- ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़े हमलों की धमकियां दी हैं, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की बात कही गई है
- कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप के इस तरह के आदेश युद्ध अपराध माने जाएंगे
- अमेरिकी सैनिकों के सामने विकल्प है कि वे गैर-कानूनी आदेशों का पालन करें या इनकार कर दें
ईरान के खिलाफ जंग शुरू कर अमेरिका अब खुद उसमें फंसता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार धमकियां दे रहे हैं लेकिन ईरान भी अपनी जिद पर अड़ा है. ट्रंप धमका रहे हैं कि अगर ईरान नहीं मानता है तो उसके पुल, पावर प्लांट को उड़ा दिया जाएगा. वहीं, ईरान इन धमकियों पर ट्रंप का ही मजाक उड़ा रहा है. ट्रंप जो ईरान के सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को उड़ाने की धमकियां दे रहे हैं, वह असल में 'वॉर क्राइम' यानी 'युद्ध अपराध' माना जाता है.
अब इससे अमेरिकी सैनिकों के सामने दुविधा खड़ी हो गई है. उनके पास दो ही रास्ते हैं. पहला- या तो वे ट्रंप का आदेश मानते हुए वॉर क्राइम को अंजाम दें. और दूसरा- या फिर वे ट्रंप के आदेशों को मानने से इनकार कर दें.
ट्रंप ने दो दिन पहले ही ट्रुथ सोशल पर गाली-गलौज वाली पोस्ट करते हुए ईरान को धमकाया था. अब सोमवार को जब उन्होंने व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो फिर कहा कि ईरान के पास मंगलवार रात 8 बजे तक का समय है. अगर वह होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता है तो उसके पास न तो कोई पुल बचेगा और न ही कोई पावर प्लांट.
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ट्रंप और उनके मंत्रियों का धमकी भरा अंदाज
ईरान को लेकर ट्रंप और उनके मंत्री जिस धमकी भरे अंदाज में बात कर रहे हैं, उसे कानूनी जानकार 'वॉर क्राइम' ही मानते हैं.
दो पूर्व जज मार्गरेट डोनोवन और राहेल वैनलैंडिंगहैम ने 'जस्ट सिक्योरिटी' वेबसाइट पर लिखा, 'इस तरह की बातों पर अगर अमल किया तो वे सबसे गंभीर युद्ध अपराध होंगे. राष्ट्रपति के इस तरह के बयान सैनिकों को एक बेहद मुश्किल स्थिति में डाल देते हैं.' उन्होंने आगे लिखा, 'हम जानते हैं कि राष्ट्रपति के बयान हमारे सैनिकों को जो कानूनी ट्रेनिंग मिली थी, उसके बिल्कुल उलट हैं. ऐसे बयान हमारे सैनिकों को ऐसे रास्ते पर धकेलते हैं, जहां से वापसी मुमकिन नहीं है.'
.@POTUS: "This is a critical period... We're giving them until tomorrow, 8:00 pm Eastern Time — and after that, they're going to have no bridges. They're going to have no power plants. Stone ages." pic.twitter.com/Ka2NdHScMu
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) April 6, 2026
उन्होंने कहा कि 'ट्रंप का यह दावा कि वह ईरान पर बमबारी करके उसे 'स्टोन एज' में वापस भेज देंगे और उनके वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का यह आदेश कि 'कोई रियायत नहीं, कोई दया नहीं' न केवल साफ तौर पर गैर-कानूनी है, बल्कि वे उन नैतिक और कानूनी सिद्धांतों के भी उलट हैं, जिनका पालन करने की ट्रेनिंग अमेरिकी सैनिकों को अपने पूरे करियर के दौरान दी गई थी.'
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क्या बगावत करेंगे अमेरिकी सैनिक?
अब अमेरिकी सैनिकों के पास दो ही रास्ते बचते हैं. ब्रिटिश मीडिया आउटलेट 'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस की प्रोफेसर चार्ली कारपेंटर ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब सैनिकों ने न सिर्फ आदेश पर सवाल उठाते हुए उन्हें मानने से इनकार कर दिया, बल्कि वॉर क्राइम रोकने में दखल भी दिया.
उन्होंने एक उदाहरण के तौर पर अमेरिकी सैनिकों का जिक्र किया, जिन्होंने 1968 में वियतनाम में हुए माई लाई नरसंहार में हिस्सा लेने से मना कर दिया था. जिस ऑफिसर ने सैकड़ों गांववालों को गोली मारने का आदेश दिया था, उस अफसर ने अपने कोर्ट मार्शल के दौरान दलील दी थी कि वह सिर्फ ऑर्डर मान रहा था लेकिन कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ऐसे ऑर्डर साफ तौर पर गैर-कानूनी थे.
पिछले साल नवंबर में डेमोक्रेटिक सांसदों ने नवंबर में एक वीडियो संदेश जारी कर अमेरिकी सैनिकों से कहा था कि वे गैर-कानूनी आदेशों को मानने से इनकार कर सकते हैं और उन्हें ऐसे आदेश मानने से इनकार करना ही चाहिए. तब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि ऐसा करना 'देशद्रोह' होगा, जिसके लिए 'मौत की सजा' भी हो सकती है.
चार्ली कारपेंटर ने 'द गार्डियन' से कहा कि 'इस कारण सैनिकों के लिए मना करना या वॉर क्राइम को रोकने के लिए आवाज उठाना मुश्किल हो जाता है.'
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अमेरिकी हमले में ध्वस्त ईरान का पुल. (Photo Credit: IANS)
क्या ऐसा कर सकते हैं अमेरिकी सैनिक?
अब सवाल यही उठता है कि कोई आदेश कानूनी है या गैर-कानूनी? इसकी परिभाषा क्या होगी? इस पर चार्ली कारपेंटर कहती हैं, 'कानूनन सैनिकों के लिए यह जरूरी है कि वे केवल ऐसे गैर-कानूनी आदेशों को मानने से इनकार कर सकते हैं, जो इतने ज्यादा गैर-कानूनी हों कि एक आम समझ वाला व्यक्ति भी यह जान जाए कि यह गलत है.'
उन्होंने आगे कहा कि 'यह सैनिकों के विवेक पर निर्भर करता है लेकिन उन्हें इसकी ट्रेनिंग उस तरह नहीं दी जाती, जिस तरह उन्हें कमांड का पालन करना और अपनी छोटी टुकड़ियों के साथ काम करना सिखाया जाता है. अगर सैनिक कोई गलत अनुमान लगा लेते हैं तो उन्हें आदेश न मानने के आरोप में कोर्ट मार्शल का सामना भी करना पड़ सकता है.'
ऐसे में अमेरिकी सैनिकों के सामने कोई 'सही' फैसला लेना काफी मुश्किल हो सकता है. अब ट्रंप की धमकियां भी और तेज हो गईं हैं. सोमवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान को एक रात में खत्म किया जा सकता है. फिर उन्होंने कहा कि उनकी सेना 4 घंटे में ईरान को तबाह कर सकती है.
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