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हूतियों की एंट्री से और भड़का तेल संकट, लाल सागर में सऊदी जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान

हूती कह रहे हैं कि वे सऊदी जहाजों को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देंगे. यह लाल सागर का दक्षिणी एंट्री प्वाइंट है. समझिए दुनिया में तेल संकट और गहराने का खतरा क्यों है.

हूतियों की एंट्री से और भड़का तेल संकट, लाल सागर में सऊदी जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान
US Iran War: हूती ने किया लाल सागर में सऊदी जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान (फोटो- AFP)
  • ईरान के सहयोगी हूती ने कहा कि वे लाल सागर में नाकेबंदी करेंगे और सऊदी अरब के जहाजों की आवाजाही रोक देंगे
  • अगर हूतियों ने ऐसा किया तो इससे दुनिया में तेल संकट और गहरा जाएगा
  • अबतक अमेरिका का सहयोगी सऊदी अरब अपने कुछ एक्सपोर्ट को लाल सागर के रास्ते भेजने में कामयाब रहा है

अमेरिका और ईरान के बीच फिर छिड़ी जंग ने होर्मुज के पानी को खौला दिया है और दुनिया एक बार फिर तेल संकट की ओर देख रही है. इस बीच मिडिल ईस्ट में कुछ ऐसा भी हुआ है तो इस तेल संकट को और भड़का सकता है. यमन में ईरान के समर्थन वाले हथियारबंद गुट, हूती ने सोमवार को कहा कि वे लाल सागर में नाकेबंदी करेंगे और सऊदी अरब के जहाजों की आवाजाही रोक देंगे. इस धमकी से मिडिल ईस्ट के संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने का खतरा पैदा हो गया है और अस्थिर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव बढ़ गया है.

यह घोषणा ऐसे समय में की गई जब पूरी दुनिया तनावपूर्ण स्थिति में यह देख रही है कि क्या अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच बमबारी का दौर और बढ़ेगा. सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात भी दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए हमले किए. एक तरफ ईरान ने उन देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, और इसके जवाब में अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान पर हमले किए.

हूतियों का प्लान क्या है?

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी के कारण ग्लोबल फ्यूल सप्लाई कम हो गई है और कीमतें बढ़ गई हैं. ऐसे में अमेरिका का सहयोगी सऊदी अरब अपने कुछ एक्सपोर्ट को लाल सागर के रास्ते भेजने में कामयाब रहा है. लेकिन अब हूती कह रहे हैं कि वे सऊदी जहाजों को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देंगे. यह लाल सागर का दक्षिणी एंट्री प्वाइंट है. अगर हूतियों ने ऐसा किया तो इससे दुनिया में तेल संकट और गहरा जाएगा.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार हूती सेना के प्रवक्ता याह्या सरी ने सोमवार को टीवी पर दिए भाषण में कहा कि यह कदम यमन पर सऊदी अरब की लगातार घेराबंदी के जवाब में उठाया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार जानकारों का कहना है कि यह बात शायद घरेलू जनता को ध्यान में रखकर कही गई है, और हूती की यह रणनीति ईरान के हितों से गहराई से जुड़ी हुई हैं.

बता दें कि हालिया तनाव की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल किसका होगा, इससे जुड़ी थी. लेकिन अब यह हमलों और जवाबी हमलों के एक ऐसे चक्र में बदल गया है जिसमें शुक्रवार से कम से कम तीन अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं, फारस की खाड़ी के अरब देशों पर हमले हुए हैं और ईरान तथा अमेरिका के सहयोगी देश कुवैत में अहम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. सोमवार को अमेरिकी सेना ने कबूल किया कि पिछले दो हफ्तों में युद्ध में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर लगभग 100 हो गई है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान को चेतावनी दी कि मारे गए हर अमेरिकी सैनिक के लिए उसे "कई गुना ज्यादा" कीमत चुकानी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि यह निर्देश अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को दे दिया गया है.

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