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ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन मौजूदा संकट में शांत क्यों है?

एक विश्लेषक ने हल्के व्यंग्य के साथ कहा कि चीन “भौतिक रूप से जोखिम में है, लेकिन ज्यादा लचीला भी है”.

ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन मौजूदा संकट में शांत क्यों है?
  • ईरान के कच्चे तेल पर पश्चिमी देशों की पाबंदी के बावजूद चीन उसे "मलेशियाई मिश्रित तेल" के नाम से खरीद रहा है
  • होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतें 4 साल में सबसे ऊंचे स्तर पर हैं
  • IEA और जी7 ने आपातकालीन तेल भंडार जारी करने पर चर्चा की है, जो पिछले 52 वर्षों में छठी बार होगा
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नई दिल्ली:

सुएटोनियस की ‘वेस्पासियन की जीवनी' में, सम्राट के पुत्र टाइटस ने शिकायत की कि उसके पिता शहर के मूत्र संग्राहकों पर टैक्स लगा रहे हैं. वेस्पासियन ने टाइटस की नाक के पास एक सोने का सिक्का रखा और पूछा: क्या इसमें से कोई गंध आती है? पैसे में कोई गंध नहीं होती. लगभग एक दशक से जिस ईरानी कच्चे तेल पर पश्चिमी देशों ने रोक लगाई है उसे चीन रियायती दर पर खरीद रहा है. चीन जांच से बचने के लिए इसे “मलेशियाई मिश्रित तेल” के रूप में दोबारा लेबल कर देता है. 2025 में चीन के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल आयात में ईरान का हिस्सा लगभग 13% था (केप्लर). असल बात ये है कि ये तेल सस्ता था. अगर कोई गंध थी भी, तो वह मंजूर थी.

ईरान-इजरायल, अमेरिका युद्ध ने  तेल की कीमतों में आग लगा दी है. 2022 में रूस ने जब यूक्रेन हमला किया तब भी तेल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ था. मौजूदा बढ़ोतरी उसके बाद सबसे ज्यादा है.इस युद्ध ने तीन महाद्वीपों में शेयर बाजारों को हिला दिया है, सरकारों को आपातकालीन भंडार जारी करने के लिए मजबूर किया है, और एक ऐसा प्रश्न खड़ा कर दिया है जिसका उत्तर देने के लिए बीजिंग दो दशकों से तैयारी कर रहा था: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने पर क्या होगा?

एक भयभीत दुनिया

होम्स ने अपनी कहानी ‘ए स्कैंडल इन बोहेमिया' में कहा था कि आंकड़ों के बिना सिद्धांत बनाना एक बड़ी गलती है. अब आंकड़े उपलब्ध हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत आठ दिनों में लगभग 50% बढ़ गई और सोमवार को 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत भी इसी के अनुरूप बढ़ी और कुछ समय के लिए 119.48 डॉलर तक पहुंच गई. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के बाद दोनों की कीमत गिरकर लगभग 105 डॉलर तक आ गई, जिसमें बताया गया था कि जी7 के वित्त मंत्री समन्वित भंडार जारी करने पर चर्चा करने के लिए एक आपातकालीन बैठक बुला रहे हैं.इसमें और गिरावट तब आई जब ट्रंप ने युद्ध के जल्द खत्म होने की बात की.

अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत एक सप्ताह में 2.98 डॉलर से बढ़कर 3.45 डॉलर प्रति गैलन हो गई. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग ठप कर दिया है. वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20%, यूरोप के विमानन ईंधन का 30% और वैश्विक एलएनजी का 20% सामान्यतः इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत ने उत्पादन में कटौती की है. टैंकर पूरी तरह भरे खड़े हैं, लेकिन उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है.

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का ऐसे झटके से निपटने का फॉर्मूला काफी सरल है. अगर स्थिति गंभीर होती है, तो तेल की कीमतों में हर 10% की लगातार वृद्धि से वैश्विक मुद्रास्फीति में 0.4% की बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक विकास में 0.15% की कमी आती है. तेल की कीमतों में 50% की वृद्धि हुई है. जापान का निक्केई सूचकांक 7% तक गिर गया. दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 8% तक गिर गया. अमेरिकी शेयर बाजार में लगभग 2% की गिरावट आई. कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी है कि युद्ध “दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर सकता है”. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहने पर तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचाने की धमकी दी है.

IEA का काम

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की स्थापना 1974 में अरब तेल प्रतिबंध के बाद हुई थी, जिसका उद्देश्य इस तरह की आपात स्थितियों में सुरक्षा कवच देना था. इसके 32 सदस्य देशों के पास मिलाकर 1.24 अरब बैरल का सार्वजनिक रणनीतिक भंडार है, साथ ही 60 करोड़ बैरल का औद्योगिक भंडार भी है, जो सदस्य देशों के 140 दिनों से अधिक के शुद्ध आयात को कवर करता है. अमेरिका और जापान के पास कुल मिलाकर लगभग 7 करोड़ बैरल तेल है. सोमवार को जी7 मंत्रियों ने एक समन्वित अभियान के तहत 3 से 4 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर चर्चा की. 52 वर्षों में यह छठी बार होगा जब ऐसा तेल जारी किया जाएगा, जो दिखाता है कि स्थिति कितनी गंभीर है और इस उपाय का इस्तेमाल कितनी कम बार किया जाता है.

