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ईरान प्री-वॉर कंडीशन चाह रहा था... ट्रंप के ऑफर को कर दिया 'ना'- पाकिस्तानी पत्रकार ने बता दी अंदर की बात

Why Islamabad Talks Failed: 21 घंटों तक इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने ट्रंप के ऑफर को नहीं माना.

ईरान प्री-वॉर कंडीशन चाह रहा था... ट्रंप के ऑफर को कर दिया 'ना'-  पाकिस्तानी पत्रकार ने बता दी अंदर की बात
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की बातचीत फेल हो गई है.
PTI
  • अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत 21 घंटे तक चली लेकिन किसी समझौते पर नहीं पहुंची
  • अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें स्वीकार नहीं कीं और बातचीत फेल हो गई
  • ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की जिसे अमेरिका ने ठुकरा दिया
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इस्लामाबाद:

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत फेल हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया कि ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानीं. उन्होंने कहा कि ईरान को हमने बेस्ट ऑफर किया था. वहीं, ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने कहा कि अमेरिका ने बहुत ज्यादा मांगें रख दी थीं. जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत फेल होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है.

जेडी वेंस ने कहा कि 'बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं और मुझे लगता है कि यह अमेरिका के मुकाबले ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है. इसलिए हम बिना किसी समझौते पर पहुंचे अमेरिका वापस जा रहे हैं. हमने यह बहुत साफ कर दिया है कि हमारी रेड लाइन्स क्या हैं? हम किन बातों को मानने को तैयार हैं और किन बातों पर हम उनकी बात नहीं मानेंगे. लेकिन उन्होंने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया.'

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आखिर क्यों नहीं बन पाई बात?

ईरान और अमेरिका के बीच शनिवार को 21 घंटों तक इस्लामाबाद में बातचीत हुई. देर रात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ आमने-सामने बैठकर भी बात हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

इसकी वजह क्या रही? इस बारे में पाकिस्तानी पत्रकार नुमान अशफाक मुगल ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से जो ऑफर दिया गया था, उन पर ईरान ने सहमत नहीं हुआ. ईरान प्री-वॉर कंडीशंस चाह रहा था. यानी जंग से पहले वाली स्थिति चाह रहा था.

उन्होंने कहा कि ईरान चाहता था कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका कंट्रोल माना जाए और युद्ध के कारण जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाए. लेकिन अमेरिका ने भी इस बात को नहीं माना.

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ईरान का क्या है कहना?

ईरान की तरफ से अब तक इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि, उसकी सरारी मीडिया प्रेस टीवी का कहना है कि अमेरिका ने बहुत ज्यादा मांगें रख दी थीं. प्रेस टीवी ने कहा कि 'इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत खत्म हो गई है, क्योंकि अमेरिका बहुत ज्यादा मांगें रख रहा था, जिस कारण सहमति नहीं बन पाई.'

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने ईरानी सूत्रों के हवाले से कहा है कि अमेरिका वह सबकुछ मांग रहा था, जो वह युद्ध के दौरान हासिल नहीं कर पाया. ईरानी प्रतिनिधिमंडल के करीबी सूत्रों के हवाले से फार्स न्यूज एजेंसी ने कहा, 'बातचीत के जरिए अमेरिका ने वह सब कुछ मांगा जो वह युद्ध के दौरान हासिल नहीं कर पाया.' 

सूत्र ने कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट, शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम और कई मुद्दों को लेकर अमेरिका की 'महत्वाकांक्षी शर्तें' नहीं मानीं.

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