- 2025 में भारत में अमेरिकी विजिटर वीजा इंटरव्यू के लिए औसतन 346 दिन इंतजार करना पड़ा, ऑडिट में बात आई सामने
- भारत में वीजा की मांग स्टाफ की उपलब्धता से कहीं अधिक होने के कारण लंबा इंतजार करना पड़ा है
- चीन और ब्राजील की तुलना में भारत में विजिटर वीजा के लिए इंतजार का समय बहुत अधिक है
अपनों से मिलने विजिटर वीजा पर अमेरिका जाना एक ऐसी लड़ाई जैसी हो गई है जिसमें सिर्फ इंतजार ही इंतजार है. अमेरिका का विजिटर वीजा लेने के लिए भारतीय आवेदकों को पिछले साल सबसे लंबा इंतजार करना पड़ा है. अमेरिका की एक सरकारी ऑडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. यह रिपोर्ट सोमवार को अमेरिकी समय के अनुसार जारी की गई. इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में भारत में अमेरिकी विजिटर वीजा के इंटरव्यू के लिए औसतन 346 दिन का इंतजार करना पड़ा.
यह ऑडिट अमेरिकी संस्था गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (जीओए) ने किया है.
रिपोर्ट में क्या पता चला?
गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि भारत में वीजा की मांग, दूतावास में मौजूद स्टाफ की संख्या से कहीं ज्यादा बढ़ गई है. 346 दिन का यह आंकड़ा इंटरव्यू की तारीख मिलने का पिछला औसत है. इसका मतलब यह नहीं है कि इंटरव्यू के बाद वीजा पर फैसला लेने में इतना समय लगता है, और न ही इसका मतलब यह है कि आज आवेदन करने वाले हर व्यक्ति को इतना ही इंतजार करना पड़ेगा.
दूसरे देशों से भारत की तुलना
दूसरे बड़े देशों की तुलना में भारत की स्थिति काफी खराब है. चीन में विजिटर वीजा इंटरव्यू का औसत इंतजार 34 दिन और ब्राजील में 32 दिन था. मेक्सिको में प्रति अधिकारी आवेदनों की संख्या भारत के बराबर ही थी, वहां इंतजार 283 दिन रहा. सबसे ज्यादा इंतजार वाले 10 देशों की लिस्ट में भारत सातवें नंबर पर था.
ऑडिट टीम ने नई दिल्ली के अलावा मेक्सिको सिटी, बीजिंग और साओ पाउलो का भी दौरा किया था. भारत और मेक्सिको में अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि महामारी के बाद मांग बहुत बढ़ गई और अधिकारियों की संख्या कम होने से बैकलॉग खत्म नहीं हो पा रहा है. चारों देशों में अधिकारियों ने माना कि मांग के मुकाबले स्टाफ की कमी ही देरी की सबसे बड़ी वजह है.
जगह की कमी भी एक बड़ी समस्या है. ऑडिट में कहा गया कि नई दिल्ली में जरूरत के हिसाब से इंटरव्यू विंडो बहुत कम थीं. ऑडिट करने वालों ने देखा कि सैकड़ों लोग यूएस एम्बेसी के बाहर और दूसरे वेटिंग एरिया में इंतजार कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, एम्बेसी परिसर में एक नई बिल्डिंग में जाने की योजना के बावजूद विंडो की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा.
कुछ आवेदनों की जांच में लगने वाला समय और पेड वीजा एजेंटों की भूमिका का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार कुछ एजेंट स्लॉट खाली होते ही बुक कर लेते हैं और फिर उन्हें ग्राहकों को बेच देते हैं. विदेश विभाग ने इस पर रोक के लिए अपना शेड्यूलिंग सिस्टम भी बदला है. भीड़ कम करने के लिए विभाग ने दूसरे उपाय भी किए हैं. वित्त वर्ष 2024 में वाशिंगटन की एक यूनिट ने नई दिल्ली के 80.6 प्रतिशत ऐसे विजिटर वीजा मामलों को दूर से ही निपटा दिया था, जिनमें इंटरव्यू की जरूरत नहीं थी. इसके अलावा नई दिल्ली में मौजूद स्टाफ ने वीजा आवेदनों को जल्दी निपटाने के लिए अतिरिक्त शनिवार को भी काम किया था.
उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की H-1B वीजा पर कड़ी नजर
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बाद H-1B वर्कर चाहने वाली कंपनियों की ज्यादा सख्ती से जांच की जाएगी. दरअसल ट्रंप सरकार एग्जीक्यूटिव एक्शन और सख्त नियमों के जरिए वीजा प्रोग्राम में बदलाव करने की तैयारी कर रही है. वेंस ने कहा कि सरकार ऐसे तरीकों पर विचार कर रही है जिनसे कंपनियों को यह दावा करने से रोका जा सके कि उन्हें कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ वे अपने अमेरिकी कर्मचारियों की संख्या भी कम कर रही हैं. उन्होंने एक काल्पनिक कंपनी का उदाहरण दिया जो कहती है कि उसे "कर्मचारियों की बहुत जरूरत है" लेकिन उसने पहले हजारों अमेरिकियों को नौकरी से निकाला है.
वेंस ने कहा, "कोई कंपनी H-1B वीजा के लिए आवेदन करती है और कहती है, 'अरे, हमें कर्मचारियों की बहुत जरूरत है. हमें कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं.' और फिर जब आप उनका इतिहास देखते हैं, तो पता चलता है कि उन्होंने 5,000 लोगों को नौकरी से निकाला है. यह तो बेतुकी बात है."
उन्होंने आगे कहा, "अगर आप अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रहे हैं, तो आपको उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को खोजने के लिए बाजार में नहीं जाना चाहिए."
(इनपुट- IANS)
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