
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने जवाबी टैरिफ वाले फैसले से दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में भूचाल ला दिया है. वर्ल्ड इकनॉमी इस बात को लेकर सहमी है कि तमाम देशों पर 10 प्रतिशत से लेकर 49 प्रतिशत तक रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के ट्रंप के इस फैसले का क्या असर होगा. एक एंगल चीन को लेकर भी है जिसपर ट्रंप ने 34 प्रतिशत और टैरिफ लादा है. पहले के 20 प्रतिशत टैरिफ को जोड़ दिया जाए तो चीनी वस्तुओं को अमेरिका के मार्केट में बिकने से पहले कुल 54 प्रतिशत टैरिफ देना होगा. चीन ने जवाबी एक्शन की बात कही है जिससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार युद्ध गहरा गया है.
चलिए आपकों आसान सवाल और जवाब के फॉर्मेट में समझाने की कोशिश करते हैं कि ट्रंप के इस ‘टैरिफ बम' का चीन पर क्या असर होगा?
Q: ट्रंप ने टैरिफ से चीन को खतरा क्यों है?
चीन की अर्थव्यवस्था का मूल आधार निर्यात यानी दूसरे देशों में अपना सामान बेचना है. इस वजह से जब भी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव होता है तो चीन उसके प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होता है. अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं. दोनों के बीच व्यापार बहुत बड़ा है. बीजिंग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल अमेरिका में चीनी सामानों की बिक्री कुल $500 बिलियन से अधिक थी- यह चीन के कुल निर्यात का 16.4 प्रतिशत था.
अमेरिकी टैरिफ से चीन की नाजुक आर्थिक सुधार को भी नुकसान पहुंचने का खतरा है. दरअसल चीन संपत्ति क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे ऋण संकट और लगातार कम खपत से जूझ रहा है. लेकिन तीव्र व्यापार युद्ध का मतलब यह होगा कि चीन इस साल अपने निर्यात के भरोसे मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद नहीं कर सकता, जो 2024 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था.
Q: नए टैरिफ का चीन पर क्या असर होगा?
अमेरिका ने चीन पर पिछले महीने ही 20 प्रतिशत के दर से टैरिफ लगाया था. 2 अप्रैल के लिबरेशन डे की घोषणा में इसमें 34 प्रतिशत और जोड़ दिया गया. यानी ट्रंप प्रशासन द्वारा इस एशियाई आर्थिक महाशक्ति से आने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर कुल अतिरिक्त शुल्क 54 प्रतिशत हो गया है. अभी जो टैरिफ लगया गया है वो चरणों में लागू होगा- गुरुवार को दस प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी, उसके बाद 9 अप्रैल को पूरा टैरिफ वसुलना शुरू किया जाएगा. चीन से आने वाले स्टील, एल्युमीनियम और कार आयात पर भी अलग से सेक्टर-वाइज टैरिफ लगाया गया है.
इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस में चाइना रिसर्च के प्रमुख जीन मा ने एएफपी को बताया, "चीन से अमेरिकी आयात में उपभोक्ता वस्तुओं के बजाय पूंजीगत वस्तुओं और औद्योगिक सामग्रियों का वर्चस्व है.. टैरिफ से अमेरिकी निर्माताओं के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा."
बीजिंग में चाइना सेंटर फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक एक्सचेंज के मुख्य अर्थशास्त्री चेन वेनलिंग ने कहा, "इस व्यापार युद्ध का न केवल चीन पर बल्कि वैश्विक व्यापार प्रणाली पर भी विनाशकारी प्रभाव पड़ा है."
Q: चीन अमेरिका को कैसे जवाब दे सकता है?
बीजिंग ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वास्तव में वो जवाब कैसे देगा. हालांकि उम्मीद है कि अपनी जवाबी कार्रवाई में बीजिंग पिछले टैरिफ के जवाब में पहले से लगाए गए टैरिफ में बढ़ोतरी कर सकता है. चीन ने पिछले महीने अमेरिका से कोयले और तरलीकृत प्राकृतिक गैस के आयात पर 15 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था. कच्चे तेल, कृषि मशीनरी, बड़े इंजन वाले वाहनों और पिकअप ट्रकों पर भी 10 प्रतिशत टैरिफ लगता है.
एनालिस्ट्स का कहना है कि ये कदम ट्रंप के वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं - यानी अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में उन लोगों को जिन्होंने पिछले साल वोट देकर ट्रंप को व्हाइट हाउस पहुंचाया था. बीजिंग ने विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत का भी आह्वान किया है, लेकिन किसी भी समझौते में समय लगेगा. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स में बेट्टी वांग ने एएफपी को बताया, "अगले महीनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू होने की अभी भी संभावना है."
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं