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क्या होती है सॉलिड फ्यूल मिसाइल, जिससे ईरान ने किया इजरायल पर हमला; दुश्मन के लिए कितनी खतरनाक?

India-Israel War: सॉलिड फ्यूल से चलने वाली मिसाइलें दुश्मन के लिए बहुत ही खतरनाक होती हैं. दागे जाने से ठीक पहले इसमें फ्यूल भरने की जरूरत नहीं होती है. इनकी स्पीड बहुत तेज होती है. इसको लंबे समय तकरना आसान होता है.

क्या होती है सॉलिड फ्यूल मिसाइल, जिससे ईरान ने किया इजरायल पर हमला; दुश्मन के लिए कितनी खतरनाक?
सॉलिड फ्यूल मिसाइल के बारे में डिटेल में जानें. (सांकेतिक फोटो)
  • इजरायल और अमेरिका को निशाना बनाने के लिए ईरान सॉलिड फ्यूल मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है.
  • एयरोस्पेस डिवीजन ने इजरायल के उत्तरी हिस्सों को नए खैबर-शेकन सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों से निशाना बनाया
  • सॉलिड फ्यूल मिसाइलें बहुत ही खतरनाक होती हैं. दागे जाने से ठीक पहले इसमें फ्यूल भरने की जरूरत नहीं होती
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मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है. जंग के का आज 9वां दिन है, लेकिन शांति के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं. ईरान भी इजरायल और अमेरिका के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है और जमकर मिसाइलें और ड्रोन दाग रहा है. इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 के तहत 27वीं लहर के हमले शरू कर दिए हैं. इस दौरान एयरोस्पेस डिवीजन ने इजरायल के उत्तरी हिस्सों को नए खैबर-शेकन सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों से निशाना बनाया है. इजरायल पर हमलों के लिए ईरान सोलिड फ्यूल मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल कर रही है. इस बीच सभी के जहन में ये सवाल चल रहा है कि आखिर सॉलिल फ्यूल वाली मिसाइल होती क्या है. इसके बारे में डिटेल में जानें.

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क्या होती हैं सॉलिड फ्यूल मिलाइलें?

सॉलिड फ्यूल से चलने वाली मिसाइलें दुश्मन के लिए बहुत ही खतरनाक होती हैं. दागे जाने से ठीक पहले इसमें फ्यूल भरने की जरूरत नहीं होती है. इनकी स्पीड बहुत तेज होती है. इसको लंबे समय तकरना आसान होता है.इसी वजह से इसको दागने में भी ज्यादा दिक्कत नहीं होती. इस तरह की मिसाइलों को दागने से पहले ज्यादा तैयारी की जरूरत भी नहीं होती. यही वजह है कि युद्ध में इसका इस्तेमाल खूब किया जाता है. सॉलि फ्यूल मिसाइलों को पकड़ पाना भी मुश्किल होता है.

  • मिनटों में लॉन्च हो जाती है 
  • स्टोर और हैंडल करना आसान होता है
  • ठोस फ्यूल के इस्तेमाल की वजह से ज्यादा पेलोड ले जाने में सक्षम
  • इन मिसाइलों की स्पीड बहुत तेज होती है
  • लंबी दूरी के लिए होता है इन मिसाइलों का इस्तेमाल

पहली बार कब हुआ सॉलिड फ्यूल मिसाइल का इस्तेमाल?

पहली बार सॉलिड फ्यूल मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल 1970 में सोवियत संघ ने किया था. इसके बाद फ्रांस ने भी इसी तकनीक की मदद से मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल सिस्टम एस-3 यानी SSBS को विकसित किया था. वहीं चीन ने सॉलिड फ्यूल वाली मिसाइलों का 1990 में परीक्षण किया था. उत्तर कोरिया केपास भी ये तकनीक है. ईरान भी इजरायल के खिलाफ युद्ध में सॉलिड फ्यूल मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है.
 

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