
दोषी करार दिए गए पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को रिहा करने के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच मालदीव ने साफ कर दिया कि वह इस मुद्दे पर भारत या किसी और देश से कोई निर्देश नहीं लेगा।
मालदीव के कद्दावर नेता रहे मैमून अब्दुल गयूम की बेटी और विदेश मंत्री दुन्या मैमून ने श्रीलंका में अपने आधिकारिक दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा, 'मैंने हमेशा कहा है कि भारत हमारी संप्रभुता एवं हमारी आजादी का सम्मान करता है।'
मैमून ने कहा, 'दोस्ती के आधार पर हम अपनी चिंताओं पर चर्चा कर सकते हैं। पर मैं नहीं मानती कि भारत या कोई और देश किसी खास मुद्दे पर हमें निर्देश देगा।' बहरहाल, विदेश मंत्री ने कहा कि नशीद के पास अपील का अधिकार है।
मालदीव की एक अदालत ने शुक्रवार को नशीद को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दोषी करार दिया था और उन्हें 13 साल जेल की सजा सुनाई थी जिससे उनकी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी 'एमडीपी' ने देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने 47 साल के नशीद को दोषी करार देने और उन्हें सजा दिए जाने पर चिंता जताई है। साल 2012 में राष्ट्रपति पद पर रहकर एक न्यायाधीश को बंधक बनाने के जुर्म में नशीद को सजा सुनाई गई है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा, 'मुकदमे की सुनवाई स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से हुई है, फिर फैसला आया है।' उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन, जो उनके चाचा भी हैं, ने भी पूरी दुनिया से अदालत के फैसले का सम्मान करने को कहा है।
इस बीच, नशीद को कल उस वक्त एक और झटका लगा जब मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति की ओर से अपने गिरफ्तारी आदेश के खिलाफ की गई अपील अदालत ने खारिज कर दी।
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