- हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊद अरब के जहाजों की घेराबंदी करके युद्ध का दायरा बढ़ाने की धमकी दी है
- बाब अल-मंदेब लाल सागर का प्रवेश द्वार यानी एंट्री गेट है. यहां से दुनिया का लगभग 12% व्यापार होता है
- अगर हूती लाल सागर में नाकेबंदी कर देता है तो अब सऊदी का रोजाना का लगभग 25 लाख बैरल तेल व्यापार खतरे में पड़ेगा
अभी होर्मुज में तनाव बढ़ ही रहा है, हर रोज तेल जहाजों पर मिसाइल हमले हो रहे हैं, अमेरिका और ईरान दोनों ने नाकेबंदी कर रखी है. दुनिया फिर से तेल संकट की ओर मुंह बाए खड़ी है. ऐसे में यमन में बैठे ईरान के सहयोगी हूती ने एक ऐसा ऐलान कर दिया है कि पूरा ग्लोबल तेल मार्केट डर गया है. हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊद अरब के जहाजों की घेराबंदी करके युद्ध का दायरा बढ़ाने की धमकी दी. हूती के लड़ाके वही करने की धमकी दे रहे हैं जो वह पहले कर चुके हैं- वे सऊदी जहाजों को लाल सागर के दक्षिणी एंट्री प्वाइंट, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देंगे. हूती सऊदी की नब्ज दबाने को तैयार हैं लेकिन बड़ा झटका एशिया को लग सकता है. चलिए सब समझाते हैं.
होर्मुज बंद और ऐसे में सऊदी की नब्ज है बाब अल-मंदेब
बाब अल-मंदेब लाल सागर का प्रवेश द्वार यानी एंट्री गेट है. यहां से दुनिया का लगभग 12% व्यापार होता है. दुनिया का एक-चौथाई कंटेनर व्यापार इसी 32-किलोमीटर चौड़े समुद्री रास्ते से होकर स्वेज नहर तक जाता है. हूती विद्रोहियों ने यहां पहले भी जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने की अपनी क्षमता दिखाई है. गाजा में इजरायल-हमास युद्ध के दौरान उन्होंने महीनों तक जहाजों को निशाना बनाया और 100 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए थे.
अमेरिका के टेक्सास स्थित रिस्टैड एनर्जी के अनुसार अगर हूती लाल सागर में नाकेबंदी कर देते हैं तो अब सऊदी का रोजाना का लगभग 25 लाख बैरल तेल का व्यापार खतरे में पड़ सकता है. बाब अल-मंदेब से आवाजाही में रुकावट आने पर शिपिंग कंपनियों को अपने जहाज दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजने पड़ते हैं, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है. अमेरिकी सरकार पहले भी कह चुकी है कि केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाने से सऊदी अरब से अमेरिका तक की यात्रा में लगभग 4,345 किलोमीटर की दूरी बढ़ जाएगी.

सऊदी अरब के लिए इस नौसैनिक नाकेबंदी का मतलब है कि वे अब पूर्वी एशिया को तेल निर्यात करने के लिए बाब अल-मंदेब का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इसका सऊदी अरब की सालाना तेल आय पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा. इसका मतलब यह भी है कि कोई भी देश या शिपिंग कंपनी सऊदी अरब को निर्यात नहीं कर पाएगी. अगर वे निर्यात करने की कोशिश करते हैं या बाब अल-मंदेब के जरिए सऊदी अरब के साथ व्यापार करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें बाब अल-मंदेब पर ही रोक दिया जाएगा और वापस भेज दिया जाएगा. अगर किसी ने नाकेबंदी को तोड़ते हुए गुजरने की कोशिश की तो हूती उन जहाजों पर हमला कर देगा.
सबसे बड़ा झटका एशिया को क्यों लगेगा?
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के सीनियर फेलो नोआम रायदान ने कहा कि अगर हूती विद्रोही लाल सागर में सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी करते हैं, तो एशिया को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. सऊदी अरब ने लाल सागर के यानबू बंदरगाह पर टैंकरों में जो कच्चा तेल और उससे जुड़े फ्यूल भरे हैं, उनमें से ज्यादातर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होते हुए भारत, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन की रिफाइनरियों तक भेजे गए हैं.
रायदान ने कहा कि हूती नाकेबंदी की स्थिति में सऊदी अरब को अपने शिपमेंट का रास्ता बदलकर स्वेज नहर और दक्षिणी अफ्रीका के रास्ते भेजना होगा. रायदान ने कहा कि इससे ट्रांसपोर्टेशन की लागत पर और दबाव पड़ेगा खासकर एशियाई बाजार के लिए.
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