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जिस मिट्टी से मिलता है दुनिया को 95% खाना, वही आधी से ज्यादा खराब हो गई- UN की रिपोर्ट डराती है

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट के अनुसार मिट्टी को बेहतर बनाने के तरीके पहले से पता हैं, लेकिन उन्हें बड़े स्तर पर अपनाया नहीं जा रहा. ऐसा नहीं है कि किसानों की तकनीक नहीं पता लेकिन उनकी भी अपनी मजबूरियां हैं.

जिस मिट्टी से मिलता है दुनिया को 95% खाना, वही आधी से ज्यादा खराब हो गई- UN की रिपोर्ट डराती है
दुनिया की आधी से ज्यादा मिट्टी हो चुकी है खराब (Photo- AFP)

दुनिया की आधी से ज्यादा मिट्टी खराब हालत में है. इससे दुनिया में खाने की चीजों की सप्लाई और पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की अलग-अलग प्रजातियों को खतरा है. खास बात यह है कि मिट्टी को बेहतर बनाने के तरीके पहले से पता हैं, लेकिन उन्हें बड़े स्तर पर अपनाया नहीं जा रहा. संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में गुरुवार, 27 अगस्त को यह बात कही गई.

UN के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी कि दुनिया को मिट्टी का सिर्फ इस्तेमाल करने की सोच छोड़कर उसकी देखभाल करने की सोच अपनानी होगी. रिपोर्ट लिखने वाले विशेषज्ञों ने बताया कि मिट्टी हमारी 95% खाद्य चीजों के उत्पादन में मदद करती है. दुनिया में मौजूद करीब 59% तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु मिट्टी पर निर्भर हैं. समुद्र के बाद मिट्टी दुनिया में कार्बन को जमा रखने का दूसरा सबसे बड़ा साधन भी है.

लेकिन इसके बावजूद मिट्टी की हालत बहुत तेजी से खराब हो रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 52.5% इलाकों और क्षेत्रों में मिट्टी की देखभाल खराब या बहुत खराब है. करीब एक-तिहाई इलाकों में इसकी हालत ठीक-ठाक है. वहीं सिर्फ 14% इलाकों में मिट्टी की देखभाल अच्छी या बहुत अच्छी है.

यह FAO की दुनिया की मिट्टी पर दूसरी बड़ी रिपोर्ट है. इससे पहले 2015 में ऐसी पहली बड़ी रिपोर्ट जारी की गई थी. उस रिपोर्ट में पाया गया था कि दुनिया की ज्यादातर मिट्टी की हालत ठीक-ठाक, खराब या बहुत खराब थी. FAO ने बताया कि 2015 के बाद से दुनिया की आबादी 80 करोड़ बढ़ गई है. इस दौरान करीब 8 करोड़ हेक्टेयर (लगभग 20 करोड़ एकड़) और जमीन पर मुख्य फसलें उगाई जाने लगीं। यह जमीन लगभग फ्रांस और जर्मनी को मिलाकर जितनी बड़ी है, उतनी है.

मिट्टी के कटाव का खतरा, बचाव के तरीके क्या हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक मिट्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा कटाव है. मिट्टी के कटाव में खराब और गलत तरीकों के कारण मिट्टी पानी के साथ बह जाती है या हवा के साथ उड़ जाती है. मिट्टी के लिए दूसरे खतरों में मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थों की कमी, पोषक तत्वों का गलत इस्तेमाल, मिट्टी में पेड़-पौधों और छोटे जीवों की संख्या कम होना, मिट्टी में नमक जमा होना, प्रदूषण और शहरों का फैलाव शामिल हैं. जलवायु परिवर्तन इन ज्यादातर समस्याओं को और बढ़ा सकता है. वहीं मिट्टी का खराब होना भी जलवायु परिवर्तन को बढ़ा सकता है. लेकिन अगर मिट्टी की सेहत बेहतर की जाए तो वह जलवायु परिवर्तन के असर को झेलने में ज्यादा सक्षम होगी और धरती के बढ़ते तापमान को कम करने में भी मदद मिल सकती है.

रिपोर्ट के लेखकों ने कहा कि मिट्टी को बचाने और फिर से बेहतर बनाने के ज्यादातर तरीके 2015 से पहले ही पता थे, लेकिन फिर भी इन तरीकों को बड़े स्तर पर नहीं अपनाया जा रहा. मिट्टी को खराब होने से बचाने का एक बड़ा तरीका है जमीन की जुताई कम करना या पूरी तरह बंद करना. जुताई यानी खेत की मिट्टी को हल से पलटना. यह तरीका खेती जितना ही पुराना है. लेकिन जुताई मिट्टी में मौजूद छोटे जीवों और जैविक जीवन को नुकसान पहुंचाती है. मिट्टी को ढीला करने से वह पानी के साथ बहने और हवा में उड़ने के लिए भी ज्यादा आसानी से तैयार हो जाती है.

मिट्टी को बचाने और बेहतर करने के दूसरे तरीकों में कवर फसलें लगाना भी शामिल है. इनमें दलहन और सरसों जैसी फसलें शामिल हैं. इन फसलों को ऐसी खेत की जमीन पर उगाया जाता है, जिस पर उस समय मुख्य फसल नहीं लगी होती। इससे मिट्टी अपनी जगह पर बनी रहती है और उसमें पोषक तत्व भी बढ़ते हैं. एक और तरीका एग्रोफॉरेस्ट्री है. इसमें खेती के साथ खेतों में पेड़ भी लगाए जाते हैं.

प्राकृतिक और रासायनिक खाद का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना भी मिट्टी को बचाने की एक अहम रणनीति है. हालांकि खाद खुद भी प्रदूषण का कारण बन सकती है. FAO ने कहा कि किसानों के पास जानकारी की कमी मुख्य समस्या नहीं है. बड़ी समस्या यह है कि उनके पास जरूरी संसाधनों की पहुंच कम है और इन तरीकों को अपनाने में शुरुआत में ज्यादा पैसा खर्च होता है.

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