- न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने अपना सबसे बड़ा वादा पूरा कर लिया है
- न्यूयॉर्क में 10 लाख घरों का किराया नहीं बढ़ेगा. इसके पक्ष में वोटिंग हुई है
- ममदानी खुद को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट बताते हैं और अमीरों से पहले आम लोगों के राजनीति पर जोर देते हैं
अमेरिका की राजनीति में आजकल किंगमेकर बनकर उभरे न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने अपना सबसे बड़ा वादा पूरा कर लिया है. अमेरिका के सबसे महंगे किराए वाले शहरों में शामिल न्यूयॉर्क में 10 लाख घरों का किराया नहीं बढ़ेगा. इसके पक्ष में वोटिंग हुई है और इसे भारतीय मूल के वामपंथी मेयर जोहरान ममदानी की बड़ी जीत माना जा रहा है.
इस फैसले के बाद रेंट स्टेबलाइजेशन (किराया नियंत्रण) नियम के तहत आने वाले करीब 10 लाख घरों का किराया नहीं बढ़ेगा. इससे जोहरान ममदानी ने चुनाव के दौरान किया अपना बड़ा वादा पूरा कर दिया है. ममदानी खुद को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट बताते हैं और अमीरों से पहले आम लोगों के राजनीति पर जोर देते हैं.
इस फैसले का विरोध भी हुआ
मई में रेंट गाइडलाइंस पैनल की शुरुआती वोटिंग में भी जोहरान ममदानी की इस योजना का समर्थन किया गया था. इस योजना का मकसद न्यूयॉर्क के करीब 10 लाख अपार्टमेंटों का किराया बढ़ने से रोकना था. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, किराया नहीं बढ़ाने के फैसले को एक बैठक के बाद मंजूरी दी गई है. इस बैठक में बड़ी संख्या में किरायेदारों के संगठन शामिल हुए थे.
वोटिंग से पहले रेंट गाइडलाइंस बोर्ड के एक सदस्य ने इस्तीफा दे दिया. वह मकान मालिकों के हितों का प्रतिनिधित्व करते थे. उन्होंने कहा कि यह बोर्ड अब सही तथ्यों के आधार पर फैसला लेने वाली संस्था नहीं रह गया है और हर हाल में किराया नहीं बढ़ाने का फैसला करना चाहता है.
न्यूयॉर्क में लगातार बढ़ रहा किराया
दूसरी ओर, बाकी घरों का किराया लगातार बढ़ रहा है. अप्रैल में मैनहैटन में एक अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया पहली बार 5,000 डॉलर से ऊपर पहुंच गया. वहीं खाली घरों की दर घटकर 1.55 प्रतिशत रह गई, जो पिछले 6 साल का सबसे निचला स्तर है. यानी महंगे होने के बावजूद लोग घर रेंट पर ले रहे हैं.
बढ़ती महंगाई और रहने का बढ़ता खर्च न्यूयॉर्क और दूसरे शहरों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. इसी वजह से पिछले साल नवंबर में जोहरान ममदानी को चुनाव में जीत मिली. उन्होंने इसी का अपनी राजनीति का आधार बनाया.
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