अमेरिका में चल रही भू-राजनीतिक त्रासदी के साथ एक घरेलू विडंबना भी दिखाई दे रही है. जीवनयापन की लागत को मुद्दा बनाकर लगातार प्रचार करने वाले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि तेल की कीमतों में उछाल “अमेरिका और विश्व की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत” है और “केवल मूर्ख ही इससे अलग सोचेंगे”. कीन्स ने अपनी पुस्तक ‘ए ट्रैक्ट ऑन मॉनेटरी रिफॉर्म' (1923) में लिखा था कि “अंत में हम सब मर जाएंगे”. वे व्यापक आर्थिक धैर्य के बारे में एक अहम बात कहना चाह रहे थे. एक सप्ताह में पेट्रोल की कीमत में 47 सेंट की वृद्धि के बारे में ट्रंप का लंबे समय के लिए  नजरिया काफी छोटा लगता है.

एक्सियोस से बात करते हुए ट्रंप के एक सलाहकार ने एक दिलचस्प बात कही. “राष्ट्रपति को यह हमला पसंद नहीं है. वे तेल बचाना चाहते हैं. वे इसे जलाना नहीं चाहते.” यह हमला इजरायल द्वारा एक ही शनिवार को ईरान के 30 तेल डिपो पर किया गया था. अमेरिकी सेना ने इसकी कल्पना नहीं की थी. इन डिपो से मीलों दूर तक दिखाई देने वाली आग निकली और तेहरान पर जहरीली काली बारिश हुई. ब्रिटेन में रोम के अभियानों के बारे में लिखते हुए टैसिटस ने वह पंक्ति दर्ज की जो दो हजार साल से दोहराई जाती रही है, “ubi solitudinem faciunt, pacem appellant”, यानी वे बंजर भूमि बनाते हैं और उसे शांति कहते हैं. लुईस कैरोल के उपन्यास ‘थ्रू द लुकिंग-ग्लास' में हम्प्टी डम्प्टी ने शब्दों के अर्थ समझाते हुए कहा: “जब मैं किसी शब्द का उपयोग करता हूं, तो उसका मतलब वही होता है जो मैं चाहता हूं. न ज्यादा, न कम.” जब ट्रंप “अस्थायी” कहते हैं, तो उनका कुछ मतलब होता है. लेकिन बाजार इस बात पर भरोसा करने से इनकार कर रहे हैं कि उनका असली मतलब क्या है.

चीन की दयनीय स्थिति

एक विश्लेषक ने हल्के व्यंग्य के साथ कहा कि चीन “भौतिक रूप से जोखिम में है, लेकिन ज्यादा लचीला भी है”. पहले लचीलेपन की बात करते हैं. चीन के पास अनुमानित 1.1 से 1.4 अरब बैरल का रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार है, जो लगभग 140 दिनों की आयात जरूरत को पूरा कर सकता है. यह एक दशक पहले के स्तर से लगभग दोगुना है.

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन ने फरवरी में बताया कि बीजिंग 2025 तक प्रतिदिन लगभग दस लाख बैरल तेल अपने भंडार में जोड़ रहा था. नोमुरा के मुख्य चीन अर्थशास्त्री का अनुमान है कि होर्मुज से आने वाला तेल चीन की कुल ऊर्जा खपत का केवल 6.6% है. चीन की इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति ने प्रतिदिन दस लाख बैरल से अधिक तेल की अनुमानित मांग को कम कर दिया है. नए यात्री वाहनों की बिक्री में आधे से अधिक अब नई ऊर्जा वाहन हैं. तेल और गैस चीन के ऊर्जा मिश्रण का केवल 4% हिस्सा हैं, जबकि कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में यह 40 से 50% तक है. 2024 में चीन की नई बिजली मांग में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान 80% था. बीजिंग का लक्ष्य 2030 तक कुल ऊर्जा में गैर-जीवाश्म ऊर्जा का हिस्सा 25% तक पहुंचाना है.

ईरान का प्रमुख निर्यात टर्मिनल, खारग द्वीप, जिसकी क्षमता प्रतिदिन सात मिलियन बैरल तेल लोड करने की है और जिसे अमेरिकी और इजरायली जेट विमानों ने जानबूझकर अछूता रखा है, सुपरटैंकरों को लोड करना जारी रखे हुए है. अधिकांश तेल चीन को जाता है. फिलहाल.

लेकिन इसके सामने अन्य चिंताएं भी हैं.

