- हूती प्रवक्ता ने कहा कि हमलों में बड़ी तादाद में मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया है.
- रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट के पास अरामको के फ्यूल टैंक में आग लगी.
- सऊदी गठबंधन ने कहा- एयर डिफेंस ने रियाद, बैश, ताइफ, फरासान और यानबू पर हमलों को नाकाम किया.
हूती गुट ने कहा कि उसने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और लाल सागर के तट पर स्थित प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा केंद्र यानबू को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. इससे दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ गया है. हूती गुट द्वारा चलाए जा रहे अल-मसीराह टीवी पर प्रसारित एक बयान में, हूथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि इन हमलों में 'बड़ी तादाद में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों' का इस्तेमाल किया गया.
सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने शनिवार को कहा कि ईरान समर्थित इस समूह ने सुबह-सुबह रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी. इससे पहले सऊदी राजधानी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास आग लग गई थी. AFP के मुताबिक, रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल डिपो में सऊदी की बड़ी तेल कंपनी 'अरामको' के लोगो वाले फ्यूल टैंक में लगी आग को फायरफाइटर्स ने बुझाया.
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और AFP द्वारा वेरिफाई किए गए फुटेज में एयरपोर्ट की इमारतों के ऊपर काले धुएं का गुबार दिखाई दिया.
HOUTHIS BOMB Saudi Arabia's Riyadh airport as THICK BLACK SMOKE billows from the site pic.twitter.com/yWE1BQK2HX
— RT (@RT_com) September 19, 2026
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फ्लाइट्स आवागमन में देरी...
शनिवार को रियाद में दो बार धमाकों की आवाज सुनाई देने के बाद हूतियों का यह बयान आया. दूसरी घटना के बाद राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास धुआं उठता देखा गया और कुछ उड़ानें भी देर से चलीं.

सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने जारी किए गए एक बयान में कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने रियाद को निशाना बनाने वाली हूती बैलिस्टिक मिसाइल को रोककर नष्ट कर दिया और बैश, ताइफ, फरासान और यानबू पर हमलों को नाकाम कर दिया. गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इन हमलों में 'आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों' को निशाना बनाया गया था और उन्होंने आगे के हमलों को रोकने के लिए सही कदम उठाने का वादा किया.
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हाल के हफ्तों में, यमन में ईरान के समर्थन वाले हूती आंदोलन ने तेजी से हमला करते हुए दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है. इससे सऊदी अरब के समर्थन वाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सामने जवाबी कार्रवाई करने की चुनौती खड़ी हो गई है.
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