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यूनाइटेड किंगडम, ब्रिटेन और इंग्लैंड... क्या है इन तीनों में फर्क? UK अगर टूट गया तो क्या होगा

हो सकता है कि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड शायद यूनाइटेड किंगडम (UK) का हिस्सा न रहें. इसलिए क्योंकि तीनों ने अब अलग होने की मांग की है.

यूनाइटेड किंगडम, ब्रिटेन और इंग्लैंड... क्या है इन तीनों में फर्क? UK अगर टूट गया तो क्या होगा
वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड ने UK से अलग होने की मांग रखी है.
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नई दिल्ली:

कभी दुनियाभर में हुकूमत करने वाले अंग्रेजों के लिए अब खुद को संभाल पाना मुश्किल हो रहा है. एक ऐसी मांग उठ रही है जो अगर पूरी होती है तो इससे यूनाइटेड किंगडम (UK) का नक्शा हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाएगा. मांग है- UK के बंटवारे का. UK को UK बनाने वाले- स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड अब इससे अलग होना चाहते हैं. तीनों की मांग है कि अपना भविष्य तय करने का अधिकार उन्हें मिले.

ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट बताती है कि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर कार्डिफ में एक डिक्लेरेशन पर दस्तखत कर सकते हैं, ताकि उन्हें यह अधिकार मिले कि उनको UK में रहना है या नहीं? 

इस दौरान जनमत संग्रह को लेकर भी चर्चा हो सकती है. तीनों चाहते हैं कि जो मौजूदा व्यवस्था है, उसमें बदलाव हो.

आखिर चल क्या रहा है UK में?

स्कॉटलैंड और वेल्स चाहते हैं कि वह UK से आजाद हो जाएं. जबकि, उत्तरी आयरलैंड चाहता है कि वह आयरलैंड में शामिल हो जाए. 

ये सब तब शुरू हुआ जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने सुझाव देते हुए कहा था कि अगर स्कॉटलैंड के UK से अलग होने के पक्ष में सहमति बनती है तो जनमत संग्रह की मंजूरी दी जा सकती है. इसके तुरंत बाद स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने इस मुद्दा बना लिया.

स्कॉटिश नेशनल पार्टी के नेता और फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने दावा किया कि एंडी बर्नहैम UK के आखिरी प्रधानमंत्री होंगे. उन्होंने कहा कि स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड, तीनों ही राज्यों की कमान ऐसे लोगों के पास है जो आजादी के समर्थक हैं. उन्होंने कहा कि UK की सरकार को 'UK के बाद के भविष्य' के लिए अभी से तैयार हो जाना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तीन दिन पहले कहा था कि वह 'यूनाइटेड आयरलैंड' देखना चाहते हैं. 

ये UK और ब्रिटेन क्या है?

अक्सर यूके, ब्रिटेन, ग्रेट ब्रिटेन और इंग्लैंड को एक ही समझ लिया जाता है. लेकिन असल में इनमें बहुत फर्क है.

500 साल पहले तक इंग्लैंड ही हुआ करता था. वेल्स पर धीरे-धीरे अंग्रेजों का कब्जा बढ़ रहा था. आखिरकार कानून बनाकर 1536 में वेल्स को इंग्लैंश में शामिल कर लिया गया. 

इसके बाद सन् 1603 में स्कॉटलैंड के राजा इंग्लैंड के राजा बन गए. बाद में 1707 में दोनों संसदों ने 'एक्ट ऑफ यूनियन 1707' पास किया और 'किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' बना.

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आगे चलकर आयरलैंड और ग्रेट ब्रिटेन 1801 में एक हो गए. 1922 में आयरलैंड का कुछ हिस्सा अलग होकर रिपब्लिक आयरलैंड बना और बचा हुआ उत्तरी आयरलैंड यूके में ही रहा. 

यूके में 4 देश- इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड हैं. इसका आधिकारिक नाम 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड उत्तरी आयरलैंड' है.

अगर UK टूटा तो क्या होगा?

UK से स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड का अलग होना एक बहुत बड़ी घटना होगी. अगर ऐसा होता है तो UK लगभग आधा साफ हो जाएगा और इसका नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा. इन तीनों के अलग होने से सिर्फ इंग्लैंड ही बचेगा.

  • जमीन: तीनों के अलग होने से UK की 46.3% जमीन चली जाएगी. अभी UK का कुल क्षेत्रफल 2,42,500 वर्ग किमी है. वहीं, अलग होने वाले तीन देशों का हिस्सा 1,12,220 वर्ग किमी है.
  • आबादी: इसे UK की आबादी लगभग 16% कम हो जाएगी. UK की आबादी 6.8 करोड़ है. इसमें इंग्लैंड की आबादी 5.7 करोड़ है, जबकि बाकी तीनों की आबादी 1.1 करोड़ है.
  • जीडीपी: अलग होने से UK की GDP भी लगभग 14% तक कम हो जाएगी. IMF के मुताबिक, UK की GDP अभी 4.26 ट्रिलियन डॉलर है. इसमें 86% हिस्सा इंग्लैंड का है. 
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और भी होंगे बड़े नुकसान!

टूट से UK को सिर्फ जमीन, आबादी और जीडीपी का ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि इसके और भी बड़े नुकसान हो सकते हैं. 

अकेले स्कॉटलैंड के पास पूरे UK की लगभग 32% जमीन है. जबकि, UK के कुल समुद्री इलाके का 60% से ज्यादा हिस्सा स्कॉटलैंड के तटीय इलाके में आता है. स्कॉटलैंड के अलग होते ही उत्तरी सागर का बड़ा इलाका इंग्लैंड के हाथ से चला जाएगा.

इसके अलावा, UK के तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग 85% से 90% भंडार स्कॉटलैंड की समुद्री सीमा में आते हैं. अलग होने पर इंग्लैंड को बिजली और गैस आयात करनी पड़ेगी.

इतना ही नहीं, UK का पूरा परमाणु हथियार कार्यक्रम स्कॉटलैंड के फैसलेन नेवल बेस में तैनात है. इंग्लैंड के अपने तटों पर ऐसा बंदरगाह नहीं है जहां इस परमाणु बेस को रातो-रात शिफ्ट किया जा सके. इसे दोबारा बनाने में अरबों पाउंड और 15-20 साल लग जाएंगे.

कुल मिलाकर, UK अगर टूटता है तो जमीन, आबादी, जीडीपी का नुकसान तो होगा ही. साथ ही UK का 'महाशक्ति' वाला दावा भी कमजोर हो जाएगा.

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