- वेनेजुएला में दो विनाशकारी भूकंपों के बाद 1430 से अधिक लोगों की मौत और हजारों लोग घायल हुए हैं
- मलबे में दबे 11 साल के लड़के को तीन दिन बाद जीवित बचाए जाने से परिवारों में उम्मीद जगी है
- अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस बच्चे के बचने की जानकारी साझा कर राहत अभियान की स्थिति बताई
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका करि सके जो जग बैरी होय." ये दोहा वेनेजुएला में चरितार्थ हुआ. दो विनाशकारी भूकंप के बाद वेनेजुएला में 1430 लोगों की मौत हो चुकी है. हजारों लोग घायल हैं और दस हजार से ज्यादा लोग लापता हैं. मगर, ऊपरवाला चाहे तो क्या नहीं हो सकता. एक 11 साल के लड़के को शनिवार को मलबे से जीवित बचा लिया गया. ये लड़का तीन दिनों तक भूकंप के कारण गिरी इमारत के मलबे के नीचे दबा हुआ था. इस लड़के के बचने से लापता परिवारों को ढांढस मिली है कि शायद उनके अपने भी अभी मलबे के नीचे जिंदा हों और उन्हें भी बचा लिया जाए.
अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज हुईं भावुक
इस बच्चे के बचने की खुशी वेनेजुएला में इतनी थी कि खुद अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने शनिवार को यह जानकारी दी. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "कुछ मिनट पहले काराबालेडा में एक 11 साल के लड़के को जिंदा बचाया गया. इस समय, हर जिंदगी वेनेजुएला के लिए उम्मीद की किरण है." उन्होंने इसके साथ बचाव अभियान का एक वीडियो भी शेयर किया. उन्होंने बताया कि चौबीस देशों ने 521 टन राहत सामग्री, मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए प्रशिक्षित कुत्तों वाली 86 टीमें और 2,700 से ज़्यादा खोज और बचाव कर्मी भेजे हैं. संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख टॉम फ्लेचर ने शुक्रवार को AFP को बताया कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है और 50,000 से ज्यादा लोग लापता हैं. जीवित बचे लोगों की तलाश के दौरान स्थानीय लोगों ने बुधवार को आए दो भूकंपों में गिरी इमारतों के मलबे को हटाने की पुरजोर कोशिशें कीं.
देखें वीडियो
Hace pocos minutos fue rescatado con vida un niño de 11 años en Caraballeda. En estas horas cada vida es esperanza para Venezuela. pic.twitter.com/Pjj5ETaaYe
— Delcy Rodríguez (@delcyrodriguezv) June 28, 2026
जानकारों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद जीवित लोगों को खोजने के लिए शुरुआती 72 घंटे बहुत अहम होते हैं. इसके बाद खोज का मकसद सिर्फ शवों को निकालना रह जाता है. वेनेजुएला के अल साल्वाडोर में एक बचावकर्मी, जिन्होंने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया, ने कहा: "इस समय, शायद ज्यादातर लोग मर चुके होंगे. ईश्वर की मर्जी हुई तो शायद हमें कुछ लोग जीवित मिल जाएं."
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