- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड परियोजना की घोषणा की थी
- गोल्डन डोम मिसाइल शील्ड तीन साल में तैयार होगा और अंतरिक्ष से भी मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगा
- इस प्रणाली की कुल लागत 175 बिलियन डॉलर बताई गई है, जिसमें जमीनी और अंतरिक्ष आधारित सेंसर शामिल होंगे
गोल्डन डोम नाम कुछ सुना-सुना सा है. पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अभी ये बनकर तैयार भी नहीं हुआ है. नाम सुना हुआ इसलिए लग रहा है कि इजरायल के डिफेंस सिस्टम आयरन डोम की तर्ज पर अमेरिका ने इसका नाम बनने से पहले ही गोल्डन डोम रख दिया है. दोबारा सत्ता में आने से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप हर चुनावी रैली में वादा करते थे कि वो एक ऐसा डिफेंस सिस्टम बनाएंगे, जिसकी काट पूरी दुनिया में किसी के पास नहीं होगी.
कब से बन रहा और कब तक बन जाएगा
फिर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोल्डन डोम डिफेंस शील्ड प्रोजेक्ट की घोषणा कर दी. ट्रंप ने कहा, 'हम गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड के बारे में बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा कर रहे हैं. ये ठीक वैसा ही है जैसा हम चाहते हैं. ये एक गेमचेंजर साबित होने वाला. गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड अमेरिका द्वारा अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला पहला हथियार होगा. इसको तैयार करने में तीन साल का समय लग सकता है. एक बार पूर्ण रूप से निर्मित हो जाने पर, गोल्डन डोम मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगा, भले ही वे दुनिया के अन्य भागों से प्रक्षेपित की जाएं और भले ही वे अंतरिक्ष से प्रक्षेपित की जाएं.'

गोल्डन डोम कैसा होगा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस डोम की कुल कीमत 175 बिलियन डॉलर बताई. कांग्रेस के बजट कार्यालय ने अनुमान लगाया था कि सीमित संख्या में अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए अंतरिक्ष आधारित इंटरसेप्टर की लागत 20 वर्षों में 161 बिलियन डॉलर से 542 बिलियन डॉलर के बीच होगी. गोल्डन डोम एक जमीनी और अंतरिक्ष आधारित मिसाइल शील्ड सिस्टम होगा, जो उड़ान के कई चरणों में मिसाइलों का पता लगाएगा. साथ ही उन्हें ट्रैक करेगा और रोकेगा. संभावित रूप से उन्हें उड़ान भरने से पहले नष्ट कर देगा या उन्हें हवा में ही रोक देगा. यह जमीन, समुद्र और अंतरिक्ष में अगली पीढ़ी की तकनीकों को तैनात करेगा, जिसमें अंतरिक्ष आधारित सेंसर और इंटरसेप्टर शामिल हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सरकार ने बताया है कि गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम में चार लेयर शामिल होंगी. इसमें से एक लेयर सैटेलाइट आधारित होंगी और तीन जमीन पर. जो तीन लेयर जमीन से एक्टिव होंगे, वे महाद्वीपीय यूएस, अलास्का और हवाई में स्थित 11 छोटी दूरी की बैटरियों (मिसाइल) के साथ लैस होंगे.
चीन-रूस ने जताई नाराजगी
इस गोल्डन डोम का असर ये है कि चीन और रूस ने अपने नये संयुक्त बयान में अमेरिकी गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम और क्षेत्र में सैन्य तैनाती को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है. यह बयान बीजिंग और वाशिंगटन के बीच चीन-अमेरिकी संबंधों को स्थिर करने के उद्देश्य से हुए शिखर सम्मेलन के कुछ ही दिनों बाद आया है. बुधवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शिखर सम्मेलन के बाद जारी एक संयुक्त बयान में दोनों देशों ने अमेरिका पर गोल्डन डोम परियोजना के माध्यम से "रणनीतिक स्थिरता के लिए स्पष्ट खतरा" पैदा करने का आरोप लगाया. क्रेमलिन द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली गोल्डन डोम परियोजना के कार्यान्वयन से "अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर नकारात्मक परिणाम" होंगे.

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परमाणु धमकी पर भी चेताया
संयुक्त बयान में, बीजिंग और मॉस्को ने अमेरिका का नाम लिए बिना, परमाणु हथियार रखने वाले कुछ देशों द्वारा की जा रही उकसावे वाली कार्रवाइयों के खिलाफ चेतावनी दी. दोनों देशों ने परमाणु हथियार नियंत्रण मुद्दों पर संवाद बनाए रखने पर भी सहमति जताई. बयान में कहा गया, "[चीन और रूस] परमाणु हथियार रखने वाले देशों द्वारा अन्य परमाणु हथियार रखने वाले देशों के खिलाफ किसी भी प्रकार की उकसावे वाली और शत्रुतापूर्ण कार्रवाई की निंदा करते हैं, जो उनके मूलभूत सुरक्षा हितों को कमजोर करती है और रणनीतिक जोखिमों को बढ़ाती है."
इसमें "कुछ परमाणु हथियार रखने वाले देशों" पर अन्य परमाणु शक्तियों के निकट सैन्य अवसंरचना और हथियार तैनात करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया गया. इसमें कहा गया कि ये देश, अपने सहयोगियों के साथ मिलकर, जमीन पर आधारित लघु और मध्यम दूरी की मिसाइलें तैनात कर रहे हैं, जिससे अन्य परमाणु हथियार रखने वाले देशों को खतरा है और गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं. ऐसा भी नहीं है कि रूस और चीन ने पहली बार गोल्डन डोम पर आपत्ति जताई हो, बल्कि पहले भी ऐसा कर चुके हैं. उत्तर कोरिया भी इस पर नाराजगी जता चुका है. जाहिर है गोल्डन डोम में कुछ तो ऐसा है कि चीन-रूस नहीं चाहते कि अमेरिका इसे बनाए.
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