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पाकिस्तान-अमेरिका बुलाते रहे, फिर भी बातचीत के लिए क्यों नहीं आया ईरान? 4 कारण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर को बढ़ा दिया है. सीजफायर तब बढ़ाया जब इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत में आने से ईरान ने मना कर दिया.

पाकिस्तान-अमेरिका बुलाते रहे, फिर भी बातचीत के लिए क्यों नहीं आया ईरान? 4 कारण
ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने से मना कर दिया था.
  • अमेरिका और पाकिस्तान ने ईरान से शांति वार्ता के लिए कई बार संपर्क किया लेकिन ईरान ने बातचीत से इंकार किया है
  • अमेरिका के उपराष्ट्रपति का ईरान दौरा रद्द हो गया क्योंकि ईरान ने दूसरे दौर की बातचीत में हिस्सा नहीं लिया
  • ट्रंप ने सीजफायर को एकतरफा बढ़ा दिया है लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी जारी रखने का फैसला किया है

पाकिस्तान और अमेरिका ने बहुत इंतजार किया लेकिन ईरान बातचीत के लिए नहीं आया. इस्लामाबाद में दूसरे दौर की शांति वार्ता के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तो निकलने भी वाले थे लेकिन ईरान के इनकार के बाद उनका दौरा रद्द हो गया. फिलहाल दोनों के बीच बातचीत होने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एकतरफा सीजफायर को बढ़ाने का ऐलान कर दिया है.

ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान तब किया है, जब सीजफायर के खत्म होने में सिर्फ एक दिन बाकी था. अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को दो हफ्तों का सीजफायर हुआ था. इसकी मियाद खत्म होने ही वाली थी. ट्रंप ने सीजफायर तो बढ़ा दिया है लेकिन होर्मुज की नाकाबंदी नहीं हटाई है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अगर नाकाबंदी हट जाती है तो ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो पाएगा.

वहीं, ईरान का रुख जिस तरह का है, उससे तो लग रहा है कि अगले कुछ दिनों में भी बातचीत होने की कोई उम्मीद नहीं है. मगर ऐसा क्यों है कि ईरान बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हुआ? 

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ईरान क्यों नहीं गया इस्लामाबाद?

  1. अमेरिका ने वादे तोड़ेः इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत के लिए ईरान गया था. दूसरे दौर की बातचीत के लिए भी ईरान तैयार था लेकिन वह माना नहीं. ऐसा क्यों? ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने बताया कि अगले दौर की बातचीत के लिए इसलिए तैयार हो गया था क्योंकि उसकी 10 शर्तों के प्रस्ताव को अमेरिका ने भी मान लिया था. पाकिस्तान ने भी कहा था कि अमेरिका ने इसे मान लिया है, लेकिन इसके तुरंत अमेरिकियों ने अपने वादों को तोड़ना शुरू कर दिया.
  2. अमेरिका की ज्यादा मांगेंः तस्नीम ने बताया कि अमेरिका ने अपने वादे को पूरी तरह से तोड़ते हुए लेबनान में इजरायल पर सीजफायर लागू नहीं किया, जिससे कई दिनों तक बातचीत में रुकावटें आईं. इसके साथ ही इस्लामाबाद में हुई बातचीत के पहले दौर में अमेरिका ने कई ऐसी मांगें रखीं जिनसे असल में शुरुआती शर्तों का उल्लंघन हुआ और इस वजह से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला. लेकिन कुछ दिन बाद अमेरिका को लेबनान में भी सीजफायर लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
  3. होर्मुज पर नाकाबंदीः लेबनान में सीजफायर के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का ऐलान किया. लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने अपनी कथित नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी. इसके बाद इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया.
  4. समझौते में रुकावट डाल रहा अमेरिकाः तस्नीम ने बताया कि अमेरिका ने अपनी मांगों और ईरान के दावों से पीछे हटने से इनकार कर दिया. इस कारण ईरान ने साफ कर दिया कि बातचीत में शामिल होने समय की बर्बादी है, क्योंकि अमेरिका किसी भी उचित समझौते तक पहुंचने में रुकावट डाल रहा है.

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ट्रंप ने बढ़ाया एकतरफा सीजफायर

अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को दो हफ्तों का सीजफायर हुआ था. ये खत्म होने से एक दिन पहले ट्रंप ने सीजफायर को एकतरफा बढ़ा दिया है. ट्रंप का कहना है कि यह सीजफायर तब तक रहेगा, जब तक किसी समझौते पर नहीं पहुंच जाते.

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ट्रंप ने ट्रथ सोशल पर पोस्ट किया, 'ईरान की सरकार बुरी तरह से बंटी हुई है और इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपना हमला तब तक रोककर रखें जब तक कि उनके नेता या प्रतिनिधि कोई एक राय वाला प्रस्ताव लेकर नहीं आ जाते.'

उन्होंने आगे कहा कि 'इसलिए मैंने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वह नाकेबंदी जारी रखे और बाकी सभी मामलों में तैयार रहे. इसलिए मैं सीजफायर को तब तक बढ़ा रहा हूं, जब तक कि उनका प्रस्ताव नहीं आ जाता और बातचीत किसी न किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती.'

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