हालांकि इसका प्रभाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है. 2019 से 2024 के बीच चीन ने मध्य पूर्व में सीधे तौर पर 89 अरब डॉलर का निवेश किया (यूरेशिया समूह). 2023 तक मध्य पूर्व में उसका ऋण पोर्टफोलियो दोगुना होकर उसके वैश्विक कुल का 10% हो गया. चीनी बैंक कतर के नॉर्थ फील्ड ईस्ट एलएनजी टर्मिनल को आंशिक रूप से वित्तपोषित कर रहे हैं, जिस पर पिछले सप्ताह संयोग से हमला हुआ था. इजराइल के हाइफा बंदरगाह और संयुक्त अरब अमीरात के खलीफा बंदरगाह पर चीनी कंपनियों के स्वामित्व वाले टर्मिनल हैं और वे उनका संचालन भी करती हैं. चीन इस क्षेत्र में समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाली परियोजनाओं में सबसे बड़ा निवेशक है. उसकी परियोजनाएं सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और इराक में हैं, और अब इन बुनियादी ढांचों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. कोस्को ने जलडमरूमध्य के रास्ते बुकिंग रोक दी है. माएर्स्क ने महत्वपूर्ण मार्गों को निलंबित कर दिया है. बायडू ने अमीरात में रोबोटैक्सी सेवाएं रोक दी हैं. ईरान से 3,000 से अधिक चीनी नागरिकों को निकाला जा चुका है.

2025 में चीन के मध्य पूर्व निर्यात में बाकी दुनिया के निर्यात की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से वृद्धि हुई. संयुक्त अरब अमीरात उसका सबसे तेजी से बढ़ने वाला कार बाजार बन गया और सऊदी अरब में चीनी स्टील की मांग दोगुनी हो गई. मध्य पूर्व को चीन के लिए सबसे बड़ी विकास क्षमता वाला क्षेत्र माना जाता है. ये सभी अब खतरे में हैं.

यह कहना जरूरी है कि ईरान चीन पर उससे कहीं अधिक निर्भर है जितना चीन ईरान पर है. ईरान के 80% से अधिक निर्यात चीन को जाते हैं (केप्लर). होर्मुज जलडमरूमध्य को किसी भी समय के लिए बंद करना ईरान को भी उतना ही नुकसान पहुंचाएगा जितना दूसरों को. ईरान के गैर-तेल व्यापार का लगभग 70% हिस्सा उन बंदरगाहों से होकर गुजरता है जो इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं. 200 डॉलर प्रति बैरल तेल की धमकी एक ऐसी धमकी है जो ईरान खुद को भी दे रहा है.

पुतिन की गोद में?

चीन के लिए इस युद्ध का लंबे समय के नतीजे केवल कीमतों में अचानक बदलाव नहीं हैं, बल्कि वह रणनीतिक दिशा है जिसे अपनाने के अलावा उसके पास ज्यादा विकल्प नहीं है. रूस पहले से ही चीन के कच्चे तेल का लगभग 20% आपूर्ति करता है, जो उसका सबसे बड़ा स्रोत है. चीनी तेल कंपनियां पिछले कुछ हफ्तों से चुपचाप रूसी आपूर्ति बढ़ा रही हैं. सीएनपीसी डालियान में बंद पड़ी एक रिफाइनरी को फिर से शुरू कर रही है, ताकि रूस से आने वाले अधिक तेल को संभाला जा सके. पावर ऑफ साइबेरिया 2 पाइपलाइन, जिसके जरिए रूस की गैस मंगोलिया के रास्ते चीन तक पहुंचेगी, 2030 के शुरुआती वर्षों तक बनने की संभावना है.

कहने की जरूरत नहीं है कि चीन थोड़ी कमजोर स्थिति में है. मॉस्को अब बीजिंग पर रूसी तेल और गैस के लिए अधिक कीमत चुकाने का दबाव डाल सकता है. ईरान पर युद्ध, चाहे उसका सैन्य परिणाम कुछ भी हो, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को रूस के और करीब धकेल सकता है.

1974 में संकट के समय आपूर्ति बनाए रखने के लिए बनाई गई IEA  की भंडार प्रणाली ठीक इसी उद्देश्य के लिए बनाई गई थी. लेकिन यह उस दुनिया के लिए नहीं बनाई गई थी जिसमें तेल के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक सदस्य ही नहीं है, जिसके पास 1.4 अरब बैरल का अपना बफर भंडार है, जिसने आपूर्ति में व्यवधान की तैयारी में दो दशक लगाए हैं, और जो इस आपात स्थिति को अपने पहले से मौजूद गठबंधन को और मजबूत करने के अवसर के रूप में देख सकता है.

वेस्पासियन ने अपने बेटे से कहा था, “पैसा गंधहीन होता है.” बीजिंग में लेखाकार काम में लगे हुए हैं. कम से कम गणित तो उन्हें अच्छी तरह आता है.

(लेखक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ थे)

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