World News: जिन्हें बिना पानी और कड़कती धूप में हफ्तों तक डटे रहने के लिए जाना जाता है, अब वही ऊंट क्लाइमेट चेंज की मार से बेदम हो रहे हैं. बीबीसी की एक स्पेशल रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने की वजह से 'रेगिस्तान के जहाज' कहे जाने वाले ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं और वे तड़प-तड़पकर दम तोड़ रहे हैं.
'गर्म रेत पर बैठते ही जलने लगती है त्वचा'
उत्तर-पूर्वी इथियोपिया के अफार इलाके में 500 ऊंटों की देखभाल करने वाले 40 साल के अली उमर ने अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के कारण ऊंटों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं, आंखों से पानी बह रहा है और गर्म रेत पर बैठते ही उनकी त्वचा जल जाती है तथा बाल झड़ने लगते हैं. अली उमर के मुताबिक, चलने वाली हवा भी अब ठंडक देने के बजाय आग उगल रही है. वह अकेले पिछले एक महीने के भीतर अत्यधिक गर्मी के कारण अपने 8 छोटे ऊंटों (बछड़ों) को गंवा चुके हैं.
सोमालिया से केन्या तक तबाही का मंजर
दुनिया के करीब 80 फीसदी एक कूबड़ वाले ऊंट उत्तर अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में पाए जाते हैं. भयंकर गर्मी झेलने की क्षमता के कारण ही लोग इन्हें पालते थे, लेकिन अब स्थितियां बेकाबू हो चुकी हैं. हालिया रिसर्च के मुताबिक, सोमालिया के उत्तरी इलाके सूल (Sool) में सूखा और अत्यधिक गर्मी के कारण 73 फीसदी तक ऊंटों की मौत दर्ज की गई है. वहां पानी की कीमतें 2000% से ज्यादा बढ़ गई हैं. जबकि केन्या के मारसाबिट जिले के पशु चिकित्सा अधिकारी हसन नुया गुयो के मुताबिक, पिछले दो सालों में भयंकर गर्मी और इंफेक्शन से ऊंटों की मौतों में 15% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
45 डिग्री के पार क्यों जवाब दे जाता है ऊंट का शरीर?
ऊंट आमतौर पर 40 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान आसानी से बर्दाश्त कर लेते हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद बेंगौमी और अल्जीरिया की यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अब्दुलमजीद छेहमा ने बताया कि जब सहारा रेगिस्तान में तापमान 50 डिग्री के पार जाता है और दिन-रात 41 से 45 डिग्री से ऊपर बना रहता है, तो यह ऊंटों की कोशिकाओं पर सीधा हमला करता है.
इससे ऊंटों के व्हाइट ब्लड सेल्स और इम्युनिटी सिस्टम डैमेज हो जाते हैं. उनका मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, वे खाना छोड़ देते हैं और बीमार पड़कर दम तोड़ने लगते हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर अफ्रीका में 1991 से 2025 के बीच हर दशक में 0.43 डिग्री सेल्सियस की दर से तापमान बढ़ा है, जिसके कारण कभी न हार मानने वाला यह जीव भी अब जलवायु परिवर्तन का शिकार बन रहा है.
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