- डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे प्रोजेक्ट फ्रीडम को फिलहाल रोक दिया है
- प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोकने का कारण ईरान के साथ बातचीत में प्रगति और पूर्ण समझौते की संभावना बताई गई है
- ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत असफल होती है तो अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में अपनी उपस्थिति बनाए रखेगी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होर्मुज स्ट्रेट में अपने प्रोजेक्ट फ्रीडम को फिलहाल रोक दिया है. इस प्रोजेक्ट के तहत अमेरिका होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और नाकाबंदी कर रहा था. ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति और पाकिस्तान समेत कई देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ अब पूर्ण और अंतिम समझौते की बात चल रही है.
आखिर ट्रंप ने क्यों रोका प्रोजेक्ट फ्रीडम?
ईरान के साथ फरवरी में शुरू हुए युद्ध में ट्रंप के अंदाज और बयानबाजी ने सबको हैरान कर दिया. एक समय उन्होंने धमकी दी कि वो ईरान की पूरी सभ्यता को खत्म कर देंगे. लेकिन अपने डेडलाइन के कुछ घंटे पहले ही ट्रंप बात से पलट गए और युद्धविराम को राजी हो गए. इसके बाद उन्होंने होर्मुज में नाकाबंदी लगाने की धमकी दी. लेकिन होर्मुज में ईरान का ही कंट्रोल बरकरार रहा. अब ट्रंप ने कह दिया कि वो होर्मुज में प्रोजेक्ट फ्रीडम भी रोक रहे हैं. ट्रंप ने इसका कारण एक ऐसे समझौते को अंतिम रूप देने के अवसर का हवाला दिया है, जिससे ईरान के साथ पिछले दो महीनों से चल रहा युद्ध समाप्त हो जाएगा.
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को रोक दिया जाएगा, क्योंकि ईरान के साथ बातचीत में काफी प्रगति देखने को मिल रही है. उनका कहना है कि बातचीत अब एक पूर्ण और अंतिम समझौते की ओर बढ़ रही है. अगर बातचीत टूट जाती है, तो अमेरिकी सेनाएं मिडिल ईस्ट में ही बनी रहेंगी. लेकिन फिलहाल, पूरा ध्यान एक अंतिम समझौते पर है.

यह घोषणा ट्रंप और उनके प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों के व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम में बोलने के कुछ घंटों बाद की गई. यह कार्यक्रम युवाओं की फ़िटनेस और 'प्रेसिडेंशियल फ़िटनेस टेस्ट' को फिर से शुरू करने पर केंद्रित था. इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने ईरान के साथ चल रहे टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी का बार-बार ज़िक्र किया.
ट्रंप ने कहा ईरान की एयरफोर्स और नेवी हुई तबाह
इस कार्यक्रम के दौरान, ट्रंप ने दावा किया कि हाल के सैन्य अभियानों में ईरान की नौसैनिक और हवाई क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है. ट्रंप ने कहा, "उनके पास अब कोई नौसेना नहीं बची है, वह पूरी तरह से तबाह हो चुकी है. उनकी वायुसेना का भी यही हाल है." अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि इस अभियान ने उस रणनीतिक जलमार्ग पर अमेरिका का नियंत्रण सुनिश्चित कर दिया है.
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पिछले कई हफ्तों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं और वॉशिंगटन ने कई बार चेतावनी दी है कि होर्मुज में कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए. दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल पेट्रोलियम का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है. इसलिए भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े तेल आयातक देशों की नजर भी इस क्षेत्र पर बनी हुई है.
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