विज्ञापन

ईरान‑US के बीच आखिर चल क्या रहा है? पाकिस्तान में दूसरे दौर के लिए पहुंच रहे दोनों देशों के डेलिगेशन, लेकिन नहीं होगी आमने‑सामने की बातचीत

ईरान‑अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान मध्यस्थ बनकर उभरा है. ईरान ने सीधी वार्ता से इनकार किया, जबकि अमेरिका पाक में दूसरे दौर की तैयारी कर रहा है.

ईरान‑US के बीच आखिर चल क्या रहा है? पाकिस्तान में दूसरे दौर के लिए पहुंच रहे दोनों देशों के डेलिगेशन, लेकिन नहीं होगी आमने‑सामने की बातचीत
  • ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ कोई सीधे बैठक नहीं होगी, शर्तें पाकिस्तान के माध्यम से पहुंचाई जाएंगी.
  • अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि बातचीत की नई शुरुआत हो रही है, विशेष दूत पाकिस्तान जा रहे हैं.
  • दूसरे दौर की वार्ता में शीर्ष नेता शामिल नहीं होंगे, बातचीत बैक‑चैनल और ग्राउंडवर्क पर केंद्रित रहेगी.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई हफ्तों से जारी तनातनी अब नए कूटनीतिक मोड़ पर है. सार्वजनिक बयानों में जहां तेहरान सीधे अमेरिका से बातचीत से इनकार कर रहा है, वहीं पर्दे के पीछे पाकिस्तान की मध्यस्थता से संपर्क और संवाद की प्रक्रिया तेज होती दिख रही है. इसी विरोधाभास में दोनों देश पाकिस्तान में संभावित दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी करते नजर आ रहे हैं.

पाकिस्तान बना केंद्र

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे. वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख सैयद आसिम मुनीर से मुलाकात करने वाले हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने स्वयं ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया, जिससे साफ है कि इस्लामाबाद इस पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर गंभीरता से ले रहा है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाएई ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बैठक तय नहीं है. उनके मुताबिक ईरान की बात और शर्तें वॉशिंगटन तक पाकिस्तान के माध्यम से पहुंचाई जाएंगी. तेहरान इस पूरी प्रक्रिया को 'पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयास' के तौर पर पेश कर रहा है, न कि पारंपरिक द्विपक्षीय वार्ता के रूप में.

अमेरिका की अलग तस्वीर

इसके उलट, अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि व्यावहारिक रूप से बातचीत की नई शुरुआत हो रही है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर शनिवार को पाकिस्तान रवाना होंगे.

लेविट के मुताबिक, ईरान ने ही अमेरिका से संपर्क कर 'इन‑पर्सन बातचीत' का अनुरोध किया था. पहली प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये दूत राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को रिपोर्ट करेंगे. हालांकि जेडी वेंस स्वयं पाकिस्तान नहीं जाएंगे.

बड़े नाम नहीं रहेंगे मौजूद

दिलचस्प बात यह है कि दूसरे दौर में US उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल नहीं होंगे. पहले दौर में ईरानी टीम का नेतृत्व करने वाले मोहम्मद बाकर कालिबाफ भी मौजूद नहीं रहेंगे. इससे साफ संकेत मिलता है कि यह दौर औपचारिक शिखर वार्ता से ज्यादा ग्राउंडवर्क और बैक‑चैनल बातचीत पर केंद्रित रहेगा.

यह भी पढ़ें- ट्रंप ईरान से बातचीत के लिए स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को भेज रहे हैं पाकिस्तान: रिपोर्ट

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा रोड़ा

ईरान‑US मतभेदों की जड़ अब भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य है. ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले ईरानी बंदरगाहों और शिपिंग पर लगाई गई नाकाबंदी हटाए. अमेरिका की मांग है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस और सत्यापित आश्वासन दे और जलडमरूमध्य को खोले.

इस समय हालात यह हैं कि रोज़ाना 130 जहाजों की जगह केवल 5 जहाज गुजर रहे हैं. ईरान ने दो बड़े कार्गो जहाज जब्त कर अपनी पकड़ दिखाई है. अमेरिका ने जवाब में ईरानी शिपिंग पर अलग नाकाबंदी लगा रखी है.

यह भी पढ़ें- ईरान के विदेश मंत्री पहुंचे पाकिस्तान पर अमेरिका से वार्ता के लिए नहीं, जानिए क्या है मकसद

ट्रंप का ईरान को साफ संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है. उनका साफ संदेश है कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम छोड़ना होगा. अंतरराष्ट्रीय तेल परिवहन को बाधा‑मुक्त करना होगा. ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया है कि समझौता होने तक सैन्य और आर्थिक दबाव जारी रहेगा. पेंटागन का कहना है कि अमेरिका डील के लिए हड़बड़ी में नहीं है, लेकिन ईरान के पास अच्छा सौदा करने का मौका है.

टकराव भी, बातचीत भी

कुल मिलाकर स्थिति यह है कि बयानबाज़ी में टकराव है. कूटनीति में हलचल है और पाकिस्तान इस पूरे खेल का केंद्रीय मंच बन चुका है. ईरान औपचारिक रूप से अमेरिका से दूरी बनाए रखे हुए है, जबकि अमेरिका इसे वार्ता की वापसी के रूप में पेश कर रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस्लामाबाद में होने वाली गतिविधियां वास्तव में गतिरोध तोड़ती हैं या सिर्फ एक और लंबा कूटनीतिक दौर शुरू होता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com