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दुनिया की 100 सबसे आक्रामक प्रजातियों में शामिल 707 कछुए लेकर कोलकाता पहुंचा यात्री, बच्चों के लिए है खतरनाक

कोलकाता एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने बैंकॉक से आए एक यात्री के बैग से 707 रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद किए हैं. ये दुनिया की 100 सबसे खतरनाक प्रजातियों में से एक हैं.

दुनिया की 100 सबसे आक्रामक प्रजातियों में शामिल 707 कछुए लेकर कोलकाता पहुंचा यात्री, बच्चों के लिए है खतरनाक
बैंकॉक से आए बैग में हो रही थी अजीब हरकत, तलाशी ली तो निकले 707 'रेड-ईयर्ड' कछुए
X@kolkata_customs

Kolkata News: पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Netaji Subhas Chandra Bose International Airport ) पर कस्टम विभाग (Kolkata Customs) ने वन्यजीव तस्करी (Wildlife Trafficking) का एक बड़ा मामला पकड़ा है. कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) ने बुधवार रात बैंकॉक (Bangkok) से आए एक यात्री के पास से भारी मात्रा में विदेशी कछुए बरामद किए हैं.

कैसे पकड़ी गई कछुओं की खेप?

बुधवार रात बैंकॉक से आई फ्लाइट का यह यात्री ग्रीन चैनल पार कर रहा था. तभी AIU अधिकारियों को उसके सामान के अंदर कुछ अजीब सी हलचल महसूस हुई. शक होने पर जब अधिकारियों ने उसे रोककर बैग की तलाशी ली, तो अंदर का नजारा हैरान करने वाला था. बैग के अंदर कुल 707 जिंदा कछुए भरे हुए थे. 

जांच में पता चला कि ये सभी दुनिया की 100 सबसे आक्रामक प्रजातियों में गिने जाने वाले रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए हैं.

वन्यजीव तस्करी के आरोप में यात्री को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है. अब अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि इतनी बड़ी खेप आखिर किसे डिलीवर की जानी थी.

भारत में क्यों है इन कछुओं की इतनी डिमांड?

भारतीय पालतू पशु बाजार में इन विदेशी कछुओं की काफी ज्यादा मांग रहती है. इसकी दो प्रमुख वजहें हैं. पहली- इन कछुओं के शरीर पर लाल रंग के खूबसूरत निशान होते हैं. दिखने में अच्छे होने के कारण लोग इन्हें आसानी से पालतू जानवर के तौर पर घर में रख लेते हैं. दूसरी- भारत की देसी कछुआ प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं. इसलिए लोग शौक पूरा करने के लिए विदेशी कछुओं की अवैध डिमांड करते हैं.

इन्हें पालने में छिपा है भयंकर खतरा

पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज से रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुओं का भारत में आना बेहद खतरनाक माना जाता है. वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, जब लोग इन्हें पाल नहीं पाते और किसी नदी या तालाब में छोड़ देते हैं, तो ये भारत के मीठे पानी की 29 देसी कछुआ प्रजातियों के लिए काल बन जाते हैं. ये भोजन, धूप सेंकने और अंडे देने की जगह के लिए देसी कछुओं से सीधे तौर पर टकराते हैं.

वापस उनके देश भेजे जाएंगे कछुए

यह प्रजाति साल्मोनेला (Salmonella) नाम के खतरनाक बैक्टीरिया की वाहक होती है, जिससे इंसानों के स्वास्थ्य को सीधा खतरा हो सकता है. इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है. इस बड़े खतरे को देखते हुए कस्टम विभाग एक विशेष प्रक्रिया अपनाता है. भारतीय इकोसिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए इन सभी जीवित कछुओं को उचित देखभाल के साथ वापस उनके मूल देश भेज दिया जाएगा.

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