इस्लामाबाद:
पाकिस्तान की कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या करने वाले सुरक्षाकर्मी मुमताज कादरी को माफी देने की मांग की है। कादरी को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। जमात की शूरा (परिषद) में एक प्रस्ताव पारित कर मांग की है कि कादरी को राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ) के तहत माफी दे दी जाए। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के समय इस विवादास्पद अध्यादेश को पारित किया गया था। इसके तहत आपराधिक मामलों में घिरे कई नेताओं को राहत मिली। पारित प्रस्ताव में कहा गया है, सरकार को कादरी के खिलाफ मामले को वापस ले लेना चाहिए। यह फैसला जनहित में होना चाहिए। जमात-ए-इस्लामी ने एनआरओ के तहत कई नेताओं के खिलाफ दायर मामलों को वापस लेने का हवाला देते हुए यह मांग की है। कादरी ने तासीर की हत्या की बात अदालत में स्वीकार की थी। उसे आतंकवाद विरोधी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। तासीर विवादास्पद ईशनिंदा कानून के विरोधी माने जाते थे। कादरी के वकीलों ने मौत की सजा के खिलाफ इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर कर रखी है। जमात-ए-इस्लामी के प्रस्ताव में कहा गया है, कादरी ने लोगों की भावनाओं का साथ जाकर ईशनिंदा कानून की मुखालफत करने वाले तासीर की हत्या की थी। पार्टी ने पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 45 का हवाला दिया, जिसमें राष्ट्रपति को किसी को भी माफ करने का अधिकार दिया गया है। मारे जाने से पहले तासीर ने भी आयशा बीबी के लिए राष्ट्रपति से माफी की गुहार लगाई थी। ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखने वाली आयशा को ईशनिंदा के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। जमात-ए-इस्लामी ने यह भी मांग की है कि सरकार स्पष्ट एलान करे कि ईशनिंदा कानून में किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा।