US Iran War Updates: फरवरी महीने की आखिरी तारीख को अमेरिका और इजरालय ने मिलकर ईरान के खिलाफ जंग शुरू की थी. जंग के एक हफ्ते के अंदर ही सवाल उठने लगे थे कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसी जंग में फंस चुके हैं जिसमें घुसने का तो फैसला उनका था लेकिन उससे बाहर आना उनके हाथ में नहीं. अमेरिका को जंग में उलझे आज 54 दिन हो चुके हैं लेकिन स्थिति ठीक वैसी ही नजर आ रही है. एक्सपर्ट का मानना है कि अब अमेरिका के साथ इस जंग में ईरान का सबसे बड़ा हथियार वक्त या उसका सब्र है. चलिए समझते हैं क्यों.
जंग से निकलने का रास्ता खोजते ट्रंप
ईरान के साथ सीजफायर को अनिश्चित समय तक बढ़ाकर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसा लगता है कि महंगे युद्ध से निकलने का रास्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन तेहरान शायद उन्हें जीत नहीं देना चाहता. ट्रंप ने होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी बनाए रखने पर जोर दिया है, जबकि ईरान कह रहा है कि किसी भी समझौते से पहले यह नाकाबंदी खत्म होनी चाहिए.
ट्रंप वैसे तो अपने बिजनेसमैन दोस्तों की टीम के साथ जल्दी बड़े समझौते कराने का दावा करते रहे हैं, लेकिन उनके लिए ईरान के साथ बातचीत करने का बिल्कुल उल्टा अनुभव रहा है. ईरान के वार्ताकारों ने दिखा दिया है कि वे बहुत सोच-समझकर, सख्ती से और लंबे समय तक मेज पर भी लड़ने के लिए तैयार हैं. ट्रंप ने पाकिस्तान में दूसरी दौर की बातचीत की पूरी तैयारी कर ली थी, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस्लामाबाद भेजा जाना था. लेकिन ईरान ने आने की पुष्टि नहीं की और वेंस घर पर ही रहे.
ईरान को पता है- वक्त उनकी ओर है
'नुकसान झेलने के बावजूद, ईरान की इस्लामिक सरकार गिरने वाली नहीं है और वह सरेंडर नहीं करेगी'- एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार यह बात डैनी सिट्रिनोविच ने कही, जो पहले इजरायल की खुफिया एजेंसी में थे और अब तेल अवीव यूनिवर्सिटी और अटलांटिक काउंसिल से जुड़े हैं. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है ट्रंप इस युद्ध से थक चुके हैं और समझते हैं कि इसकी कीमत और बढ़ेगी, कम नहीं होगी.”
लेकिन ईरान के नेता ट्रंप पर भरोसा नहीं करते. जंग से पहले उनके साथ बातचीत चल ही रही थी कि कुछ दिन बाद अमेरिका और इजरायल ने हमला कर दिया. ऐसा ही पिछले साल जून में भी हुआ था. ट्रंप और ईरान के नेता दोनों ही पीछे हटने की छवि से बचना चाहते हैं. ट्रंप ने अभी तक नाकाबंदी कम करने का कोई संकेत नहीं दिया है. लेकिन लीवरेज या यूं कहें कि पत्ते ईरान के हाथ में दिख रहे हैं. ईरान तो पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहा है लेकिन उसे पता है कि जबतक वो होर्मुज बंद रखेगा अमेरिकी जनता महंगाई की मार झेलेगी और पूरी दुनिया तेल-गैस संकट से जूझेगी. वो बस जंग को इतना लंबी जाने देने को तैयार है कि अमेरिकी जनता का सब्र खत्म होने लगे, ट्रंप पर दबाव इतना बढ़ जाए कि वे खुद पीछे हटने को तैयार हो जाएं.
सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी में सीनियर फेलो सीना तूस्सी ने कहा कि ट्रंप के पास दो विकल्प हैं- नाकाबंदी हटाना, जिससे ईरान की ताकत बढ़ेगी, या इसे जारी रखना, जिससे सीजफायर खत्म होने और जंग फिर से शुरू होने का खतरा है. उन्होंने कहा, “तेहरान (ईरानी शासन) में आम सोच यह है कि समय उनके पक्ष में है और लंबा संघर्ष अमेरिका और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर ज्यादा बोझ डालेगा.”
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