- भारत के प्रधान वाणिज्य दूतावास, शंघाई में विश्व हिंदी दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया
- पीएम मोदी के संदेश में हिंदी को भारत की संवेदना, संस्कार और चिंतन का सशक्त माध्यम बताया गया
- शंघाई रंगमंच अकादमी के बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए और नृत्य विधा में छात्राओं का सम्मान किया गया
World Hindi Day Celebrate in China: भारत के प्रधान वाणिज्य दूतावास, शंघाई में विश्व हिंदी दिवस के मौके पर शनिवार एक शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मुख्य वाणिज्य दूत प्रतीक माथुर के नेतृत्व में आयोजित इस उत्सव ने ना केवल भारतीय समुदाय, बल्कि चीनी छात्रों और अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों को भी हिंदी की मिठास के रंग में सराबोर कर दिया.

पीएम का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई. इस अवसर पर मुख्य वाणिज्य दूत ने पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम विशेष संदेश पढ़कर सुनाया. पीएम ने अपने संदेश में कहा, "हिंदी केवल एक भाषा मात्र नहीं, बल्कि भारत की संवेदना, संस्कार और चिंतन को विश्व तक पहुंचाने वाली सशक्त कड़ी है." इस संदेश ने वहां मौजूद हर भारतीय के दिल में अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व की भावना जगा दी.

सांस्कृतिक संगम और सम्मान
'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में पूर्वी चीन के प्रमुख विश्वविद्यालयों Fudan, SISU और ECNU के छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया. चीनी छात्रों के हिंदी में अपनी रचनाएं प्रस्तुत करना आकर्षण का केंद्र रहा.साथ ही शंघाई रंगमंच अकादमी के बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए. वहीं, कला का सम्मान करते हुए भारतनाट्यम नृत्य विधा में शानदार प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया. वीरांगना श्रीमती सुनीता मेहता ने अपने दिवंगत पति, कीर्ति चक्र विजेता ब्रिगेडियर रवि दत्त मेहता को समर्पित स्वरचित कविता "कर्तव्य की अंतिम पंक्ति" पढ़ी, जिससे पूरी सभा भाव-विभोर हो गई.
चीनी छात्रों ने हिंदी में दिया अपना परिचय
कार्यक्रम में चीनी छात्रों ने नमस्ते कर हुए हिंदी में अपना परिचय दिया, जिसके जरिए वैश्विक मंच पर हिंदी के महत्व के बारे में पता चलता है.

'आषाढ़ का एक दिन'
भारतीय साहित्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के प्रयास में, प्रसिद्ध नाटककार मोहन राकेश के नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' का मंचन किया गया. खास बात यह रही कि शंघाई थिएटर अकादमी ने इसका चीनी अनुवाद भी प्रस्तुत किया.

समापन संबोधन में प्रतीक माथुर ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया और दैनिक जीवन के साथ-साथ वैश्विक मंच पर राजभाषा हिंदी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विदेशों में भी भारतीय संस्कृति की जड़ें मजबूत होती हैं.
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