फ्रांस के इवियान शहर में हुई G-7 मीटिंग से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हुई. कई मायनों में ये मुलाकात यादगार रही. लेकिन क्या आपने इस बात पर गौर किया कि ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी के बाईं ओर ही क्यों बैठे थे. जबकि, इससे पहले ट्रंप ने जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से मुलाकात की थी, तब वह मैक्रों के दाईं ओर बैठे थे.
लेकिन ऐसा क्यों होता है? तो इसका सीधा सा जवाब है- प्रोटोकॉल. अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल है कि द्विपक्षीय बातचीत के दौरान मेजबान (होस्ट) हमेशा मेहमान (गेस्ट) के बाईं ओर बैठता है.
इसे ऐसे समझिए....
इसे एक उदाहरण से समझते हैं. फरवरी 2020 में ट्रंप भारत के दौरे पर आए थे. तब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात भी की थी. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रंप के बाईं तरफ बैठे थे.

लेकिन जब पिछले साल फरवरी में पीएम मोदी अमेरिका गए थे, तब व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान ट्रंप उनके दाईं तरफ बैठे हुए थे.

फ्रांस में G-7 समिट में भी यही देखने को मिला. जब ट्रंप और मैक्रों की मुलाकात हुई तो ट्रंप मैक्रो की दाईं तरफ थे. क्योंकि फ्रांस होस्ट कंट्री है. लेकिन जब ट्रंप और मोदी की मुलाकात हुई तो ट्रंप उनके बाईं तरफ आकर बैठे. क्योंकि यहां भारत गेस्ट कंट्री था.

एक और उदाहरण देखिए... पिछले साल दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे. तब प्रधानमंत्री मोदी उनके बाईं तरफ बैठे थे. ऐसा इसलिए, क्योंकि तब भारत मेजबान था.
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क्यों जरूरी है ये प्रोटोकॉल?
ये प्रोटोकॉल सदियों से चले आ रहे हैं. राजा-महाराजा के समय में भी इस तरह के नियम-कायदे होते थे. फिर 19वीं-20वीं सदी में जब आधुनिक दुनिया बनी तो प्रोटोकॉल को लिख दिया गया.
20वीं सदी की शुरुआत में 'Satow's Guide to Diplomatic Practice' में लिखा गया कि बैठने का प्रोटोकॉल झगड़ा खत्म करने में मदद करता है और सामने वाले का सम्मान भी बनाए रखता है.
डिप्लोमेसी में प्रोटोकॉल बहुत मायने रखता है. अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदे बने हुए हैं, जिनका पालन सभी देश करते हैं. इन्हीं प्रोटोकॉल में तय हुआ कि होस्ट कंट्री का नेता हमेशा गेस्ट के बाईं ओर बैठेगा. ऐसा इसलिए ताकी बातचीत आसानी से हो सके. होस्ट के राइट साइड को हमेशा 'प्लेस ऑफ ऑनर' माना जाता है.
इसी तरह जब बड़ी बैठक होती है, जिसमें कई सारे देश शामिल होते हैं, तो उसके लिए भी सिटिंग अरेंजमेंट प्रोटोकॉल से ही तय होता है. उदाहरण के लिए संयुक्त राष्ट्र की बैठक में लॉटरी से एक देश को चुना जाता है. फिर उसके अल्फाबेट के हिसाब से देश बैठते हैं. हर साल ऐसा किया जाता है, ताकि हमेशा अमेरिका-चीन ही आगे न बैठें.
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