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असली नहीं 'AI' वाली हसीना! इंस्टाग्राम पर तहलका मचाने वाली 'एमिली हार्ट' का काला सच आया सामने

कहते हैं नकल के लिए भी अक्ल चाहिए और भारत के एक 22 साल के लड़के ने इसे सच कर दिखाया. जनाब ने घर बैठे-बैठे AI के जरिए एक ऐसी 'विदेशी हसीना' तैयार की, जिसने अमेरिका के बड़े-बड़े दिग्गजों और ट्रंप समर्थकों को अपना दीवाना बना लिया.

असली नहीं 'AI' वाली हसीना! इंस्टाग्राम पर तहलका मचाने वाली 'एमिली हार्ट' का काला सच आया सामने
हॉलीवुड एक्ट्रेस जैसी शक्ल...'एमिली हार्ट' ने एक भारतीय छात्र के लिए कमाए हजारों डॉलर

AI influencer Emily Hart: डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले एक भारतीय छात्र 'सैम' (बदला हुआ नाम) को पैसों की तंगी हुई, तो उसने शॉर्टकट निकाला. उसने 'जेमिनी' जैसे AI टूल्स का सहारा लेकर एक गोरी-चिट्टी, नीली आंखों वाली लड़की बनाई, जिसे अमेरिकी और ईसाई धर्म को मानने वाली दिखाया. ये मोहतरमा कभी बिकिनी में दिखतीं, तो कभी हाथ में बंदूक थामे 'अमेरिका फर्स्ट' के नारे लगातीं. नाम रखा 'एमिली हार्ट'जो दिखती तो अप्सरा जैसी थी, लेकिन असल में उसका वजूद सिर्फ कंप्यूटर की कोडिंग में था. डॉलर ऐसे बरसे कि देखने वाले दंग रह गए. चलिए जानते हैं इस 'जुगाड़ू' भारतीय स्टूडेंट की पूरी दास्तान. उनकी शक्ल काफी हद तक हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा जेनिफर लॉरेंस से मिलती थी.

करोड़ों व्यूज और डॉलर्स की बारिश (AI influencer scam)

सैम का ये मास्टरप्लान ऐसा फिट बैठा कि इंस्टाग्राम की रील पर 10-10 मिलियन व्यूज आने लगे. लोग एमिली हार्ट की पोस्ट पर फिदा थे और उसे असली नर्स समझते थे. देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर हजारों फॉलोअर्स हो गए और 'Fanvue' जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग उसकी तस्वीरों के लिए पैसे देने लगे. सैम ने बड़ी चतुराई से उन मुद्दों को पकड़ा, जो अमेरिका में हॉट थे...जैसे गर्भपात का विरोध और अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने की बातें. इस 'देसी तड़के' वाली विदेशी प्रोफाइल ने कुछ ही महीनों में इतनी कमाई कर ली, जितनी इंडिया में अच्छे-अच्छे नहीं कर पाते.

भंडाफोड़ हुआ तो उड़ गए सबके होश (Fanvue AI creators)

लेकिन कहते हैं ना कि झूठ के पांव नहीं होते. 'WIRED' की एक पड़ताल ने इस पूरे खेल से पर्दा उठा दिया. पता चला कि जिसे दुनिया 'एमिली' समझ रही थी, उसे यूपी-बिहार या दक्षिण भारत के किसी कमरे में बैठकर एक लड़का चला रहा था. धोखाधड़ी पकड़े जाने पर इंस्टाग्राम और फेसबुक ने अकाउंट्स को डिलीट कर दिया. हालांकि, सैम को इस पर कोई पछतावा नहीं है. उसका कहना है कि उसने किसी को ठगा नहीं, लोग कंटेंट के बदले पैसे दे रहे थे और वे खुश थे. अब वो अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहता है.

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यह खबर हमें आगाह करती है कि इंटरनेट की इस मायावी दुनिया में जो दिख रहा है, वो हमेशा सच नहीं होता. एआई की ताकत ने एक तरफ तो सहूलियत दी है, तो दूसरी तरफ 'पहचान की चोरी' को एक नए और खतरनाक मुकाम पर पहुंचा दिया है. एक भारतीय छात्र का ये कारनामा भले ही तकनीकी रूप से स्मार्ट लगे, लेकिन यह डिजिटल नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े करता है. अगली बार किसी 'परदेसी मेम' की पोस्ट पर कमेंट करने से पहले जरा सोच लीजिएगा, कहीं पीछे कोई 'देसी छोरा' तो नहीं बैठा.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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