Viral Post: सुबह 10:15 बजे बेंगलुरु का एक ऑफिस कैसा दिखता है? जब ये सवाल पूछा जाता है तो ज्यादातर लोग कर्मचारियों के भरे दफ्तर को ही इमेजिन करते हैं. लेकिन असलीयत इससे बिल्कुल उलट है. बेंगलुरु में अप्लाइड AI स्टूडियो के फाउंडर बाला पन्नीरसेल्वम ने इसे साबित करने के अपने ऑफिस की एक तस्वीर लिंक्डइन पर शेयर की है, जिसमें सिर्फ खाली कुर्सियां और सन्नटा पसरा नजर आ रहा है.
'4 KM दूर ऑफिस, पहुंचने में 40 मिनट लगते हैं'
बाला कहते हैं, 'अगर हम ऑफिस पहुंचेंगे ही नहीं, तो अच्छा काम करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? समस्या लोगों की नहीं है, बल्कि ऑफिस पहुंचने में लगने वाली मेहनत की है. HSR इलाके में 4 किलोमीटर का रास्ता स्कूटर से तय करने में 20 मिनट और कार से 30 मिनट लगते हैं. पीक आवर्स में 10 मिनट और जुड़ जाते हैं. सिग्नल तोड़ने वाले दो-पहिया वाहनों से बचते-बचाते और इधर-उधर घूमते हुए जब आप ऑफिस पहुंचते हैं, तो आप बिल्कुल भी फ्रेश महसूस नहीं करते.'
'रोजाना के ट्रैफिक ने बर्बाद की पर्सनल लाइफ'
बाला आगे कहते हैं, 'शाम को, अगर आप 6 बजे के बाद ऑफिस से निकलते हैं, तो घर पहुंचने में दोगुना समय लगता है. अगर आप शाम 5 बजे भी निकलते हैं, तो घर पहुंचते-पहुंचते इतने थक जाते हैं कि अपनी पर्सनल जिंदगी में कुछ नहीं कर पाते. जाहिर है, अगले दिन लोग देर से ही आते हैं.'
'17 KM दूर पहुंचने में लगा 2 घंटे का समय'
बाला बताते हैं, 'कल दोपहर 4 बजे मुझे व्हाइटफील्ड से HSR (17 किलोमीटर) जाने में 2 घंटे लगे. यह एक आम दिन था, पीक आवर नहीं था, और बारिश या किसी और वजह से कोई देरी भी नहीं हुई थी.'
'बेंगलुरु के ट्रैफिक की वजह से कम हो रही प्रोडक्टिविटी'
आखिर में बाला ने कहा, 'हम इस शहर में अच्छा काम करने की अपनी क्षमता को पूरी तरह से खत्म कर रहे हैं. अगर आपके आस-पास इतना शोर-शराबा हो, तो आप सोचने-समझने में समय कैसे बिता सकते हैं?'
यहां देखें बाला पन्नीरसेल्वम की लिंक्डइन पोस्ट:-
समस्या ही नहीं समाधान भी बतायाबाला आगे लिखते हैं, 'यह कहना सही नहीं है कि स्थिति ठीक नहीं हो सकती. इसके समाधान आसान हैं, लेकिन उन्हें लागू करना मुश्किल है. सड़कों पर कारों की संख्या कम करने, अच्छा पब्लिक ट्रांसपोर्ट और साइकिल लेन देने पर ध्यान देना चाहिए. ऐसे शहर हैं जिनकी आबादी का डेंसिटी बहुत ज्यादा है, फिर भी उन्होंने इस समस्या को हल कर लिया है. सबसे बड़ा असर तब हो सकता है जब शहर की तंग गलियों में सिर्फ साइकिल के लिए अलग लेन बनाई जाएं. जब तक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर न बना हो, तब तक हमें पहले से ही जाम वाली सड़कों पर कैब, ट्रक और बसों को चलने की इजाजत नहीं देनी चाहिए.
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन्सइस पोस्ट के वायरल होते ही कमेंट्स बॉक्स में लोग अपनी-अपनी राय देने लगे. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने पन्नीरसेल्वम की बात से सहमति जताई और कहा कि शहर में मौजूदा हालात बहुत खराब हैं और ट्रैफिक की समस्या बढ़ती जा रही है.
एक यूजर ने कहा, 'हमारी रफ्तार को जो चीज धीमी कर रही है, वह है इंफ्रास्ट्रक्चर, खराब मौसम की वजह से प्रोडक्टिविटी में होने वाला भारी नुकसान. हम 6-7% की दर से इसलिए बढ़ पा रहे हैं क्योंकि हमारे लोगों में जबरदस्त हिम्मत है और भारत के बारे में विदेशों में सोच बेहतर हुई है. लेकिन, जैसे-जैसे विकास का दबाव बढ़ेगा, कमजोर बुनियादें टूटने की कगार पर पहुंच जाएंगी.'
दूसरे यूजर ने कहा, 'बेंगलुरु में यह सब आम बात हो गई है. वहां रहने या वहां जाकर बसने वाले लोग टाइम, एनर्जी और रिसोर्सेज की लगातार बर्बादी को जिंदगी का हिस्सा मानने लगे हैं. कोई शहर एक हद तक ही बोझ सह सकता है. अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर ठीक न हो, तो वह शहर ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा.'
तीसरे यूजर ने कहा, 'मैं हाल ही में व्हाइटफील्ड में एक कार्यक्रम में गया था और मुझे याद है कि मैंने सोचा था कि कैसे मैंने शुक्रवार के 3 घंटे सिर्फ आने-जाने में ही गंवा दिए. घर लौटते समय मुझमें सत्रों और हुई बातचीत के बारे में सोचने-समझने की भी ज्यादा एनर्जी नहीं बची थी.'
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