकि छात्रों का एतबार बना रहे.

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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