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भारत को गैस खपत कम करनी होगी, पावर सेक्टर में कोयले का यूज बढ़ेगा...मिडिल ईस्ट संकट पर एक्सपर्ट की सलाह

मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक नैचुरल गैस सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे भारत पर बड़ा असर पड़ा है. कतर की गैस फील्ड पर मिसाइल हमले के बाद QatarEnergy ने उत्पादन रोक रखा है. भारत सरकार ने गैस उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नए प्राथमिकता दिशा‑निर्देश जारी किए हैं.

भारत को गैस खपत कम करनी होगी, पावर सेक्टर में कोयले का यूज बढ़ेगा...मिडिल ईस्ट संकट पर एक्सपर्ट की सलाह
  • मिडिल ईस्ट संकट से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में नेचुरल गैस सप्लाई बाधित, भारत सहित कई देशों पर असर
  • भारत अपनी नेचुरल गैस की करीब आधी जरूरत अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूरी करता है, जिसमें कतर का महत्वपूर्ण योगदान है
  • सरकार ने नेचुरल गैस की आपूर्ति 4 प्राथमिकता क्षेत्रों में कड़ी निगरानी और नियंत्रण के दिशा-निर्देश जारी किए
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मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से दुनियाभर में नेचुरल गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है. पिछले 11 दिनों से जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वॉर ज़ोन का हिस्सा बना हुआ है, जिस वजह से 750 से ज्यादा कार्गो जहाज मध्य-पूर्व एशिया के बड़े पोर्ट्स के आसपास सेफ जोन में फंसे हुए हैं. इसका सबसे ज़्यादा असर भारत जैसे देश पर पड़ रहा है जो अपनी जरूरत का करीब 50% नेचुरल गैस इंटरनेशनल बाजार से खरीदता है. ये अहम है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 20% नेचुरल गैस कतर से आयात करता है. ईरान द्वारा कतर के गैस फ़ील्ड्स पर मिसाइल हमले के बाद दुनिया की सबसे बड़ी नेचुरल गैस एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी QaterEnergy को नैचुरल गैस का प्रोडक्शन रोकना पड़ा.

इसकी वजह से मध्य-पूर्व एशिया में नेचुरल गैस का प्रोडक्शन और सप्लाई बुरी तरह से बाधित हो गयी है. इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने देश में अलग-अलग सेक्टरों में नेचुरल गैस की सप्लाई और इस्तेमाल को सख़्ती से रेगुलेट करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देश के मुताबिक, केंद्र सरकार ने नेचुरल गैस के इस्तेमाल के दृष्टिकोण कों अहम सेक्टरों को चार प्राथमिकता क्षेत्रों में बांट दिया है.

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प्राथमिकता क्षेत्र 1:

इसके तहत निम्न प्राथमिकता क्षेत्रों में नेचुरल गैस की सप्लाई उनके पिछले छह महीनों के औसत गैस खपत का 100% बनाए रखी जाएगी:

(क) घरेलू पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस आपूर्ति (Domestic Piped Natural Gas supply);

(ख) परिवहन के लिए Compressed Natural Gas (CNG);

(ग) LPG प्रोडक्शन;

(घ) पाइपलाइन कंप्रेसर ईंधन और अन्य आवश्यक पाइपलाइन परिचालन आवश्यकताएं (Pipeline compressor fuel and other essential pipeline operational requirements).

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प्राथमिकता क्षेत्र 2:

उर्वरक संयंत्रों (fertilizer plants) को प्राकृतिक गैस की सप्लाई उनके पिछले छह महीनों के औसत गैस खपत का सत्तर प्रतिशत (70%) सुनिश्चित किया जाएगा

प्राथमिकता क्षेत्र 3:

राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से चाय उद्योगों, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई पिछले छह महीनों के औसत गैस खपत के अस्सी प्रतिशत (80%) बनाए रखी जाएगी.

प्राथमिकता क्षेत्र 4 :

सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (City Gas Distribution) संस्थाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि उनके नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों के औसत गैस खपत का अस्सी प्रतिशत (80%) सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी.

तेल और गैस एक्सपर्ट ने क्या कहा

देश के जाने-माने तेल और गैस अर्थशास्त्री किरीट पारेख ने एनडीटीवी से कहा, "भारत अपनी जरूरत का 50 फ़ीसदी गैस अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है. इसमें से करीब 40% LNG हम कतर से खरीदते हैं. भारत के कुल LNG आयात का करीब 20% कतर से भारत पहुंचता है. भारत को गैस का कंजप्शन कम करना पड़ेगा, इंडस्ट्री में विशेषकर पॉवर सेक्टर में गैस का इस्तेमाल कम करना होगा."  

संकट के दौर में कई मोर्चे पर पहल जरूरी

किरीट पारेख के मुताबिक इस संकट के दौर में कई मोर्चे पर पहल जरूरी होगा. उन्होंने एनडीटीवी से कहा, "इस परिस्थिति में बिजली उत्पादन के लिए हम कोयल का इस्तेमाल ज्यादा कर सकते हैं, लेकिन इससे बिजली पैदा करना महंगा होगा. भारत के पास बिजली उत्पादन बढ़ाने की अच्छी क्षमता है, इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन जो उद्यमी गैस से अपनी इंडस्ट्री चला रहे हैं, जहां एक गैस एक क्रिटिकल संसाधन है, वहां सोच-समझ कर गैस का इकोनॉमिक इस्तेमाल करना ज़रूरी होगा. काफी गैस का इस्तेमाल हमारी पेट्रोलियम कंपनियां करती हैं हाइड्रोजन प्रोड्यूस करने के लिए. इसे हम बिजली से भी प्रोड्यूस कर सकते हैं लेकिन यह काफी महंगा विकल्प है."

ज़ाहिर है, आने वाले समय में भारत सरकार को सख्ती से नेचुरल गैस की सप्लाई और उसके इस्तेमाल के लिए जारी नए दिशा-निओर्देशों के कार्यान्वयन की मॉनिटरिंग करनी होगी। साथ ही, नेचुरल गैस के वैकल्पिक स्रोतों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने पर गंभीरता से विचार करना होगा.

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