इजरायल और हमास ग्रुप के बीच चल रहे युद्ध के बीच, सैकड़ों महिलाएं और बच्चे लापता हो गए हैं और समूह ने उन्हें बंधक बना लिया है. शनिवार को हमास के अचानक और बड़े हमले के बाद से गाजा में 600 इजरायली और लगभग 370 लोग मारे गए हैं. लापता लोगों में एक इजरायली मां और उसकी दो बेटियां भी शामिल हैं, जो सप्ताह के अंत में गाजा सीमा के पास थीं, जब हमास ने उनके घर पर हमला किया था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, महिला डोरोन एशर अपनी बच्चियों के साथ गाजा सीमा के करीब नीर ओज़ गांव में अपनी दादी को देखने के लिए गई थी. उसने मध्य इज़रायल में अपने पति योनी आशेर को हमले के बारे में सूचित करने के लिए फोन किया. उन्होंने कहा, "उसने मुझे बताया कि आतंकवादी घर में हैं." उन्होंने कहा कि फिर फोन कट गया और उसके बाद से उनका कोई जवाब नहीं आया. बाद में, उसने अपनी पत्नी के फोन को उसके Google अकाउंट के जरिए ट्रैक किया तो देखा कि उसका लोकेशन गाजा में खान यूनिस था.
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बाद में, उनकी पत्नी और बच्चों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जब उन्हें गाजा ले जाया जा रहा था. फुटेज में परिवार को अन्य बंधकों के साथ एक वाहन में बैठने के लिए कहा जा रहा था.
दो बच्चों के पिता ने अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई और उनकी रिहाई के बदले बंधक बनने की भी पेशकश की. उन्होंने कहा, "मैं हमास से कहना चाहता हूं, उन्हें चोट मत पहुंचाओ. छोटे बच्चों को चोट मत पहुंचाओ. महिलाओं को चोट मत पहुंचाओ. अगर आप इसके बजाय मुझे चाहते हैं, तो मैं आने को तैयार हूं."
परिवार को वापस लाने की कोशिश
न्यू यॉर्कर के साथ एक साक्षात्कार में, अशर ने कहा कि वह अपने परिवार को वापस लाने के लिए सरकारी अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "मैं सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान के अधिकारियों से भी संपर्क करने का प्रयास कर रहा हूं, लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता के अलावा किसी ने भी अभी तक मुझसे संपर्क नहीं किया है. मैंने पंद्रह घंटों से न तो कुछ खाया है और न ही सोया हूं. मुझे नहीं लगता कि इस स्थिति में कोई कुछ खा सकता है या यहां तक कि खाने के बारे में भी सोचें. मैं बस इतना कर सकता हूं कि उन सभी तक पहुंचूं जो मेरी बात सुनेंगे और मेरे परिवार के नाम और तस्वीरें साझा करेंगे."
सुरक्षा अधिकारियों और विदेश मंत्रालय से संपर्क की कोशिश
आशेर ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों और विदेश मंत्रालय से सुना है लेकिन कोई भी उन्हें कोई नया विवरण नहीं दे सका. बेशक, हर दूसरे माता-पिता की तरह, मैं भयभीत और डरा हुआ हूं. मुझे चिंता है कि आने वाले दिनों में क्या होगा. अनिश्चितता से निपटना बहुत कठिन है. यह बेहद कठिन है. मुझे नहीं पता कि इसमें कितना समय लगेगा, उन्हें घर ले आओ. कहने की जरूरत नहीं है जब आप पूरे दिन अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं और कोई जवाब नहीं देता है, तो ऐसा लगता है जैसे आपको छोड़ दिया गया है. ऐसा लगभग महसूस होता है जैसे मेरा कोई नहीं है, जिस पर भरोसा कर सकते हैं.
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