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भारत में रह रही अमेरिकी महिला ने बताया भारतीय और अमेरिकन ग्रोसरी स्टोर में क्या होता है अंतर, वीडियो देख कमेंट सेक्शन में छिड़ गई बहस

दिल्ली में रहने वाली अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने भारतीय और अमेरिकन ग्रोसरी स्टोर के बीच में अंतर दिखाया है. वीडियो वायरल हुआ तो कमेंट सेक्शन में लोगों के बीच बहस छिड़ गई.

भारत में रह रही अमेरिकी महिला ने बताया भारतीय और अमेरिकन ग्रोसरी स्टोर में क्या होता है अंतर, वीडियो देख कमेंट सेक्शन में छिड़ गई बहस
वायरल वीडियो

Difference Between American and Indian Grocery Store: भारत और अमेरिका के बीच संस्कृति और रहन-सहन का अंतर अधिकतर सभी लोगों को पता है. लेकिन क्या आप जानते हैं अमेरिकी और भारतीय 'ग्रोसरी स्टोर' में क्या अंतर होता है. हाल ही में भारत में रह रही एक अमेरिकी महिला ने जब सोशल मीडिया पर देसी और विदेशी सुपरमार्केट के अनुभवों को कंपेयर किया तो, तो इंटरनेट पर मानों कमेंट्स का सैलाब आ गया. 

स्टोर्स में ऑप्शन्स का अंतर

दिल्ली में रहने वाली अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर क्रिस्टन फिशर ने हाल ही में भारत और अमेरिका के ग्रोसरी स्टोर्स को लेकर अपनी दिलचस्प तुलना शेयर की. उन्होंने एक इंस्टाग्राम वीडियो में सीरियल, टूथपेस्ट, जूस, सोडा, ब्रेड, फ्रोजन फूड और टॉयलेट पेपर जैसे सामानों के सेक्शन दिखाते हुए बताया कि अमेरिका के सुपरमार्केट में एक ही चीज के कई-कई ऑप्शन मिलते हैं, जबकि भारत के स्टोर्स में ऑप्शन कम होते हैं और खरीदारी का अनुभव ज्यादा सीधा और आसान होता है.

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फिशर के मुताबिक, अमेरिका के सुपरमार्केट में बहुत ज्यादा ऑप्शन होने की वजह से लोगों को अक्सर सामान खरीदते समय उलझन का सामना करना पड़ता है. वहीं, भारत में कम ऑप्शन होने से खरीदारी जल्दी और आसान लगती है, क्योंकि लोगों को ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद किसी एक सिस्टम को बेहतर बताना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि भारत और अमेरिका में खरीदारी का एक्सपीरिएंस अलग-अलग होता है.

आप भी देखिए वीडियो

कैप्शन में कही ये बात

अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर क्रिस्टन फिशर ने वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा 'भारत और अमेरिका के किराना स्टोर्स में काफी अंतर देखने को मिलता है. भारत में जहां ज्यादातर दुकानें छोटी होती हैं और सामान के कम ऑप्शन मिलते हैं, वहीं अमेरिका के स्टोर्स बहुत बड़े होते हैं और एक ही चीज के कई-कई ऑप्शन उपलब्ध होते हैं. ज्यादा ऑप्शन होने की वजह से अमेरिका में लोगों को सामान चुनते समय उलझन और थकान महसूस हो सकती है, जबकि भारत में कम विकल्प होने से खरीदारी का फैसला लेना आसान और तेज हो जाता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई एक तरीका बेहतर है, बल्कि दोनों देशों में खरीदारी का एक्सपीरिएंस पूरी तरह अलग दिखता है'.

कमेंट सेक्शन में छिड़ी बहस

क्रिस्टन फिशर का ये वीडियो वायरल हुआ तो कमेंट सेक्शन में लोगों की बहस छिड़ गई है. एक यूजर ने लिखा कि भारत में ज्यादातर लोग पैक्ड चीजों के बजाय फ्रेश सामान लेना पसंद करते हैं. वहीं दूसरे ने कहा कि अमेरिका में एक बड़े इलाके के लिए एक ही बड़ा स्टोर होता है, जबकि भारत में छोटे-छोटे कई स्टोर पास-पास ही मिल जाते हैं.

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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