Who is Iran's Next Supreme Leader: जानिए कौन हैं मुजतबा खामेनेई?
- ईरान के सुप्रीम लीडर अयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोज्तबा अली खामेनेई को पद मिला है- रिपोर्ट
- मोज्तबा की धार्मिक रैंक सुप्रीम लीडर बनने के लिए विवादित है क्योंकि उच्च धार्मिक दर्जा जरूरी माना जाता है
- उनका प्रभाव इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ करीबी संबंधों और राजनीतिक भूमिका के कारण माना जाता है
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हमें बताएं।Who is Iran Next Supreme Leader: अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा अली खामेनेई चर्चाओं में हैं. दरअसल, अब उन्हें इजरायल की तरफ से धमकियां मिल रही है. इजरायल उन्हें जान से मारना चाह रहा है. मुजतबा अली खामेनेई अयातुल्लाह खामेनेई इतने खास क्यों हैं और उनकी पहचान किस रूप में है. चलिए यहां 10 प्वाइंट में जानते हैं.
- मुजतबा का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था. वह अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं. उनके पांच भाई-बहन हैं. वह उस समय बड़े हुए जब उनके पिता ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ बोलने वाले एक प्रमुख धार्मिक नेता बन रहे थे. 1979 की इस्लामी क्रांति ने उनके परिवार की स्थिति पूरी तरह बदल दी और उन्हें नए ईरानी शासन के केंद्र में ला दिया.
- बाद में परिवार तेहरान चला गया. वहां मुजतबा ने अलवी हाई स्कूल में पढ़ाई की, जो शासन से जुड़े लोगों को तैयार करने के लिए जाना जाता है. इसके बाद उन्होंने कोम में रूढ़िवादी धर्मगुरुओं के साथ धार्मिक पढ़ाई की. हालांकि उन्होंने कई दशक तक धार्मिक शिक्षा के माहौल में समय बिताया, लेकिन वह अभी तक अयातुल्लाह के पद तक नहीं पहुंचे हैं.
- ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर का उच्च धार्मिक दर्जा होना अपेक्षित है. इसलिए मुजतबा की धार्मिक रैंक लंबे समय से वरिष्ठ धर्मगुरुओं के बीच बहस का विषय रही है.
- ईरान-इराक युद्ध के दौरान मुजतबा हबीब बटालियन में शामिल थे. वहां उनकी पहचान ऐसे लोगों से हुई जो बाद में ईरान की सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे.
- भले उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही सरकार में कोई आधिकारिक पद संभाला, लेकिन अंदरूनी सूत्र लंबे समय से उन्हें सुप्रीम लीडर के कार्यालय में एक प्रभावशाली व्यक्ति और “द्वारपाल” के रूप में बताते रहे हैं. उनकी तुलना अक्सर उस भूमिका से की जाती है जो धर्मगुरु अहमद खुमैनी ने ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर रूहोल्लाह खुमैनी के समय निभाई थी.
- विश्लेषकों का मानना है कि उनका प्रभाव मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ उनके करीबी संबंधों से आता है. यह संगठन ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा नीति में बहुत ताकतवर माना जाता है.
- 2019 में अमेरिका ने मुजतबा पर प्रतिबंध लगाए थे. अमेरिका का आरोप था कि अली खामेनेई ने अपनी कुछ शक्तियां अपने बेटे को सौंप दी थीं और वह बिना किसी सार्वजनिक जवाबदेही के आधिकारिक रूप से फैसले लेने लगे थे.
- सुधारवादी नेताओं और कुछ विदेशी सरकारों ने मुजतबा पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई का समर्थन करने का आरोप भी लगाया है. हालांकि ईरानी सरकार इन आरोपों को हमेशा खारिज करती रही है.
- ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार मुजतबा के पास बड़े पैमाने पर निवेश का नेटवर्क है, लेकिन उनकी कुल संपत्ति कितनी है यह सार्वजनिक नहीं किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने दुनिया के कई देशों में संपत्तियों का बड़ा नेटवर्क बनाया और अरबों डॉलर की रकम पश्चिमी बाजारों में निवेश की.
- ध्यान देने वाली बात यह है कि अली खामेनेई ने अपने संभावित उत्तराधिकारियों के रूप में तीन वरिष्ठ धर्मगुरुओं का नाम सोचा था और उनमें उनके बेटे का नाम शामिल नहीं था. इसलिए अगर पिता के बाद बेटा सुप्रीम लीडर बनता है तो यह इस्लामी गणराज्य ईरान की उस मूल सोच को चुनौती देगा जिसमें वंशानुगत शासन को अस्वीकार किया गया था. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वरिष्ठ धर्मगुरु और सुरक्षा तंत्र मुजतबा के समर्थन में एकजुट होते हैं या नहीं. इसी से तय होगा कि सुप्रीम लीडर के रूप में उनका चयन स्थायी रहेगा या फिर इसके खिलाफ अंदरूनी विरोध खड़ा होगा.
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